पूजा भट्ट ने खुलासा किया कि जब उनके पिता महेश भट्ट ने ओसो का साथ छोड़ने का फैसला लिया तो हालात इतने गंभीर हो गए थे कि उनके परिवार को रातोंरात पुणे के एक सेफ हाउस में जाना पड़ा था। साइरस सेज के पडकास्ट में इस घटना को याद करते हुए पूजा ने बताया कि महेश भट्ट एक समय पर ओसो के बहुत बड़े फॉलोअ थे। लेकिन बाद में उन्होंने इस रास्ते को छोड़ने का फैसला किया।
उन्होंने कहा मेरे पिता रजनीश कल्लट का हिस्सा थे। उन्होंने अपनी माला गले से उतारी और उसे टॉयलेट में फ्लश कर दिया। इसके बाद उन्हें बैन कर दिया गया। पूजा ने आगे बताया मुझे याद है कि विनोद खन्ना के जरिए मेरी मां को एक मैसेज मिला था। भगवान बहुत गुस्से में है। भगवान महेश को खत्म कर देंगे। उस समय मैं छोटी थी और हमें आधी रात को पुणे के एक सेफ हाउस में ले जाया गया। महेश भट्ट पहले भी अपनी आध्यात्मिकता यात्रा के बारे में खुलकर बात कर चुके हैं। उन्होंने बताया था कि अपने शुरुआती फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद वह जवाब तलाश रहे थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वह सिर्फ स्पिरिचुअल सुपर मार्केट में पहुंच गए थे। उन्होंने कहा था मैं ओसो रजनीश के पास गया जो पुणे के एक करिश्माई गुरु थे।
मैंने खुद को पूरी तरह उन्हें समर्पित कर दिया था। केसरिया कपड़े पहनता था और दिन में पांच बार ध्यान करता था। लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वह अंदर से जैसा महसूस कर रहे हैं, वह बाहर से दिखाई नहीं दे रहा है। मुझे लगा कि मैं अभी भी ईर्ष्या महसूस करता हूं, लेकिन पवित्र बातें बोल रहा हूं। मैं खुद को ढोंगी महसूस करने लगा था। मैं दुनिया और खुद से झूठ नहीं बोल सकता था। महेश भट्ट ने बताया कि इसी वजह से उन्होंने माला फेक दी।
उन्होंने अपने दोस्त विनोद खन्ना से कहा, “यह सब बेकार है। मैं बेवकूफ हूं।” जहां महेश भट्ट ने यह रास्ता छोड़ दिया, वहीं विनोद खन्ना ने ओसो का साथ जारी रखा और बाद में ऑर्गन स्थिति उनके आश्रम में भी रह चले गए थे। महेश भट्ट के इस आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर आपकी क्या राय है? क्या वाकई उनका ओसो को छोड़ना एक महत्वपूर्ण निर्णय था या फिर कुछ और अपनी राय हमें कमेंट कर जरूर बताएं और चैनल को सब्सक्राइब करें। नमस्कार।