राजेश खन्ना और वहीदा रहमान की वहीदा रहमान ने राजेश खन्ना पर काफी बातें की है अपने कई इंटरव्यूज में और आज उन्हीं इंटरव्यूज का निचोड़ इस पॉडकास्ट में हम आपके लिए लेकर आए हैं जिसमें वहीदा रहमान के हवाले से राजेश खन्ना पर बात होगी और राजेश खन्ना के साथ वहीदा रहमान ने जो फिल्में की और उस दौर की चर्चा होगी और शूटिंग के वो किस्से जो खुद वहीदा रहमान ने राजेश खन्ना के साथ फेस किए 70 और 80 के दशक में अपने चार्मिंग स्टाइल और बेहतरीन एक्टिंग से राजेश खन्ना ने लोगों को दीवाना बना दिया।
हम सभी जानते हैं हेक्टर ने सालों तक बड़े पर्दे पर अकेले राज किया और कहा जाता है कि काका जैसा स्टारडम आज तक किसी स्टार ने देखा नहीं दावा तो बहुत लोग करते हैं ।
सलमान से लेकर शाहरुख बाद के दिनों में तमाम ऐसे उदाहरण आपको मिल जाएंगे लेकिन राजेश खन्ना जैसा स्टारडम आज तक किसी एक्टर ने नहीं देखा क्योंकि उन्होंने जिस तरीके से बैक टू बैक 15 से 17 सुपर डुपर हिट फिल्में बॉलीवुड को दी वो इतिहास आज तक कोई दोहरा नहीं पाया हम सभी जानते हैं और कई बात कई बार इस बात का जिक्र हो चुका है और ऐसे में क्या आप यह यकीन कर पाएंगे कि इंडस्ट्री के एक दिग्गज एक्ट्रेस ने उन्हें खराब एक्टर कह दिया था हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के खूबसूरत अदाकारा वहीदा रहमान की जिन्होंने राजेश खन्ना के साथ धर्म नसीब मकसद खामोशी जैसी कई फिल्मों में काम किया और ऐसे में एक शो के दौरान वहीदा रहमान ने राजेश खन्ना से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया और राजेश खन्ना को बुरा एक्टर कह दिया।
अब बुरा एक्टर कहने के पीछे का संदर्भ क्या था आप इसे भी समझिए दरअसल जब शो में एक्ट्रेस से पूछा गया कि उनके दौर का सबसे अच्छा और सबसे बुरा एक्टर कौन था तो उन्होंने कहा कि राजेश खन्ना उस दौर में सबसे ज्यादा दुखी करने वाले एक्टर थे वह बहुत कंजूस भी थे अगर कोई उनसे पैसे की बात करता था तो वह बात टाल करर गायब हो जाते थे हालांकि राजेश खन्ना की दरिया दिल्ली के ढेरों किस्से हैं लेकिन वहीदा रहमान को अपने एंगल से राजेश खन्ना कंजूस लगे जिसका जिक्र उन्होंने किया वैदा रहमान राजेश खन्ना की पोल खोलते हुए आगे कहती हैं कि जब हम शूटिंग करते थे तो अक्सर राजेश खन्ना गानों की लाइने भूल जाते थे और ऐसे में जब कैमरा किसी और जगह पर घूमता तो वह मुझे लिरिक्स के लिए पूछ लेती थे और जब कैमरा उन पर आता था ।
तो वो उसे गुनगुनाने लगते थे एक्ट्रेस ने बताया कि जब वह लिरिक्स भूलते थे तो मैं उनसे हमेशा कहती थी कि अब तुम सुपरस्टार बन गए हो इसलिए अपनी डायलॉग और लिरिक्स याद रखा करो तो वह मुझसे कहते कि सुपरस्टार बनने से क्या होता है मैं रहूंगा तो हमेशा राजेश ही वहीदा जी मैं कभी बदलूंगा नहीं।
इस दौरान अपने सबसे अच्छे एक्टर की बात करते हुए वहीदा रहमान ने कहा के उस दौर में शशि कपूर सज्जन व्यक्ति थे इसके अलावा शमी कपूर जी सेट पर सबसे कूल और मस्ती होर करने वाले एक्टर थे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में जब का दौर अपने चरम पर था।
इंडस्ट्री में दिलीप कुमार राज कपूर देवानंद जैसे एक्टर्स का बोलबाला था ऐसे में किसी भी नए कलाकार के लिए जगह बनाना बहुत मुश्किल था लेकिन उस दौर में भी राजेश खन्ना ने जो मुकाम हास किया उसे छुपाना आज भी किसी सुपरस्टार के लिए मुमकिन नहीं हो पाया है।
उसके लिए लोगों में जो दीवानगी थी वैसा आज तक किसी कलाकार के लिए नहीं दिखा राजेश खन्ना आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके किस्से फैंस के बीच काफी मशहूर है और उनके साथ कई फिल्मों में काम कर चुकी एक्ट्रेस वहीदा रहमान बताती है कि राजेश खन्ना इंडस्ट्री के सबसे दिलचस्प एक्टर तो थे ही लोग उन्हें पसंद तो करते ही थे।
लेकिन वह कंजूस थे इस बात का जिक्र वो बार-बार करते हैं जब उनसे सेट पर कंजूस आदमी के बारे में एक इंटरव्यू में पूछा गया तो उनका जवाब था कि राजेश खन्ना और वैद रहमान इस किस्से में आगे बताती हैं कि राजेश खन्ना बॉलीवुड के सबसे कंजूस आदमियों में से एक थे जब भी कोई उनसे पैसे की बात करता था तो वह पीछे मुड़ते और गायब हो जाते थे वैदा रहमान ने यह भी कहा कि राजेश खन्ना सेट पर हमेशा देर से आते थे शूट सुबह की होती थी तो वह शाम तक आते थे वहीदा रहमान ने राजेश खन्ना के साथ खामोशी धर्म काटा मकसद जैसी फिल्में की और राजेश खन्ना के साथ वहीदा रहमान को जो अनुभव हुआ उसमें उन्होंने काका को कंजूस पाया हालांकि इसके उलट मशहूर लेखक और सलमान खान के पिता सलीम खान ने राजेश खन्ना के बारे में लिखा है कि वह जिससे खुश होते उसे मकान और गाड़ियां तक गिफ्ट कर देते थे।
उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड अंजू महेंद्र को भी एक आलीशान बंगला तोहफे में दिया था इसके अलावा भी ढेरों के से हैं जो काका की दरिया दिल्ली की कहानी कहते हैं यासिर उस्मान की किताब राजेश खन्ना की जीवनी पर जो उन्होंने लिखी राजेश खन्ना कुछ तो लोग कहेंगे उस किताब के एक हिस्से में सलीम खान लिखते हैं कि बड़े दिल के आदमी थे काका खाने खिलाने के शौकीन थे मैं जानता हूं कि उन्होंने अपने स्टाफ के लोगों को मकान भी दिए हैं कोई अच्छा आदमी लगता था तो उसके लिए बिछ जाते थे ।
गाड़ियां तक गिफ्ट कर दी उस जमाने में अपने दोस्त नरेंद्र बेदी को उन्होंने एक गाड़ी तोहफे में दी थी लेकिन सबका तजुर्बा अलग-अलग होता है यह सलीम खान का तजुर्बा है और वह वहीदा रहमान का तजुर्बा वहीदा रहमान ने राजेश खन्ना के साथ जो पहली फिल्म की थी वह फिल्म थी खामोशी और उस दौर को याद करते हुए वहीदा कहती हैं कि मेरी राजेश खन्ना से पहली मुलाकात फिल्म खामोशी के सेट पर हुई थी उस वक्त वो नए-नए फिल्मों में आए थे।
बहुत ही खामोश और शर्मीले किस्म के इंसान थे ज्यादा बातें नहीं करते थे फि फिल्म की शूटिंग के लिए हम कोलकाता गए वहां सारी यूनिट एक ही होटल में रुकी तब थोड़ा-थोड़ा उनसे मुलाकात होने लगी और वह थोड़ा-थोड़ा खुलने लगे थे वो उन दिनों बड़े सलीके से रहते थे बड़े ही सरल तरीके से रहा करते थे।
किसी को इल्म भी नहीं था कि यह लड़का इतना बड़ा सितारा बनने वाला है और बहुत कम लोगों को पता है कि फिल्म खामोशी के लिए निर्देशक हेमंत कुमार को मैंने राजेश खन्ना का नाम सुझाया था उस वक्त उनकी फिल्म आखिरी खत रिलीज हो चुकी थी और खामोशी दरअसल एक हीरोइन प्रधान फिल्म थी और इसलिए उसमें उस वक्त का कोई बड़ा सितारा काम करने को तैयार नहीं था हेमंता देवानंद को लेना चाहते थे लेकिन बात बनी नहीं तो वहीदा कहती है कि मैंने हेमंता को कहा कि यह जो नया लड़का आया है यह ठीक है इसे ले सकते हैं और उन्होंने बात मान ली खामोशी की शूटिंग का एक दिलचस्प वाक्य है जो वहीदा बताती है कि हम इसके गाने वह शाम कुछ अजीब थी कि शूटिंग कर रहे थे।
और राजेश खन्ना गाने के बोल भूल रहे थे तो लिप्सिंग में मुश्किल हो रही थी गाने के सीन में मुझे उनके गले लगना था और उन्होंने मुझसे कहा वहीदा जी जब कैमरा मेरे चेहरे पर आए और आपकी पीठ पर तो आप गाना गुनगुना देना जिससे मुझे उसके बोल पकड़ने में आसानी हो जाएगी वह अक्सर गाने के बोल पकड़ नहीं पाते थे खामोशी फिल्म के बाद धीरे-धीरे वह बड़े सितारे बनने लगे उनकी शर्मिला टैगोर और मुमताज के साथ जोड़ी ज्यादा जमने लगी मैं गंभीर किस्म की फिल्में ज्यादा करती थी और बतौर नायिका मेरा करियर धीरे-धीरे खत्म हो रहा था तो मैंने उनके साथ ज्यादा फिल्में नहीं की।
हालांकि वह बहुत ही सरल किस्म के इंसान थे लेकिन उनमें कोई जदा था हर उम्र का इंसान उनकी तरफ खींचा चला आता था उनके आकर्षण को परिभाषित नहीं किया जा सकता कई लोग उन्हें मुड़ी किस्म का कलाकार मानते थे लेकिन ऐसा नहीं था हम कलाकारों के साथ दिक्कत यह है कि मीडिया वाले समझते हैं कि हमारी भी निजी जिंदगी होती है कई बार हम अपनी निजी समस्याओं की वजह से परेशान रहते हैं और सेट पर कई बार चिड़चिड़ा भी जाते हैं या मान लीजिए किसी वजह से स्पॉट बॉय या यूनिट के किसी सदस्य को दिया तो लोग तिल का ताड़ बना लेते हैं कहने लगते हैं कि बड़े गुस्से वाला कलाकार है मूडी है।
उनके भी बर्ताव को लोगों ने गलत तरीके से लिया उन्हें भी मुड़ी करार दिया जबकि वह बिल्कुल ऐसे नहीं थे काका बहुत भले इंसान थे और बहुत जल्दी चले गए इतना कहते कहते वहीदा इस इंटरव्यू में भावुक हो जाती हैं