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समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन, लगा 10 लाख का जुर्माना, वजह जानकर चौंक जाएंगे

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कोई यूथ आइकॉन देश की सबसे बड़ी अदालत को भी गुमराह कर सकता है? आखिर ऐसा क्या हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट को देश के एक मशहूर कॉमेडियन को जमकर फटकार लगानी पड़ी और लाखों रुपए का भारी भरकम जुर्माना ठोकना पड़ा। जरा सोचिए कि जिस शख्स को आज की युवा पीढ़ी अपना आइकॉन मानती है। जिसके वीडियो पर लाखों व्यूज आते हैं।

अगर उसी शख्स के आचरण पर देश की सबसे बड़ी अदालत गंभीर सवाल खड़े कर दे तो आप क्या सोचेंगे? हम बात कर रहे हैं मशहूर कॉमेडियन समीर रैना की जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से एक बहुत बड़ा झटका लगा है। इंडिया गॉट लेटेंट शो की वजह से विवादों में घिरे समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए भारीभरकम जुर्माना लगाया है। अदालत ने जो टिप्पणियां की हैं, वह हर उस सोशल मीडिया क्रिएटर के लिए एक बहुत बड़ा सबक है जो सोचते हैं कि कैमरे के सामने कुछ भी बोलकर बचा जा सकता है।

अब आपको पूरा मामला विस्तार से समझाते हैं कि आखिर सुप्रीम कोर्ट के अंदर क्या-क्या हुआ। दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के बाहर आज सुबह से ही हलचल तेज थी। जब खबर आई कि समय रैना को अदालत में पेश होना है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जयमालिया, बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन जजों की स्पेशल बेंच इस पूरे मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई की शुरुआत होते ही कोर्ट का रुख बेहद सख्त नजर आया।

अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि कॉमेडियन ने अदालत के निर्देशों का सीधा उल्लंघन किया है और न्याय व्यवस्था को एक तरह से घुमा कर रख दिया है। पीठ ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें तो यह सोचकर भी चिंता होती है कि वो किसी तरह के यूथ आइकॉन है और युवाओं को उनसे क्या संदेश मिल रहा है। इस पूरे मामले की जड़ में इंडिया गॉट लेटेंट शो से जुड़ा विवाद है। जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। कोर्ट ने इससे पहले की सुनवाई में समय रैना को क्यू एसएमए फाउंडेशन या इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे पीड़ित लोगों से संपर्क करने और उनके लिए कुछ सकारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

लेकिन आज की सुनवाई में एसएमए फाउंडेशन की तरफ से पेश हुई वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद समय रैना ने इस संस्था से कोई संपर्क नहीं किया। वकील ने दलील दी कि समय रैना लगातार अपने कमर्शियल शो कर रहे हैं। मुनाफा कमा रहे हैं। लेकिन जब अदालत के आदेश का पालन करने और पीड़ितों की मदद करने की बात आई तो उन्होंने इसे पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।

संस्था का यह भी कहना था कि समय रैना की तरफ से अब तक इस पूरे मामले पर कोई भी वास्तविक और साफ दिल से मांगी गई माफी सामने नहीं आई है। सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रखते हुए सॉललीिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी समय रैना के हालिया आचरण और सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों का मुद्दा पीठ के सामने पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने अदालत से अपील की कि इन बयानों और कोर्ट के प्रति दिखाए गए रवैया को भी रिकॉर्ड पर लिया जाना चाहिए। सॉललीिसिटर जनरल ने कोर्ट की टिप्पणी का समर्थन करते हुए कहा कि हमारे देश के युवाओं के पास इनसे कई बेहतर और सच्चे आइकॉन मौजूद हैं। आपको बता दें कि इस सख्त रुख को देखते हुए अदालत ने पहले समय रैना पर ₹1 लाख का एक बहुत ही भारी जुर्माना लगाने का मन बना लिया था।

लेकिन कोर्ट रूम में मौजूद समीर रैना के वकील ने अदालत से रहम की गुहार लगाई, मिन्नत की और इसे कम करने की मांग की। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माने की राशि को संशोधित करके ₹3 लाख तय कर दिया। अदालत ने समय रैना को कड़ी चेतावनी देते हुए आदेश दिया है कि ₹3 लाख का जुर्माना जो यह राशि है हर हाल में दो हफ्ते के भीतर जमा करनी होगी। साथ ही कोर्ट ने यह भी सवाल दाग दिया कि समय रैना और उनके साथ के दूसरे कॉमेडियन ने अपने बर्ताव और आचरण में सुधार के लिए अब तक जमीन पर क्या कदम उठाए हैं? तो अब बात करते हैं कि इस पूरी खबर का असल मायनों में मतलब क्या है?

और यह इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? हम इस पर बात क्यों कर रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केवल समय रहना पर एक जुर्माना नहीं है बल्कि ये पूरे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कॉमेडी जगत के लिए एक बहुत बड़ी [संगीत] लक्ष्मण रेखा है।

आज इंटरनेट पर व्यूज और लाइक्स पाने की होड़ में अक्सर लोग यह भूल जाते हैं कि समाज के प्रति और देश के कानूनों के प्रति उनकी कोई जिम्मेदारी भी होती है। अदालत ने यूथ आइकन शब्द पर जो चिंता जताई है वह बेहद जायज है। क्योंकि आज देश का युवा वर्ग इन क्रिएटर्स, कॉमेडियंस और यूर्स को बहुत बारीकी से फॉलो करता है। अगर यह लोग अदालत के आदेशों को हल्के में लेंगे या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाएंगे, उल्टी बात करेंगे, तो समाज में बहुत गलत संदेश जाएगा। सोशल मीडिया पर भी अब लोग दो गुटों में बटे नजर आ रहे हैं।

जहां एक तरफ लोग इसे फ्रीडम ऑफ स्पीच और कॉमेडी का हिस्सा बता रहे हैं तो दूसरी तरफ एक बड़ा वर्ग सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े कदम की तारीफ कर रहा है कि अब वक्त आ गया है कि जब जवाबदेही तय होनी ही चाहिए। इस पूरे मामले पर आपकी क्या कुछ राय है?

क्या आपको लगता है कि सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना पर ₹3 लाख का जुर्माना लगाकर बिल्कुल सही संदेश दिया है?

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