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4 महीने तक कहाँ रखा गया खामेनेई का शव? क्या इस्लाम के नियमों को तोड़ा गया?

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28 फरवरी 2026 वो दिन जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया। इस अटैक में ईरान के कई टॉप मिलिट्री कमांडर्स और न्यूक्लियर साइंटिस्ट के साथ-साथ देश के सुप्रीम लीडर आया अली खामन की मौत हो गई थी। अब ईरान करीब 4 महीने बाद अपने फॉर्मर सुप्रीम लीडर को अंतिम विदाई देने जा रहा है। 4 जुलाई से शुरू होने वाला उनका स्टेट फ्यूनरल पूरे छ दिनों तक चलेगा। लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस्लाम में किसी की मौत के बाद उसे जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी दफनाने की परंपरा है। आमतौर पर 24 घंटे के अंदर ही अंतिम संस्कार कर दिया जाता है।

तो फिर खामोई का अंतिम संस्कार इतनी देरी से जो हो रहा है क्या वो इस्लाम के विरुद्ध है? और दूसरा सवाल यह कि आखिर शव को इतने समय तक सुरक्षित कैसे रखा गया? ऐसे में सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें भी हो रही थी। कोई कहने लगा कि शायद खामन को पहले ही दफना दिया गया और अब सिर्फ औपचारिक तौर पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि उनका शव किसी गुप्त जगह पर रखा गया। आखिर इन दावों में कितनी सच्चाई है यह समझना जरूरी है। तो चलिए सबसे पहले बात करते हैं कि आखिर खामन के अंतिम संस्कार में देरी क्यों हुई?

इसकी वजह है लड़ाई। उनकी मौत के वक्त ईरान और अमेरिका इजराइल के बीच युद्ध चल रहा था। लगातार मिसाइल अटैक्स, एयर स्ट्राइक्स की वजह से इतना बड़ा पब्लिक फ्यूनरल कराना सेफ नहीं था। यही वजह है कि ईरानी सरकार ने हालात नॉर्मल होने तक अंतिम संस्कार को टालने का फैसला किया। कुछ सिचुएशन में शिया इस्लाम में भी छूट दी जाती है कि अगर देश में युद्ध चल रहा हो, हर तरफ खतरा हो और हालात ठीक ना हो तो अंतिम संस्कार कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। खामई के मामले में भी ऐसा ही हुआ। अंतिम संस्कार तो टाल दिया गया लेकिन इतने लंबे समय तक शव को सुरक्षित कैसे रखा जाए यह भी एक बड़ा चैलेंज था। इस्लाम में शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए केमिकल के इस्तेमाल करने की आमतौर पर मनाही होती है। यही वजह है कि कई लोगों को लगा कि शायद ईरान ने धार्मिक नियमों में बदलाव किया होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अधिकारियों का कहना है

कि खामई के शव को शिया धार्मिक परंपराओं के मुताबिक रखा गया। डॉ. मोहम्मद उमर ने न्यूज़ डिजिटल को बताया कि उनके मुताबिक खामन के शव को रेफ्रिजरेटर कोल्ड स्टोरेज में ही रखा गया क्योंकि इस्लाम में केमिकल एंबिंग की मनाही होती है। अब 4 जुलाई से शुरू हो रहे खामन को अंतिम विदाई देने वाले कार्यक्रम में ईरानी सरकार का दावा है कि इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। इसके अलावा कई देशों के लीडर्स और फॉरेन डेलीगेट्स भी इस फ्यूनरल का हिस्सा बनने वाले हैं। यानी कि यह एक ऐसा इंटरनेशनल इवेंट होगा जिस पर पूरी दुनिया की नजर रहने वाली है। फिलहाल आयतुल्लाह अली खान नहीं के ताबूत को ईरान के तिरंगे में लपेटकर तेहरान के ग्रैंड मुसल्ला लाया गया है। यह ईरान की एक ऐसी जगह है जहां बड़े-बड़े धार्मिक और सरकारी कार्यक्रम होते हैं।

पूरा परिसर लाल, फूलों और सफेद तितलियों से सजाया गया है। अब अगले तीन दिनों तक खामनाई का शव यहीं रखा जाएगा ताकि देश भर से आने वाले लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकें। इसके बाद खामनाई की अंतिम यात्रा तेहरान से निकलकर पहले कौम पहुंचेगी। फिर मशहद जाएगी और उसके बाद इराक के पवित्र शिया शहर नजफ और कर्बला लेकर जाया जाएगा। आखिर में 9 जुलाई को उन्हें उनके जन्म स्थान मशहद में मौजूद इमाम रजा की दरगाह के पास दफनाया जाएगा। खामनाई सिर्फ ईरान के सबसे बड़े नेता नहीं थे बल्कि पूरी शिया कम्युनिटी के लिए भी एक खास चेहरा थे। इसलिए ईरान सरकार चाहती है कि यह अंतिम संस्कार पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा संदेश बने और फिर खामई के अंतिम संस्कार की तुलना 1989 से हो रही है। उस वक्त जब आया रहला खुमैनी का निधन हुआ था तो पूरा देश जैसे सड़कों पर उतर आया हो। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि हालात बेकाबू हो गए थे। लोग एंबुलेंस पर चढ़ गए भगदड़ मच गई थी और दफनाने का प्रोसेस बीच में रोकना पड़ा था। बाद में सुरक्षा बढ़ाकर दोबारा से अंतिम संस्कार करवाया गया था। फिलहाल इस खबर में इतना ही। आपका इस पर क्या कहना है? कमेंट सेक्शन में जरूर लिखिएगा।

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