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क्या राजेश खन्ना और विनोद खन्ना सच में रिश्तेदार थे? इत्तेफाक था या कोई गहरा राज?

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क्या सचमुच राजेश खन्ना और विनोद खन्ना रिश्तेदार थे? सच जो कोई नहीं जानताफिल्म इंडस्ट्री के सुनहरे दौर की बात जब भी होती है, तो जुबान पर कुछ चुनिंदा नाम अपने आप आ जाते हैं। इनमें ‘पहला सुपरस्टार’ कहे जाने वाले राजेश खन्ना और अपने दौर के सबसे हैंडसम और डैशिंग विलेन से हीरो बने विनोद खन्ना का नाम सबसे ऊपर आता है। दोनों ही अभिनेताओं के नाम के आगे ‘खन्ना’ उपनाम लगा हुआ है, और यहीं से शुरू होता है दशकों पुराना वह भ्रम, जो आज भी कई लोगों के मन में घर किए हुए है।अक्सर आम दर्शकों के मन में यह सवाल उठता है

कि क्या ये दोनों दिग्गज आपस में भाई, चचेरे भाई या किसी दूर के रिश्तेदार थे? आइए आज इस पर्दा उठाते हैं और जानते हैं उस सच्चाई को, जिसे लेकर लोग अक्सर गफलत में रहते हैं।सिर्फ ‘नाम’ का इत्तेफाकसच यह है कि राजेश खन्ना और विनोद खन्ना के बीच दूर-दूर तक कोई खून का या पारिवारिक रिश्ता नहीं था। उनके बीच की एकमात्र समानता उनका सरनेम ‘खन्ना’ था, जो कि एक पंजाबी खत्री उपनाम है।

बॉलीवुड में यह आम बात है कि एक ही जाति या उपनाम के लोग इंडस्ट्री में आते हैं, और दर्शक बिना किसी तथ्यात्मक जानकारी के उन्हें आपस में रिश्तेदार मान लेते हैं।राजेश खन्ना और विनोद खन्ना के मामले में भी यही हुआ। दोनों की शक्ल-صورت में भी कोई पारिवारिक समानता नहीं थी, और न ही उनके परिवार कभी एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।दोनों की पृष्ठभूमि बिल्कुल अलग थीअगर इनके पारिवारिक इतिहास को खंगाला जाए, तो दोनों की जड़ें बिल्कुल अलग जगहों और परिवेश से जुड़ी थीं: * राजेश खन्ना: इनका जन्म 4 दिसंबर 1942 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था।

उनका असली नाम जतिन खन्ना था। बाद में उनके adoptive parents (पालक माता-पिता) ने उनका नाम राजेश रखा। उनके परिवार का झुकाव व्यवसाय और राजनीति की तरफ अधिक था। * विनोद खन्ना: इनका जन्म 6 अक्टूबर 1946 को पेशावर (जो अब पाकिस्तान में है) के एक संपन्न पंजाबी परिवार में हुआ था। देश के विभाजन के बाद उनका परिवार मुंबई आ गया था। उनके पिता एक जाने-माने व्यवसायी थे।इंडस्ट्री में अलग-अलग रास्ते और मुकामइन दोनों दिग्गजों ने अपने दम पर फिल्म जगत में अपनी जगह बनाई। राजेश खन्ना ने 1960 के दशक के आखिरी सालों में रोमांस के बादशाह के रूप में जो इतिहास रचा, वैसा क्रेज हिंदी सिनेमा में शायद ही कभी किसी और को मिला हो।

लगातार 15 सोलो सुपरहिट फिल्में देने का रिकॉर्ड आज भी उनके नाम दर्ज है।दूसरी ओर, विनोद खन्ना ने पहले एक खलनायक के रूप में अपनी शुरुआत की और फिर मुख्य नायक के रूप में इंडस्ट्री पर राज किया। उनका एक्शन और स्टाइल दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ, और अपने चरम पर वे ओशो (रजनीश) की शरण में संन्यास लेने चले गए थे, जो उनके करियर का एक ऐसा फैसला था जिसने सबको चौंका दिया था।जनता का भ्रम और इंडस्ट्री की सच्चाईसिनेमा प्रेमियों के बीच यह एक स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है कि वे एक ही उपनाम वाले कलाकारों को परिवार का हिस्सा मान लेते हैं, जैसे कपूर परिवार या देओल परिवार के मामले में सच है। लेकिन राजेश खन्ना और विनोद खन्ना इस नियम के अपवाद हैं। वे सिर्फ दो ऐसे महान कलाकार थे जो इत्तेफाक से एक ही दौर में सक्रिय रहे और दोनों ने अपने उपनाम और अभिनय से भारतीय सिनेमा के इतिहास को हमेशा के लिए समृद्ध कर दिया।अतः अगली बार जब कोई आपसे यह कहे कि ‘काका’ (राजेश खन्ना) और विनोद खन्ना रिश्तेदार थे, तो आप उन्हें पूरे भरोसे के साथ बता सकते हैं कि उनके बीच सिर्फ एक ही रिश्ता था—और वह था सिनेमा के प्रति उनका समर्पण और हिंदी बेल्ट के दर्शकों का अटूट प्यार।

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