एक इंटरव्यू में, वीजू खोटे बताते हैं कि “फिल्म (शोले) के लिए कालिया के सीन की शूटिंग पहले किसी और के साथ शुरू हो चुकी थी। लेकिन मेकर्स को वह पसंद नहीं आया। तब उन्होंने अमजद से कहा कि वीजू को बुला लो। अमजद भाई ने मुझे फोन किया और कालिया के किरदार के बारे में बताया। यह फिल्म मैंने 1973 में शूट की थी।”
वीजू के मुताबिक, अमजद ने जब उनसे पूछा कि वे घुड़सवारी कर लेते हैं तो उन्होंने झूठी हामी भर दी। हालांकि, उसके बाद घुड़सवारी ट्रेनिंग ली। लेकिन शूट के दौरान उन्हें रेस की घोड़ी दी गई, जिसने उन्हें खूब परेशान किया। वीजू ने बताया था, “वह घोड़ी मुझे हर शॉट में गिरा देती थी।
जिस सीन में हम गांव में माल लेने जाते हैं, उसकी शूटिंग एक सप्ताह तक हुई थी और इस दौरान घोड़ी ने मुझे 6-7 बार गिराया था। लेकिन उनके पास भूरे रंग का कोई दूसरा घोड़ा या घोड़ी नहीं थी। इसलिए इसे बदल भी नहीं सकता था। इस बीच मुंबई आया और जुहू चौपाटी पर घुड़सवारी सीखी। लेकिन बाद के सीन में घोड़े का काम ही नहीं था।”