नेताजी ने में चीफ ऑफिसर के टेबल पर ही छोड़ दिया और फिर लहराई रुपयों की माला। आवारा से लोग परेशान थे। शिकायतें की जा रही थी। कार्यवाही की मांग हो रही थी। लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो एक नेता को ही लेकर नगर पंचायत के दफ्तर पहुंच गया।
महाराष्ट्र के नासिक जिले के निफाड़ में के युवा सेना जिला प्रमुख विक्रम रंधावे ने आवारा की समस्या को लेकर ऐसा विरोध किया जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रहा है। वो एक झोले में लेकर नगर पंचायत के मुख्य अधिकारी के दफ्तर पहुंचे और उसे अधिकारी की टेबल पर ही छोड़ दिया।
इसके बाद मुख्य अधिकारी धीरज भामरे को नोटों की माला पहनाकर नगर पंचायत के कामकाज पर भी तंज कसा गया। दरअसल निफाड शहर और आसपास के इलाकों में आवारा की बढ़ती संख्या को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी की बात सामने आई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शहर में बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और सड़क पर चलने वाले लोगों को परेशानी हो रही है और घटनाएं सामने भी आ चुकी हैं।
उनका कहना है कि इस समस्या को लेकर नगर पंचायत को कई बार शिकायतें और लिखित रिप्रेजेंटेशन दिए गए। लेकिन इसके बावजूद समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। इसी नाराजगी को जाहिर करने के लिए विक्रम रंधावे और उनके साथ मौजूद लोग निफाड़ नगर पंचायत के मुख्य अधिकारी धीरज भामरे के ऑफिस पहुंचे।
वायरल वीडियो में विक्रम रंधावे हाथ में एक झोला लेकर अधिकारी के कमरे में जाते दिखाई दे रहे हैं। बैठकर बातचीत चल रही है। इसके बाद अचानक वो झोला खोलते हैं और उसमें मौजूद को अधिकारी की टेबल पर छोड़ देते हैं। अधिकारी भी यह देखकर हैरान होकर पीछे नजर आते हैं।
अचानक ऑफिस में पहुंचने से वहां कुछ देर के लिए अफरातफरी जैसा माहौल बन गया। इस पूरे प्रदर्शन के जरिए प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन का ध्यान आवारा की समस्या की तरफ खींचने की कोशिश की। विरोध के दौरान मुख्य अधिकारी को नोटों की माला पहनाने की भी कोशिश की गई।
प्रदर्शनकारियों ने इस तरीके से नगर पंचायत के कामकाज पर तंज कसा और सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने नगर पंचायत अधिकारियों पर आरोप लगाए कि शहर में आवारा की समस्या गंभीर होने के बावजूद प्रशासन का ध्यान नागरिकों की समस्या के बजाय टेंडर प्रक्रिया पर है।
हालांकि नगर पंचायत प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि नगर पंचायत आवारा की समस्या को गंभीरता से ले और इसके लिए व्यवस्थित अभियान चलाएं। उनकी मांग है कि आवारा को पकड़ने की व्यवस्था, उनकी समस्या को नियंत्रित करने के लिए अभियान और लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाना शामिल है।
विक्रम रंधावे का कहना है कि अगर जल्द कारवाही नहीं हुई तो आगे भी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने दोबारा इसी तरह को नगर पंचायत कार्यालय लाने की चेतावनी भी दी है। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
कुछ लोग आवारा की समस्या को लेकर किए गए इस अनोखे विरोध का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ लोग विरोध के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। यूज़र्स का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। लेकिन किसी बेजुबान जानवर को इस तरह लाना कितना उचित है?
वहीं कुछ लोगों ने इसे शानदार ज़बरदस्त बताते हुए विरोध के तरीके की तारीफ भी की। निफाड़ का यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश के अलग-अलग शहरों में आवारा कुत्तों को लेकर लोगों की सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन का सवाल लगातार चर्चा में रहता है। समस्या सिर्फ एक शहर की नहीं है।
सवाल यह भी है कि आवारा की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के साथ-साथ लोगों और जानवरों दोनों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए? को नगर पंचायत की टेबल पर छोड़ना विरोध का अनोखा तरीका जरूर है। लेकिन इसके पीछे आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर गंभीर सवाल है। अगर किसी इलाके में लगातार शिकायतें मिल रही हैं तो प्रशासन को उनका संज्ञान लेकर प्रभावी कदम उठानी चाहिए। जरूरत ऐसी व्यवस्थित व्यवस्था की है जिसमें वैज्ञानिक और कानूनी तरीके से , और संख्या नियंत्रित करने के साथ लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।