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प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौ;त पर हुआ चौंकाने वाला खुलासा, मचा बवाल!

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वृंदावन राधा रानी की भक्ति की वो पावन नगरी जहां दुनिया भर से लोग अपनी रूह की शांति तलाशने आते हैं। जहां हवाओं में फिजाओं में सिर्फ राधे-राधे गूंजता है। लेकिन फिर आती है 25 सितंबर 2026 की वह मनहूस सुबह जब वृंदावन के सबसे चर्चित और पूजनीय संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम गुरु कृपा कुंज में एक ऐसी घटना घटती है जिसने भक्ति की उस पावन नगरी को सन्न कर दिया।

चौथी मंजिल, कमरा नंबर चार और जमीन पर बिखरा । एक 25 साल का युवा साधु जो सब कुछ त्याग कर ईश्वर की शरण में आया था, वो से लथपथ हालत में छत की तरफ भागता है और चंद सेकंड्स में सब खत्म। क्या इसे सिर्फ मान लेना सही होगा? ठहरिए। यह कोई साधारण की कहानी नहीं है। क्योंकि जब पुलिस ने उस बंद कमरे का दरवाजा तोड़ा तो अंदर का मंजर देखकर अनुभवी अफसर्स के भी रोंगटे खड़े हो गए।

कमरे में पड़ा था एक कटर ग्राइंडर और बिखरे थे ऐसे राज जिसने इस पूरी कहानी को एक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। 25 सितंबर सुबह के ठीक 10:15 आश्रम में हमेशा की तरह चहल-पहल थी। लेकिन आश्रम के ठीक सामने लगे कैमरे में एक साया कैद होता है। यह साया था रसिक दुलारी शरण का जिनका असली नाम था दीपक लोधी।

जबलपुर का रहने वाला 25 साल का एक नौजवान। एक जोरदार आवाज और आश्रम के आंगन में चीखपकार मच जाती है। रसिक दुलारी शरण छत से नीचे गिर चुके थे। अस्पताल ले जाया गया लेकिन सांसों की डोर टूट गई और यह सब कुछ कैमरे में कैद हुआ। लेकिन इससे पहले रसीक दुलारी के साथ क्या हुआ?

यह जानना अब पुलिस के साथ-साथ हमारे और आपके लिए भी टेढ़ी खीर बन चुका है। जरा सोचिए कहानी यहीं खत्म हो जानी चाहिए थी। है ना? कि एक साधु ने छत से कर दे दी। पुलिस ने भी शुरुआत में बयान देकर इतिश्री कर ली थी। दिनांक 259 को सुबह एक सूचना प्राप्त हुई थी कि सरद अस्पताल में एक व्यक्ति घायल अवस्था में आके यहां पर एडमिट हुए हैं। इस सूचना को संज्ञान लेते हुए तत्काल इसमें जांच की गई तो जानकारी हुआ कि दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण जो जबलपुर के रहने वाले हैं। ये केली कुंज से संबंधित गुरु कृपा कुंज आश्रम है। वहां पे ये रह रहे थे। आज सुबह 10:30 बजे फोर्थ फ्लोर की छत से जाके इनके द्वारा कूद के करने की बात प्रकाश में आ रही है।

इस संबंध में तत्काल फॉरेंसिक टीम को और थाने की टीम को बुलाया गया। फॉरेंसिक टीम के द्वारा मौके पर साक्ष्य ज किए गए हैं और थाना वृंदावन की टीम के द्वारा पंचायतनामा और पीएम की कारवाई इसमें की जा रही है। इनके परिजनों को सूचना दे दी गई है। इस संबंध में आवश्यक विधिक कारवाई लेकिन कहानी खत्म नहीं हुई। पता है क्यों? क्योंकि असली खेल तो अब शुरू होता है। जब पुलिस की टीम और एक्सपर्ट्स चौथी मंजिल के उस कमरे में दाखिल हुए तो उन्हें लगा कि शायद कोई नोट मिलेगा लेकिन वहां नोट नहीं बल्कि का एक खौफनाक औजार मिला। कमरे के फर्श पर पड़ा था एक मार्बल कटर ग्राइंडर। वही ग्राइंडर जिसका इस्तेमाल पत्थर काटने के लिए किया जाता है और उस पर लगे थे ताजा के धब्बे। अब सवाल यह है कि क्या छत से से ठीक पहले रसीक दुलारी शरण ने उस कटर ग्राइंडर को चालू किया और अपने ही शरीर पर चला दिया।

यहां तक कि शरीर के सबसे संवेदनशील अंग पर यानी कि अपने पर ग्राइंडर से गहरे वार कर दिए और फिर वो दौड़कर चौथी मंजिल के कोने तक आ गया और कूद गया। सोचिए कौन करता है ऐसा? कोई इंसान होश में रहते हुए अपने ही शरीर को से काट सकता है क्या? क्या यह कोई असहनीय मानसिक था? क्या यह किसी तांत्रिक या किसी का भयानक भ्रम था या फिर इस कमरे के अंदर कोई और था जिसने अपने किसी राज को छुपाने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया और खुद गायब हो गया।

पुलिस की तफ्तीश अब तीन सबसे बड़े और गहरी थ्योरीज के इर्द-गिर्द घूम रही है और यह तीनों थ्योरीज आपको सोचने पर मजबूर कर देगी कि क्या वाकई यह । पहली थ्योरी क्या रसिक दुलारी को कोई कर रहा था? क्या 25 साल के इस युवा साधु को कोई डिजिटल दुनिया से ब्लैकमेल कर रहा था? यह बड़ा सवाल है। क्योंकि आजकल में कई ऐसे गैंग एक्टिव हैं जो युवाओं को फंसाकर इस कदर मानसिक दे देते हैं कि इंसान के पास खुद को खत्म करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। क्या रसिक दुलारी शरण भी किसी ऐसे ही अदृश्य जाल में उलझे हुए थे?

दूसरी थ्योरी कहती है आध्यात्मिक भ्रम जिसने खुद को नुकसान पहुंचाया। आध्यात्म का मार्ग बहुत कठिन होता है। कभी-कभी वैराग्य की अति या मन का गहरा द्वंद इंसान को मानसिक रूप से तोड़ देता है। क्या उनके अंदर भी कोई ऐसा तूफान चल रहा था जिसे आश्रम का कोई साथी कोई मित्र भांप नहीं पाया। और यह थ्योरी इसलिए सटीक नजर आती है क्योंकि याद कीजिए बुराड़ी का वो केस जिसमें एक ही परिवार के 11 l पर झूल गए थे। और आज तक वो राज सुलझ नहीं पाया है। बताया गया कि जो घर का बड़ा लड़का था उसके सपने में उसके पिताजी आया करते थे जो पहले ही स्वर्ग से धार चुके थे और एक अंधविश्वास था, एक भ्रम था। तो ये उसका एक और उदाहरण हो सकता है।

तीसरी थ्योरी क्या किसी और ने इस वारदात को अंजाम दिया। सवाल यह है कि क्या उस कमरे में कटर चलाने वाला कोई और था? क्या किसी ने इस वारदात को अंजाम देकर इसे का रूप देने की कोशिश की? हालांकि फुटेज में वह अकेले दिख रहे हैं, लेकिन फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या उन्हें चलाने पर मजबूर किया गया था। इस पूरे भयानक सस्पेंस का जवाब अब उस एक डिब्बे में बंद है जिसे हम और आप स्मार्टफोन कहते हैं। पुलिस ने रसिक दुलारी शरण का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। फोन पासवर्ड से लॉक था।

खबर है कि मौत से ठीक पहले कुछ चैट्स और डाटा डिलीट किए गए थे। फिलहाल उस फोन को राज्य की सबसे बड़ी डिजिटल फॉरेंसिक लैब में भेजा गया है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स अब उस फोन के डिलीट हो चुके एक-एक WhatsApp मैसेज, कॉल रिकॉर्ड्स और आखिरी 72 घंटों की Google YouTube सर्च हिस्ट्री को रिकवर कर रही हैं। क्योंकि वही फोन बताएगा कि 25 सितंबर की सुबह 10:15 पर और उससे पहले उस बंद कमरे में क्या हुआ था।

वृंदावन का यह आश्रम, संत प्रेमानंद जी का नाम और एक 25 साल के साधु का यह खौफनाक अंत। सवाल बहुत हैं और जवाबों का इंतजार पूरे देश को। सवाल यह भी हैं कि परिवार वालों का कहना है कि पिछले काफी वक्त से खासकर जब से रसिक दुलारी ने गुरु दक्षिणा ले ली थी तब से मिलना उनसे बहुत नामुमकिन सा हो गया था। परिवार वाले जाते दो-ती घंटे उनको बैठाया जाता। बाद में उनको खाली हाथ लौटना पड़ता था। मुलाकात नहीं हो पाती थी। परिवार ने रसिक दुलारी को यानी कि दीपक लोधी को अपने परिवार का सबसे सही लड़का बताया है।

इसका क्या मतलब है जानते हैं कि वो अपने परिवार में सबसे सीधा साफ सुथरा लड़का था। उन्होंने जब से गुरु दक्षिणा ली है जब से मिलने नहीं दिए। किसी को नहीं मिलने दिए परिवार वालों को। नहीं नहीं किसी को नहीं मिलने दिए। जब से गुरु दक्षिणा ली है। क्यों नहीं मिलने देते? वो हम लोग जाते रहे मिलने के लिए तो कुछ भी बोल देते रहे कि रुको 1 घंटे 2 घंटे रुको।

पर अभी आते हैं फिर बता रहे हैं। तो बस दिन प्रति कर देते रहे वो लोग। कभी भी बात उसके नहीं मोबाइल वाल कुछ नहीं चलाता रहा उसने मोबाइल सब पहले बस बंद कर दिया था बता के साथ गलत हुआ है ये भी बता रहे हैं प्राइवेट पार्ट पे भी उनके चोट है ऐसे एक्चुअली हम लोग को कुछ ऐसा कुछ नहीं पता है अभी तक ऐसा किसी ने कुछ बताया अभी तक क्या लगता है आप लोगों को करते ऐसा कुछ नहीं है वो सबसे सही लड़का था सही से जी तो क्या लगता है किसी ने हत्या कर दी धक्का दे दिया ऊपर से अब इसके बारे में अभी कुछ बोल नहीं सकते हम क्या लग रहा है आप लोगों को आप लोगों ने जो प्रेमानंद जी वहां गए उनका व्यवहार रहा अभी तो हम जितने बार उनसे गए हैं जब पहले थे वो पहले मिलने जाते रहे तो उन्होंने मिलने नहीं दिया हमको नहीं मिलने देते थे तीन से चक्कर चक्कर काटते रहे तीनती दिन तक अब आप लोग यहां पर मौजूद है परिवार प्रेमंद जी यहां से कोई भी दिख गया।

यहां पर कोई आया आया उनके यहां तक उसने बात की आप किसी ने कुछ बात नहीं की अभी कोई आपकी तरफ संवेदना नहीं है उन लोगों को अब मेरे को इसमें कुछ पता नहीं है उनको तो आना चाहिए था वैसा किसी ना किसी को कोई नहीं आया नहीं ऐसे में कई सारे सवाल है सवाल ये भी कि परिजनों को मिलने क्यों नहीं दिया जा रहा था?

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