नमस्कार आप सुन रहे हैं द बॉलीवुड रेडियो और मैं हूं आपके साथ आकाश। दोस्तों आज के इस पॉडकास्ट में किस्सा सुनील दत्त और राजकुमार का है। अब हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में आपने अक्सर सुना होगा ढेरों किस्से तो हमने ही सुनाए हैं। राजकुमार अपने एक अलग अंदाज के लिए जाने गए और बड़े बेबाक थे। जो उन्हें कहना है वह आपके मुंह पर कह देंगे और इस बात की परवाह किए बिना कि आपको यह बात बुरी भी लग सकती है। और कई ऐसे मौके आए जब राजकुमार अपने जूनियर कलाकारों का जूनियर कलाकार से यहां मतलब पीछे नाचने वाले कलाकार नहीं है। जूनियर कलाकार से मतलब जो उनके बाद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में आए। उन्हें भी वो जूनियर आर्टिस्ट ही कहा करते थे और उनका जमकर माहौल उड़ाते। किसी को भी कुछ भी कह देने के लिए राजकुमार मशहूर थे। लेकिन एक रोज राजकुमार का वास्ता सुनील दत्त से पड़ा।
तब सुनील दत्त का करियर भी अपने उरूज पर था और राजकुमार भी छाए हुए थे। बॉलीवुड एक्टर राजकुमार अपने अलग अंदाज के लिए तो मशहूर थे ही। एक्टर अपने आगे दूसरे एक्टर को कमतर समझते हुए अक्सर उनकी बेइज्जती किया करते थे। ऐसे कई मौके आते थे जब वह खुद को सुपीरियर समझते थे और बाकी सबको कीड़े-मकोड़े से ज्यादा वह कुछ नहीं समझते थे। लेकिन जब उनका सामना सुनील दत्त से हुआ तो यूं लगा कि जैसे उनका घमंड चूरचूर हो गया है। राजकुमार और सुनील दत्त ने अपने करियर में साथ में भी काम किया। एक फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों में जुबानी टक्कर मिलने की खबर उस दौर में तमाम पत्र पत्रिकाओं में बड़े चटकारे लेकर छापी गई।
सुनील दत्त से मिले जवाब के बाद राजकुमार का घमंड चूरचूर हो गया। दरअसल हुआ यह कि दोनों एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे और इसी दौरान राजकुमार ने अपने को एक्टर सुनील दत्त से मजाक में पूछा। दत्त साहब आप फिल्मों में आने से पहले क्या करते थे? सुनील दत्त ने बड़ी ही शालिंदा के साथ जवाब दिया। मैं रेडियो में अनाउंसर था राज साहब। और इस पर इस जवाब पर राजकुमार बोले अच्छा। तो आप अनाउंसर से हीरो बन गए। कमाल है। अब यह जो बात उन्होंने कही बड़े ही तंज भरे लहजे में कही और एक ऐसा लहजा जिसमें लोगों को किसी को भी सुनकर बुरा लगेगा। सो इसी अंदाज में उन्होंने यह बात कही थी कि मतलब रेडियो अनाउंसर भी हीरो बन जाते हैं। रेडियो अनाउंसर उनकी नजर में राजकुमार की नजर में एक कम ओहदे वाला एक सामान्य सा इंसान हीरो बड़ा आदमी होता है। और जाहिर सी बात है भी यह बात सही। तो इस तंज भरे लहजे में उन्होंने यह बात कही कि अच्छा तो आप अनाउंसर से हीरो बन गए। कमाल है। सुनील दत्त ने मुस्कुराते हुए इस पर पलटवार किया। हां। और आप फिल्मों में आने से पहले क्या करते थे? अब बारी राजकुमार की थी।
राजकुमार ने गर्व से कहा, “मैं पुलिस में सब इंस्पेक्टर था।” दरअसल, हिंदी फिल्मों में आने से पहले मुंबई के एक थाने में राजकुमार पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर हुआ करते थे। लोगों की एक्टिंग करना और एक अंदाज तो उनका था ही और उनकी ड्यूटी ऐसे थाने में थी जिस जो फिल्म सिटी के पास में था और अक्सर हीरो हीरोइन वहां पर आते रहते थे अपनी शिकायतों को दर्ज करवाने के लिए और ऐसी ही शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी मामले में एक डायरेक्टर उनके पास आए और उन्होंने कहा कि आप फिल्मों में ट्राई क्यों नहीं करते? राजकुमार को एक्टिंग का शौक था और उन्होंने नौकरी छोड़ दी और फिर वह फिल्मों में आ गए। तो गर्व से उन्होंने कहा कि मैं पुलिस में सब इंस्पेक्टर था। अब बारी सुनील दत्त की आई। सुनील दत्त ने उसी अंदाज में जवाब दिया, वाह, अब एक पुलिस वाला भी एक्टिंग कर रहा है। यह भी कमाल है। सुनील दत्त की इस तीखी प्रतिक्रिया ने राजकुमार की घमंडी से भरे रवय को तगड़ा जवाब दिया था। इसके अलावा फिल्म की शूटिंग के दौरान राजकुमार किसी दूसरी दिशा में देखकर डायलॉग बोल रहे थे। यानी कि वह खफा हो गए और फिर डायलॉग भी मुंह फेरफेर कर बोल रहे थे और दोनों का साथ में सीन था। सुनील दत्त को राजकुमार का यह रवैया पसंद नहीं आया। और कहते हैं
कि उन्होंने राजकुमार का कॉलर पकड़ कर कहा मेरी तरफ मुंह करके बात करो। किसी को उम्मीद नहीं थी कि सुनील दत्त ऐसा बर्ताव भी कर सकते हैं। इसके अलावा एक्टर अमजद खान ने भी एक बार राजकुमार के घमंडी रवैया पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वह चाहे तो मुझसे पंजा लड़ा सकते हैं अगर उनमें हिम्मत है। लेकिन जो भी हो वो कहना चाहते हैं वो मेरे मुंह पर कहें। मेरे पीठ पीछे ना कहा करें। एक बार मुकेश खन्ना ने सालों बाद एक इंटरव्यू में कहा था कि राजकुमार कमाल के एक्टर थे। लेकिन वह बहुत जल्दी डर भी जाते थे। एक बार उन्होंने राजकुमार साहब ने राजेश खन्ना, जितेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती इन कलाकारों को सेट पर ही जूनियर आर्टिस्ट कह दिया था। दरअसल एक फिल्म की शूटिंग हो रही थी जिसमें जितेंद्र राजेश खन्ना यह लोग भी थे और डायरेक्टर से राजकुमार ने कहा इन सभी लोगों की तरफ इशारा करते हुए कि जनाब बहुत सारे जूनियर आर्टिस्ट आपने जमा कर रखे हैं। अब बाद में जब वाद-विवाद बढ़ा, बात बिगड़ी, लोगों की नाराजगी सामने आई तो उन्होंने कहा भाई आप मुझसे जूनियर हैं और आर्टिस्ट आप हैं ही तो जूनियर आर्टिस्ट ही हुए। लेकिन हम सभी जानते हैं कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में जूनियर आर्टिस्ट का मतलब होता है जो लीड रोल से अलग जो आर्टिस्ट होते हैं कैरेक्टर आर्टिस्ट या और तमाम कैरेक्टर आर्टिस्ट भी नहीं बल्कि जो खासकर अगर डांस जो कोरस में डांस होता है तो उसमें जो लोग डांस करते हैं
वो एक तरीके से जूनियर आर्टिस्ट कहे जाते हैं और इस बात से वह सब खफा हुए नाराज हुए लेकिन राजकुमार को इन बातों से कभी कोई फर्क नहीं पड़ा। राजकुमार अपनी उसी ठसक के साथ, अपनी उसी जिंदादिली के साथ लगातार अभिनय भी करते रहे और कमाल की बात यह है कि अपनी हर फिल्म के बाद वो अपनी फीस बढ़ा देते थे। फिल्म चले ना चले इससे उनका कोई लेना देना नहीं। और उनके जो सेक्रेटरी थे, उन्होंने एक बार पूछा भी कि सर आप अपनी हर फिल्म के बाद फीस बढ़ा रहे हैं। जबकि यह फिल्म तो फ्लॉप भी हो गई। तो फ्लॉप फिल्म के बाद आपको बढ़े हुए पैसे भला कौन देगा? तो इस पर राजकुमार कहते हैं कि भाई जानी फिल्म फ्लॉप हुई है। हम फ्लॉप नहीं हुए। फिल्म फ्लॉप हुई है तो यह डायरेक्टर जाने। यह डायरेक्टर की नाकामी है। हमने अपनी एक्टिंग पूरी शिद्दत से की। पूरे जान डाला हमने अपने किरदार में। इसलिए राजकुमार फ्लॉप नहीं हुआ है। फिल्म फ्लॉप हुई है। और अपनी हर फिल्म के बाद कहते हैं कि वह ₹1 लाख अपनी फीस बढ़ा दिया करते थे जो उस दौर में बहुत बड़ी रकम थी। लेकिन जिन्हें राजकुमार की दमदार आवाज चाहिए, वह राजकुमार को साइन करते थे और यह उनकी खासियत थी। सुनते रहिए द बॉलीवुड फ्रीड्यू। सुनता है सारा इंडिया।