सब दुकान घर सर सब गया। अब कुछ भी नहीं है। सिर्फ ये पहना हुआ यह है। उसके बाद यह है। खाने के लिए कुछ भी नहीं है। मुश्किल है। इस वक्त नोआकोट जिले के त्रिसूरी बाजार में बस तबाही की निशानी है। सैलाब यहां पर सब कुछ बहाकर लेकर चला गया। जो बचा है तो अब दुख और आगे भविष्य कैसे चलेगा यह इस वक्त यहां के स्थानीय लोगों की बड़ी चिंता है। कुछ लोग इस वक्त मेरे साथ मौजूद हैं। हां बता रहे थे आपका यहां पे पांच घर था।
किराए पे लगाते थे। क्या हुआ? पांच घर था मेरा। एक घर यही था और चार घर ये भी मेरा है और चार उधर था। उधर भी सब मंगा के लेके गया। अब दुकान 200 था। वो भी चला गया। माल बहुत था। गैस सिलेंडर था। 1000 गैस सिलेंडर भी था सब दुकान घर सर सब गया कुछ भी नहीं है ये पहना हुआ ये है उसके बाद ये है खाने के लिए कुछ भी नहीं है तो मुश्किल है आप कहां थी जब कल सैलाब आया कल हम तो ऊपर था ऊपर ऊपर था नीचे से वो लोग बुलाया जल्दी आओ जल्दी आओ बोल के फिर हम कूद के आया तो ऐसा देखा तो पानी आ चुका था।
फिर वो सीढ़ी में चढ़ गए तो पानी आ गया था। कुछ भी समेटने का कुछ भी देखने का मौका कुछ नहीं। हम कपड़ा लेने गया था। दो चार कपड़ा लेके आएगा। चल के गया था तो वो लोग चिल्ला के बुलाया था तब वही छोड़ के भागा। आप भी फंसे मलबे में गाद में वो फंसे। हम नहीं फंसता। वो लोग फंस चुका था। तब हाथ में हाथ पकड़ के मैंने ताना इन लोग को उसको भी ताना मेरा भाई का एक वो भी है उसको भी तान के गली में घुसा लिया उसके बाद हम लोग बरसा नहीं तो हम लोग ये रास्ता रास्ता आया था यहीं से भगाते था और अब जो आप कह रहे हैं कि पांच मकान थे आप किराए पे देते थे दुकानों को अब जो बचा है बस यही है और बाकी जो बचे हैं वो सब बह गए गए वो सब बह गया चार ठोक और बह गया अब एक बाकी है इसमें भी कुछ काम नहीं है इसका भी अब सब लोग को किराए में रखता अब हम भी किराने में बैठने वाला हो गया। सर में लाया हम लोग को सब सब रोड में आ चुका हम लोग। कुछ चीज नहीं है। क्रूस नहीं है। नहीं है। क्या करें? सुसाइड करना पड़ेगा। मेरे कुछ भी नहीं है।
आप हौसला रखें। ऐसे आप बात करेंगे। आप लोगों के हौसले से ही तो जिंदगी आगे चलेगी। इस तरह से हौसला खोने से तो कुछ नहीं होगा। हम लोग सुसाइड करने से अच्छा होता है। राहत और बचाव के लिए लगातार सरकार काम कर रही है। कल रात से अभी तक वक्त कैसे गुजरा है? सरकार कुछ अभी तक कुछ भी अभिलेख नहीं आया है। सरकार कुछ नहीं सुन रहा है। क्या हुआ? धक्के से कोई भी आदमी नहीं आ रहा है यहां कोई सरकार का कोई रिलीफ टीम कुछ नहीं आई कोई रेस्क्यू टीम हम लोग य फसे हुए हैं हम वही देखने के लिए आया है क्या हो गया वहां बड़ा से
आया हम लोग ये समझने के लिए अगर कुछ जा पाए और कुछ देख पाए सरकार क्या करेगा हम लोग को भी पता नहीं इतना पांच मकान है कम से कम एक मकान बनाने के लिए सरकार पैसा देगा अभी तो हम लोग खुश होता नहीं तो हम लोग कहां जानेगा हम तो कुछ नहीं बता जाएगा दुकान भी सब लेके गया उतना दुकान था बड़ा दुकान भी सब लेके गया घर भी लेके गया सब लेके गया अब क्या करके खाएगा छोटा बच्चा है एक लड़की है देख सकते हैं जो स्थानीय हैं जो इस वक्त इस बड़ी आपदा का शिकार बने हैं जिनका सब कुछ बह चुका है। इंतजार है किसी तरह की मदद की ताकि वह आगे की जिंदगी के बारे में अपने फैसले ले सके। नोआकोट जिले के त्रिसूरी बाजार से कैमरा पर्सन पुजारिया के साथ सिकता देव एनडीt इंडिया के