इस घटना से जो साधु समाज के अंदर है बड़ा ही दुख हुआ एक युवा साधु की जो की है। अभी तक प्रशासन ने इसके ऊपर कोई टीका टिप्पणी नहीं की है और ना कोई उच्च स्तरीय जांच की व्यवस्था की है। हमने प्रशासन से मांग की है आज बैठक में के उच्च स्तरीय जांच कमेटी ठीक की जाए और जल्द से जल्द इस पर पर्दाफाश किया जाए जिससे वृंदावन की छवि धूमिल ना हो। मैं एक प्रशासन से विशेष मांग और करना चाहता हूं कि वृंदावन में असामाजिक तत्व जो कपड़े पहन के अचला पहन के लंबी जटाएं रख के दाढ़ी रख के तिलक लगा के बहुत घूम रहे हैं।
तो इन संतों की जहां पहले एक बार हम लोगों ने मांग रखी थी कि इनकी जांच करी जाए। कौन से अखाड़े से हैं? कौन से द्वारे से हैं? किस महात्मा के शिष्य हैं? यह परंपरा क्या है आपकी? कौन तो यह सभी की जांच होगी तो निश्चित ही यहां वृंदावन में आपको बहुत कुछ मिलेगा क्योंकि पूरे भारत के ये स्तंभ धर्म का स्तंभ सनातन का स्तंभ वृंदावन है और इसकी भूमि को सुरक्षित पवित्र रखना शासन प्रशासन और हम लोगों की जिम्मेदारी है।
इसे शीघ्र ही इन लोगों की जांच कराई जाए। इनकी आइडेंटिफिकेशन की जाए कि यह कहां से और कौन है। तो मेरा प्रशासन पता है कि आप देख रहे हैं पूरे वृंदावन परगम मार्ग में हर जगह पर आप देखते हैं कोई भी आदमी का कोई तिलक सही नहीं है। कोई कोई कपड़े कैसे पहनता है। अगर संतों से जुड़े हुए हैं तो क्यों ना आश्रम में रहते हैं ये लोग। देखिए ऐसे हमारे ये संतों का जो मृत्यु हुई है यह दर्दनाक मृत्यु हुई है।
अगर इसे ये लोग कहते हैं आश्रम वाले कि इन्हने अपने आप ही । श्रीधाम वृंदावन केली कुंज में एक महात्मा के साथ बहुत गलत घटना घटी है। और केली कुंज में ऐसी घटनाएं समय-समय पर होती रहती है। और ये कई सालों से कई वर्षों से यह घटनाएं सुनने को मिल रही है कि वहां जमीन कब्जे किए जा रहे हैं। उनके चेले जमीन कब्जा कर रहे हैं और कर रहे हैं।
प्रशासन के बाद नजर में भी हैं। लेकिन ये घटना जो महात्मा के साथ हुआ है। ये बिल्कुल ही सनातन संस्कृति और वृंदावन को कलंकित करने वाला ये घटना है। उस महात्मा के साथ ऐसी दरिंदगी हुई है जो किसी के साथ हुआ है। मैं समझता हूं कि केलीकुंड जो है बिल्कुल जवाहर बाग का रूप ले लिया है। ये समय-समय पे वही घटनाएं किसी मां बहन के साथ, किसी बेटी के साथ, किसी गरीब के साथ जो वास्तविक भक्तों के साथ ये घटनाएं हो रही जो घटनाएं और जो कार्य प्रणाली जवाहर बाग में थी वही प्रेमानंद महाराज के चेले और भक्त ही कर रहे हैं।
ये बिल्कुल जवाहर बाग का दूसरा रूप है। केली कुंजी है। इस घटना से जो साधु समाज के अंदर है। बड़ा ही दुख हुआ है। एक युवा साधु की जो हत्या निर्मल की है। अभी तक प्रशासन ने इसके ऊपर कोई टीका टिप्पणी नहीं की है और ना कोई उच्च स्तरीय जांच की व्यवस्था की है। हमने प्रशासन से मांग की है आज बैठक में के उच्च स्तरीय जांच कमेटी ठीक की जाए और जल्द से जल्द इस पर पर्दाफाश किया जाए जिससे वृंदावन की छवि धूमिल ना हो। मैं एक प्रशासन से विशेष मांग और करना चाहता हूं कि वृंदावन में असामाजिक तत्व जो कपड़े पहन के अचला पहन के लंबी जटाएं रख के दाढ़ी रख के तिलक लगा के बहुत घूम रहे हैं। तो इन संतों की जहां पहले एक बार हम लोगों ने मांग रखी थी कि इनकी जांच करी जाए। कौन से अखाड़े से हैं? कौन से द्वारे से हैं? किस महात्मा के शिष्य हैं? ये परंपरा क्या है आपकी? कौन तो यह सभी की जांच होगी तो निश्चित ही यहां वृंदावन में आपको बहुत कुछ मिलेगा क्योंकि पूरे भारत के ये स्तंभ एक धर्म का स्तंभ सनातन का स्तंभ वृंदावन है और इसकी भूमि को सुरक्षित पवित्र रखना शासन प्रशासन और हम लोगों की जिम्मेदारी है।
इसे शीघ्र ही इन लोगों की जांच कराई जाए। इनकी आइडेंटिफिकेशन की जाए कि यह कहां से और कौन है। तो मेरा प्रशासन पता है कि आप देख रहे हैं पूरे वृंदावन परगम मार्ग में हर जगह पर आप देखते हैं कोई भी आदमी का कोई तिलक सही नहीं है। कोई कोई कपड़े कैसे पहनता है। अगर संतों से जुड़े हुए हैं तो क्यों ना आश्रम में रहते हैं ये लोग। देखिए यह ऐसे हमारे यह संतों का जो मृत्यु हुई है यह दर्दनाक हुई है। अगर इसे ये लोग कहते हैं आश्रम वाले कि इन्हने अपने आप ही और केली कुंज में ऐसी घटनाएं समय-समय पर होती रहती है। और ये कई सालों से कई वर्षों से यह घटनाएं सुनने को मिल रही है कि वहां जमीन कब्जे किए जा रहे हैं। उनके चेले जमीन कब्जा कर रहे हैं और माफियागिरी कर रहे हैं। प्रशासन के बाद नजर में भी हैं।
लेकिन ये घटना जो महात्मा के साथ हुआ है। ये बिल्कुल ही सनातन संस्कृति और वृंदावन को कलंकित करने वाला ये घटना है। उस महात्मा के साथ ऐसी दरिंदगी हुई है जो किसी आतंकवादी के साथ हुआ है। मैं समझता हूं कि केलीकुंड जो है बिल्कुल जवाहर बाग का रूप ले लिया है। ये समय-समय पे वही घटनाएं किसी मां बहन के साथ, किसी बेटी के साथ, किसी गरीब के साथ जो वास्तविक भक्तों के साथ ये घटनाएं हो रही जो घटनाएं और जो कार्य प्रणाली जवाहर बाग में थी वही प्रेमानंद महाराज के चेले और भक्त ही कर रहे हैं। ये बिल्कुल जवाहर बाग का दूसरा रूप है। केली कुंजी है। इस घटना से जो साधु समाज के अंदर आक्रोश है। बड़ा ही दुख हुआ है। एक युवा साधु की जो हुई है या वह उसने खुद आत्महत्या की है। अभी तक प्रशासन ने इसके ऊपर कोई टीका टिप्पणी नहीं की है और ना कोई उच्च स्तरीय जांच की व्यवस्था की है। हमने प्रशासन से मांग की है आज बैठक में के उच्च स्तरीय जांच कमेटी ठीक की जाए और जल्द से जल्द इस पर पर्दाफाश किया जाए जिससे वृंदावन की छवि धूमिल ना हो। मैं एक प्रशासन से विशेष मांग और करना चाहता हूं कि वृंदावन में असामाजिक तत्व जो कपड़े पहन के अचला पहन के लंबी जटाएं रख के दाढ़ी रख के तिलक लगा के बहुत घूम रहे हैं।
तो इन संतों की जहां पहले एक बार हम लोगों ने मांग रखी थी कि इनकी जांच करी जाए। कौन से अखाड़े से हैं? कौन से द्वारे से हैं? किस महात्मा के शिष्य हैं? ये परंपरा क्या है आपकी? कौन तो यह सभी की जांच होगी तो निश्चित ही यहां वृंदावन में आपको बहुत कुछ मिलेगा क्योंकि पूरे भारत के ये स्तंभ एक धर्म का स्तंभ सनातन का स्तंभ वृंदावन है और इसकी भूमि को सुरक्षित पवित्र रखना शासन प्रशासन और हम लोगों की जिम्मेदारी है। इसे शीघ्र ही इन लोगों की जांच कराई जाए।
इनकी आइडेंटिफिकेशन की जाए कि यह कहां से और कौन है। तो मेरा प्रशासन पता है कि आप देख रहे हैं पूरे वृंदावन परगम मार्ग में हर जगह पर आप देखते हैं कोई भी आदमी का कोई तिलक सही नहीं है। कोई कोई कपड़े कैसे पहनता है। अगर संतों से जुड़े हुए हैं तो क्यों ना आश्रम में रहते हैं ये लोग। देखिए ऐसे हमारे यह संतों का जो मृत्यु हुई है यह दर्दनाक हुई है। अगर इसे ये लोग कहते हैं आश्रम वाले कि इन्हने अपने आप ही फांसी लगाई या आप ही कूदा ये गलत है। श्रीधाम वृंदावन केली कुंज में एक महात्मा के साथ बहुत गलत घटना घटी है। और केली कुंज में ऐसी घटनाएं समय-समय पर होती रहती है। और ये कई सालों से कई वर्षों से यह घटनाएं सुनने को मिल रही है कि वहां जमीन कब्जे किए जा रहे हैं। उनके चेले जमीन कब्जा कर रहे हैं और कर रहे हैं। प्रशासन के बाद नजर में भी हैं।
लेकिन ये घटना जो महात्मा के साथ हुआ है। ये बिल्कुल ही सनातन संस्कृति और वृंदावन को कलंकित करने वाला ये घटना है। उस महात्मा के साथ ऐसी दरिंदगी हुई है जो किसी आतंकवादी के साथ हुआ है। मैं समझता हूं कि केलीकुंड जो है बिल्कुल जवाहर बाग का रूप ले लिया है। ये समय-समय पे वही घटनाएं किसी मां बहन के साथ, किसी बेटी के साथ, किसी गरीब के साथ जो वास्तविक भक्तों के साथ ये घटनाएं हो रही जो घटनाएं और जो कार्य प्रणाली जवाहर बाग में थी वही प्रेमानंद महाराज के चेले और भक्त में ही कर रहे हैं। ये बिल्कुल जवाहर बाग का दूसरा रूप है केली कुंजी।