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अगर BJP को… अभिजीत दीपके को मिली खौफ!नाक धम!की! मचा हड़कंप!

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बीजेपी में शामिल हो या अंजाम भुगतो। दावा है कि यह धमकी कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके को मिली है। 29 जुलाई को एक मराठी न्यूज़ चैनल से बातचीत में अभिजीत दीपके की मां अनीता दीपके ने बताया कि जब उनके बेटे यानी अभिजीत दीपके ने सीजेपी शुरू की थी और सरकार के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की थी।

तब अभिजीत को मिलने लगी थी। में कथित तौर पर यहां तक कहा गया कि अगर वह बीजेपी में शामिल नहीं हुए तो उनके माता-पिता को इसका नतीजा भुगतना पड़ सकता है।

इसके चलते अभिजीत दीपके के पेरेंट्स जो महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर में रहते हैं उनको अपना घर छोड़कर 16 दिनों तक छुपना पड़ गया। कुंकण इलाके में एक रिश्तेदार के घर। अभिजीत की मां के मुताबिक उस समय अभिजीत अमेरिका के बॉस्टन में थे। लेकिन उनका दावा है कि सिर्फ उन्हें लेकर नहीं थी। परिवार को भी निशाना बनाने की बात कही जा रही थी। अनीता दीपके ने दावा किया कि अभिजीत को यह धमकी एक वीडियो के जरिए दी गई थी।

अभिजीत की मां ने बताया कि उस दौरान उनके बेटे का फोन भी आया था जो खुद भी पेरेंट्स की सेफ्टी को लेकर परेशान थे। अनीता दीपके ने बताया उसने हमसे कहा था कि उसे ऐसी धमकियों से डर नहीं लगता लेकिन वह हमारी सेफ्टी को लेकर परेशान था क्योंकि हमें ऐसी हालातों का सामना करने की आदत नहीं थी। उसने हमें कुछ दिनों के लिए घर से दूर रहने को कहा। आपको पता ही है अभिजीत ने कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी की शुरुआत की थी। शुरुआत में उन्हें मेनली एक ऑनलाइन एक्टिविस्ट के तौर पर जाना गया।

लेकिन बाद में नीट, यूजी और बाकी एग्जाम्स में गड़बड़ियों और पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट में वे एक बड़ा चेहरा बन गए। अभिजीत 6 जून 2026 को अमेरिका के बॉस्टन से भारत आए थे। इसके बाद दिल्ली में छात्रों का आंदोलन तेज हुआ। जंतरमंतर पर लंबे समय तक प्रोटेस्ट चला और अभिजीत इसके लीडरों में से एक थे। धीरे-धीरे इस प्रोटेस्ट में सोनम वांगचुक, प्रकाश राज जैसे नाम भी शामिल हुए। कई दूसरे सेलिब्रिटीज से उन्हें सपोर्ट भी मिला। सोनम वांगचुक कुल 26 दिनों तक अनशन पर थे। यह प्रोटेस्ट 36 दिनों तक चला। आंदोलन के दौरान अभिजीत और सीजेपी लगातार सरकार से परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग करते रहे और पेपर लीक के मामलों में कारवाई की मांग भी करते रहे।

लेकिन सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आता। आंदोलन 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद खत्म हुआ। लेकिन इसके बाद भी अभिजीत लगातार चर्चे में बने हुए हैं। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शीरसाट ने भी अभिजीत की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि अभिजीत के महाराष्ट्र लौटने पर उन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए और वो इस बारे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस से बात भी करेंगे। इसी बीच अभिजीत की तबीयत भी खराब हुई थी। उन्हें टाइफाइड होने की खबर सामने आई थी। जिसकी वजह से आंदोलन खत्म होने के तुरंत बाद वह घर नहीं लौट पाए थे। बाद में वह छत्रपति संभाजी नगर अपने घर पहुंचे।

लेकिन अब उनके घर लौटते ही माता-पिता के यह पुराने दावे फिर चर्चा में आ गए हैं। अब इन आरोपों के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कथित धमकियां देने वाले लोग कौन थे? क्या सच में अभिजीत पर किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने का दबाव बनाया गया था? इस दावे पर बीजेपी या किसी और पॉलिटिकल पार्टी से कोई सफाई नहीं आई है अभी तक यह सिर्फ अभिजीत दीपके की मां के दावे हैं।

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