उस दौर में हेमा मालिनी बॉलीवुड में अपनी पहचान बना रही थीं, लेकिन ‘लाल पत्थर’ ने उनके करियर को एक अलग मोड़ दिया। इस फिल्म से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा अभिनेता राज कुमार से जुड़ा है।बताया जाता है कि फिल्म के लिए पहले वैजयंतीमाला को लेने की चर्चा थी। लेकिन राज कुमार चाहते थे कि उनके साथ हेमा मालिनी ही नजर आएं।
उन्होंने निर्माताओं के सामने हेमा को कास्ट करने पर जोर दिया। शुरुआत में हेमा मालिनी ने फिल्म करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उनका किरदार नकारात्मक रंग वाला था और उन्हें डर था कि करियर के शुरुआती दौर में ऐसा रोल उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।राज कुमार ने उन्हें समझाया और आखिरकार हेमा फिल्म करने के लिए तैयार हो गईं।
1971 में रिलीज हुई ‘लाल पत्थर’ में हेमा ने पहली बार इस तरह का चुनौतीपूर्ण किरदार निभाया और अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींचा। फिल्म में राखी और विनोद मेहरा भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में थे।हालांकि यह कहना कि सिर्फ राज कुमार की जिद से हेमा ‘सुपरस्टार’ बनीं, एक लोकप्रिय फिल्मी किस्सा है; उनके स्टारडम के पीछे कई फिल्मों और वर्षों की मेहनत भी थी। लेकिन ‘लाल पत्थर’ में राज कुमार का उन्हें लेकर विश्वास जरूर यादगार रहा।