सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं और शास्त्रों के नियमों को लेकर एक बहुत बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। महाप्रभु भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा की तारीखों को लेकर पूरी के गजपति महाराज, दिव्य सिंह देव और इस आमने-सामने आ गए हैं। विवाद इस कदर बढ़ चुका है कि गजपति महाराज ने सीधे देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। गजपति महाराज का आरोप है कि इस अपनी मनमर्जी की
तारीखों पर रथ यात्रा निकालकर सदियों पुरानी सनातन परंपरा और शास्त्रों का अपमान कर रहा है। दरअसल इस साल विवाद ने तब तूल पकड़ लिया जब इस ने पूरी के धार्मिक पंचान को दरकिनार करते हुए कई देशों में हफ्तों पहले ही रथ यात्रा निकाल दी। इस ने 14 जून को न्यूयॉर्क, 21 जून को लंदन, 5 जुलाई को सिडनी में रथ यात्रा का भव्य आयोजन किया। जबकि शास्त्रों के मुताबिक इस साल स्नान पूर्णिमा 29 जून को थी और महाप्रभु की मुख्य रथ यात्रा पूरी में 16 जुलाई को होनी तय है। पूरी मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और गजपति महाराज दिव्य सिंह देव का कहना है
कि शास्त्रों और पंचांग से अलग जाकर मनमानी तारीखों पर उत्सव मनाना करोड़ों जगन्नाथ भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ है। जिससे प्राचीन परंपराएं खत्म हो जाएंगी। टेंपल एडमिनिस्ट्रेशन हैड ब्रॉट ऑल फैक्ट्स, फिगर्स, द स्टेटमेंट ऑफ द स्क्रिप्चर्स एंड ट्रेडिशन बिफोर इस्कॉन। एंड सो वी आर वेरी डिसपॉइंटेड बिकॉज़ यू सी इन नॉट ओनली सनातन वैदिक धर्म इन ऑल रिलीजंस ऑफ़ द वर्ल्ड वेदर इट इज़ क्रिश्चियनिटी और इस्लाम और बुद्धिस्ट और जैन ऑल सेलिबेशंस और ऑल मेजर सेलिबेशंस आर हेल्ड अकॉर्डिंग टू स्क्रिप्चर्स और ट्रेडिशन। यू डू नॉट सेलिब्रेट ऑल दिस क्रिसमस और ईद अराउंड द ईयर और यू डोंट सेलिब्रेट श्री कृष्ण जन्माष्टमी रामनवमी
चतुर गणेश चतुर्दशी और महाशिवरात्रि अराउंड द ईयर देयर आर स्पेसिफिक तिथिज़ व्हिच आर प्रोक्लेम्ड इन द स्क्रिप्चर्स एंड दैट इज़ स्ट्रिक्टली फॉललोड देन व्हाई आर यू मेकिंग डिपार्चर फॉर लॉर्ड जगन्नाथ। हालांकि इस पूरे विवाद पर इस का अपना एक अलग तर्क है। इस का कहना है कि भगवान जगन्नाथ पूरी दुनिया के श्रद्धालुओं के हैं। विदेशों में मौसम की मार, स्थानीय परिस्थितियों और आम भक्तों की सुविधा को देखते हुए तारीखें बदली जाती हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस वैश्विक उत्सव का हिस्सा बन सकें। लेकिन विवाद सिर्फ विदेशों तक सीमित नहीं है।
गजपति महाराज ने उज्जैन इसन की ओर से मध्य प्रदेश के 66 स्थानों पर 16 से 25 जुलाई के बीच रथ यात्रा निकालने पर भी सख्त आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि स्कंद पुराण में भगवान जगन्नाथ ने इन तिथियों को निर्धारित किया है। रथ यात्रा केवल आषाढ़ शुक्ल द्वितीय से शुरू होने वाला नौ दिवसीय उत्सव है। ऐसे में मनमानी तिथियों पर आयोजित करना प्राचीन परंपराओं और शास्त्रों के विपरीत है। हालांकि साल 2024 और 25 में भी गजपति महाराज ने इस से अनुरोध किया था। लेकिन जब बात नहीं बनी तो साल 2026 में यह विवाद देश के सर्वोच्च सदन यानी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के दरवाजे तक पहुंच गया है। अब देखना यह होगा कि सनातन धर्म की इस सर्वोच्च परंपरा और इस के वैश्विक प्रसार के बीच का यह विवाद क्या मोड़ लेता है। एबीपी गंगा खबर आपकी जुबां आपकी।