राजस्थान की मिट्टी जहां इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं बल्कि हर किले, हर दीवार और हर कहानी में सांस लेता है। और जब इसी इतिहास को लेकर बॉलीवुड से कोई बयान आता है तो माहौल का गर्म होना तय है।
दरअसल संजय लीला भंसाली की फिल्म अब पद्मावत से जुड़े सीन को लेकर स्वरा भास्कर की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही। इस बयान को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है और अब कवि कुमार विश्वास ने बिना नाम लिए स्वरा भास्कर पर है। उन्होंने अपने बयान में ऐसे लोगों को जाहिल और जमूरे तक कह दिया है। जिन्होंने इतिहास और संस्कृति को ठीक से नहीं समझा।
कुमार विश्वास का पूरा फोकस सिर्फ किसी एक व्यक्ति पर नहीं बल्कि उनका कहना है कि राजस्थान का इतिहास इतना बड़ा है और गहरा है कि किसी फिल्म कहानी या कुछ घंटों के कंटेंट में उनकी और जो गौरव है उसको नहीं जा सकता। यानी कि उनका मैसेज काफी ज्यादा क्लियर है कि सोशल मीडिया पर बहस करने से ज्यादा जरूरी है कि आने वाली जनरेशन सही इतिहास पढ़ें।
उन्होंने राजस्थान की वीरता और का जिक्र करते हुए कहा कि इस धरती का इतिहास से लिखा गया है। उनके मुताबिक अगर लोग अपनी अगली पीढ़ी को यह कहानियां और ऐतिहासिक घटना खुद नहीं बताएंगे तो बाद में कोई भी फायदा नहीं होगा। यहीं कुमार विश्वास ने एक और इंटरेस्टिंग बात कही।
उन्होंने लोगों से अपील की कि सिर्फ कि बड़े टूरिस्ट प्लेस के पीछे भागने की बजाय राजस्थान के हिस्टोरिकल प्लेस को भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने का जिक्र किया और बताया कि वह खुद अपने परिवार को ऐसी ऐतिहासिक जगहों पर लेकर जाते हैं ताकि बच्चों को हिस्ट्री की किताबें सिर्फ किताबों में ना मिले बल्कि उस जगह को देखकर उन्हें इतिहास पता भी चले।
उन्होंने महाराणा प्रताप और का इतिहास का उदाहरण देते हुए बताया कि उस दौर की सिर्फ एक राजा की आजादी की लड़ाई नहीं होती थी बल्कि स्वाभिमान से जुड़ी होती थी। अब इस पूरे विवाद को लेकर एक बार फिर से बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या सब्जेक्ट पर फिल्मी और पब्लिक स्टेटमेंट लोगों की सोच को प्रभावित करते हैं और अगर करते हैं तो हिस्ट्री को स्क्रीन पर दिखाते वक्त कितनी ज्यादा रिस्पांसिबिलिटी बढ़ जाती है। एक तरफ सुरा भास्कर का पुराना बयान हाईलाइट में है तो दूसरी तरफ कुमार विश्वास का रिस्पांस सोशल मीडिया पर और ज्यादा इस बयान को हवा दे रहा है।
लेकिन कुमार विश्वास की बात का सबसे बड़ा एंगल यही है कि सिर्फ नाराज होने की बजाय अपनी आने वाली जनरेशन को इतिहास समझाया जाए क्योंकि इतिहास सिर्फ विवाद का टॉपिक नहीं वो हमारी पहचान, हमारी विरासत और हमारी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचने वाली कहानी भी है। और शायद यही वजह है कि