चीन के शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। दिल्ली में उनका जोरदार स्वागत हुआ और अब पूरी दुनिया की नजरें ब्रिक्स समिट और शी जिनपिंग मुलाकात पर है। लेकिन शी जिनपिंग के भारत पहुंचने से पहले ही उनकी एक खास कार ने सबसे ज्यादा क्यूरियोसिटी पैदा कर दी है।
काले कवर में ढकी यह कार जब दिल्ली की सड़कों पर पहुंची, तो तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। और हर कोई जानना चाहता था कि आखिर इसके अंदर ऐसा क्या है जिसे चीन इतना छिपा कर भारत लाया है? यह शी जिनपिंग की खास कार है। कोई आम लग्जरी कार नहीं है।
लेकिन ये कार इतनी खास क्यों है? इसे काले कवर में क्यों ढगा गया है? इसकी सुरक्षा कितनी जबरदस्त है? और चीन के राष्ट्रपति अपनी कार को भारत तक क्यों लेकर आए?
सबसे पहले बात करते हैं उस काले कवर की जिसने इस कार को लेकर सबसे ज्यादा क्यूरोसिटी पैदा की है। शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने से पहले उनके काफिले की कई गाड़ियों को भारी काले कवर से ढककर ले जाते हुए देखा गया। दरअसल राष्ट्रपति स्तर की सुरक्षा में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों को विदेश यात्रा के दौरान अलग से ले जाना नॉर्मल है। ऐसी गाड़ियों को नेता के पहुंचने से पहले होस्ट कंट्री में पहुंचाया जाता है। कवर लगाने की एक वजह गाड़ियों को धूल, बारिश और दूसरी चीजों से बचाना भी होता है।
साथ ही इन बेहद संवेदनशील स्टेट व्हीकल्स को अननेसेसरी तस्वीरों और से दूर रखना भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है। और जिस कार को इन कवर के नीचे रखा गया था वो है हंगची चीन की सरकारी और लग्जरी कार प्रोड्यूसिंग कंपनी है। चीनी भाषा में हंगची का मतलब होता है रेड । कोई ऐसी कार नहीं है जिसे आप शोरूम जाकर खरीद सकते हैं। इसे चीन के टॉप लीडरशिप के लिए खासतौर पर तैयार किया गया है और इसके ज्यादातर तकनीकी और सिक्योरिटी डिटेल्स पब्लिक नहीं किए गए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक को हंगची की L5 लिमोज़न से जोड़ा जाता है। इसकी लंबाई करीब 5.5 मीटर यानी लगभग 18 फीट बताई जाती है। अब आते हैं इस कार की सबसे खास चीज पर। इसकी सुरक्षा। के बारे में। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इसमें है, मजबूत जैसे सुरक्षा फीचर्स हैं।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि कार को छोटे के असर को झेलने के लिए तैयार किया गया है। इसके अलावा की स्थिति में पैसेंजर को सेफ रखने के लिए एक खास एयर सिस्टम होने के भी दावे हैं। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। हंगची ने खुद इन सभी तकनीकी और सुरक्षा दावों की पूरी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए को लेकर इंटरनेट पर चल रहे हर दावे को इसकी । इंजन को लेकर भी यही मिस्ट्री है। कई रिपोर्ट्स में करीब 6 लीटर V12 है। लेकिन कार के परफॉर्मेंस को लेकर चीन की तरफ से आधिकारिक जानकारी अवेलेबल नहीं है।
यानी की असली ताकत उसका तेज इंजन नहीं है बल्कि उसकी सिक्योरिटी और सीक्रेसी है। बताया जाता है कि आने वाले सालों में इस मॉडल की बहुत सीमित संख्या में गाड़ियां तैयार की जानी है और इन्हें आम लोगों के लिए नहीं बल्कि सरकारी कामों के लिए इस्तेमाल किया जाना है। और एक बात किसी भी देश के राष्ट्रपति की सुरक्षा में इस्तेमाल होने वाली कार सिर्फ एक नहीं होती है। उसमें राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए जरूरी कम्युनिकेशन और प्रोटेक्शन सिस्टम्स जुड़े होते हैं।
ऐसे में चीन अपने को किसी दूसरे देश की सामान्य वीआईपी कार में बैठाने के बजाय अपनी स्पेशली प्रोटेक्टेड स्टेट लिमोजीन इस्तेमाल करना पसंद करता है। शी जिनपिंग पहले भी अपनी इसी तरह की खास हांगशी लिमोजीन के साथ विदेश यात्राएं कर चुके हैं। को अमेरिका, रूस, इजिप्ट और हांगकांग जैसी यात्राओं के दौरान भी देखा गया है और इस कार का भारत से एक दिलचस्प कनेक्शन भी है। 2025 में चीन गए थे और उस दौरान भी हंगची की खास लिमोजीन का इस्तेमाल किया गया था।
यानी चीन के शीर्ष नेतृत्व की इस खास कार का इस्तेमाल के चीन दौरे में भी हुआ है। बात करें शी जिनपिंग के इस भारत यात्रा की तो वो करीब 7 साल बाद भारत आए हैं और 12 13 सितंबर को दिल्ली में हो रहे 18वें ब्रिक्स समिट में हिस्सा ले रहे हैं। भारत और चीन के रिश्ते में कुछ समय से भारी उतार-चढ़ाव रहा है।
अब दोनों देश धीरे-धीरे रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। और इसी बीच मोदी और इस जिंगपिंग की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर है। अब इस रहस्यमई कार से भी ज्यादा दिलचस्प होगी वह बातचीत जो इसी कार में सवार होकर आए शी जिंगपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच दिल्ली में होने वाली है।