बॉलीवुड का सबसे बड़ा स्टार मन्नत केकेआर फ्रेट चिल्ली एंटरटेनमेंट 1200 करोड़ की नेटवर्थ यह सब देखकर लोग सोचते हैं यह आदमी हमेशा से लकी रहा होगा लेकिन एक सच है जो इस चमक-धमक के पीछे छुपा हुआ है शाहरुख खान के पास अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशियां शेयर करने के लिए कोई नहीं था ना पहली फिल्म के प्रीमियर पर कोई था ना पहले फिल्मफेयर अवार्ड पर ना डीडीएलजे की सक्सेस पर ना मन्नत में गृह प्रवेश पर क्योंकि जब तक वो वहां पहुंचे वो वह दोनों जा चुके थे। मां और पिता दोनों। यह कहानी उस अंधेरे की है
जो किंग खान के सबसे ब्राइट मोमेंट के पीछे हमेशा रही है। जिसके बारे में बॉलीवुड ने कभी ठीक से बात ही नहीं की। शुरुआत करते हैं पेशावर से। 1927 मीर ताज मोहम्मद खान एसआरके के पिता। पेशावर में पैदा हुए। 16 साल की उम्र में जब बाकी बच्चे स्कूल जाते थे। मीर ने घर छोड़ दिया। पैदल चलकर कश्मीर आए दिल्ली पहुंचे और अब्दुल गफ्फार खान और वहां पर एक आंदोलन में शामिल हो गए अंग्रेजों के खिलाफ आजादी के लिए। वो अपने वक्त के सबसे कम उम्र के फ्रीडम फाइटर्स में से एक थे। [संगीत] पार्टीशन हुआ। पेशावर पाकिस्तान में चला गया। मीर दिल्ली में रह गए [संगीत] हमेशा के लिए। अपना शहर, अपना घर, अपनी जमीन सब कुछ पीछे छूट गया।
लेकिन एक शिकायत नहीं की। दिल्ली में अपनी एक नई जिंदगी शुरू की। लॉ पढ़ा, छह भाषाएं सीखी। अलग-अलग हिंदी, इंग्लिश, पंजाबी, परर्शियन है ना अपना फर्नीचर का बिजनेस शुरू किया। ट्रांसपोर्ट बिनेस किया, रेस्टोरेंट खोला। एक के बाद एक वेंचर शुरू किए लेकिन ऑनेस्ट इंसान [संगीत] थे। पार्टनर्स ने धोखा दे दिया। बिजनेस बंद हो गए। फिर एक दिन एक लड़की से मुलाकात हुई। लतीफ फातिमा हैदराबादी मुस्लिम [संगीत] बैकग्राउंड से ऑक्सफोर्ड से पड़ी हुई। पहली मुस्लिम वुमेन जिन्होंने ऑक्सफोर्ड में एजुकेशन ली। दोनों की लव स्टोरी शुरू होती है एक एक्सीडेंट से। मीर ने लतीफ की उस वक्त हेल्प की जब वह इंजर्ड [संगीत] थी। 1959 में शादी हुई 1965 में एक बेटा पैदा हुआ। बेटे का नाम था शाहरुख खान। एसआरके ने अपने पिता के बारे में जो लिखा वो पढ़कर आंखें भर जाती हैं। उन्होंने लिखा मेरे पिता 6 फुट 2 इंच लंबे इंसान थे। पठान के लुक्स थे। ग्रे आइज, ब्राउन हेयर। [संगीत] लेकिन वो बहुत वेल रीड और जेंटल इंसान थे। जब मैं उनके किसी पुराने जानने वाले से मिलता हूं। वो उनके सेंस ऑफ ह्यूमर की बात करते [संगीत] हैं। कहते हैं कि वो एक जेंटलमैन थे। और फिर एसआरके ने एक बात लिखी जो बहुत पावरफुल है। वो अपनी बहन और अपनी मां से ज्यादा पिता की सुनते थे। क्योंकि वो बहुत जेंटल थे। वो हमारे फ्रेंड थे और वो दोस्त 1981 में चले गए। तब एसआर के सिर्फ 15 साल के थे स्कूल में। मीर ताज मोहम्मद खान कैंसर से गुजर रहे थे। एसआरके ने एक इंटरव्यू में कहा कि जब पिता गए मैं बहुत छोटा था। मैं रोया नहीं उस वक्त। मुझे नहीं पता कि मैं क्यों नहीं रोया। शायद मुझे नहीं समझ में आया। मां अकेली रह गई दो बच्चों के साथ। एक बेटा 15 साल का, एक बेटी थोड़ी सी बड़ी और लतीफ फातिमा ने हार नहीं मानी।
उन्होंने बिजनेस संभाला, घर चलाया और शाहरुख खान को हर दिन फील करवाया कि तुम स्पेशल हो। तुम बहुत कुछ पढ़ा करोगे। एसआरके ने एक इंटरव्यू में कहा कि मां की नजर में सबसे ज्यादा बेहतर मैं था और यह मैं खुद भी मानने लगा था। उनकी वजह से अपने आप पर एक कॉन्फिडेंस [संगीत] आया सिर्फ मां की वजह से। मां ने शाहरुख खान को वो दिया जो कोई नहीं दे सकता था। एक मां का अंधा विश्वास। 1988 में एसआरके ने टीवी सीरियल 4G से अपना करियर शुरू किया। सर्कस आने वाला था। पहला [संगीत] बड़ा ब्रेक और उसी वक्त शाहरुख खान की मां बीमार पड़ जाती है। डायबिटीज कॉम्प्लिकेशंस बढ़ रहे थे और फिर वो रात आई जिसे एसआर के कभी भूल नहीं पाए। सर्कस रिलीज होने से ठीक पहले मां आईसीयू में थी। है ना? एक बेटा उसके पास खड़ा था 25 साल का और वो बेटा उनसे बात कर रहा था। एसआरके ने खुद 1991 में उनका पहला इंटरव्यू रोते हुए था। उन्होंने बताया कि मैं आईसीयू में अपनी मां के पास बैठा था। आंखों में एक अजीब सी खामोशी थी। लेकिन वो बहुत खूबसूरत थी। मेरी मां खुश थी। मैंने अपनी मम्मी से कहा कि तुम ठीक हो जाओगी। मेरे लिए ठीक हो जाओ। फिल्म्स करूंगा, सीरियल्स करूंगा। [संगीत] सर्कस आने वाला है। एक बेटा अपनी मां को अपने सपनों के बारे में बता रहा था ताकि मां रुक जाए और फिर रात को डॉक्टर आए। उन्होंने कहा कि आपकी मां की सांसे चढ़ रही हैं।
हमें नहीं पता अभी क्या करना है। डॉक्टर्स ने इंजेक्शंस मांगे। 20 इंजेक्शंस। एसआरके ने पूरी दिल्ली पूरी दिल्ली छान [संगीत] ली। रात के अंधेरे में एक हॉस्पिटल में एक फार्मेसी में हर तरफ भागे और चार इंजेक्शन जुटा पाए। एक और बात जो बहुत ज्यादा पर्सनल है। एसआरके ने बताया कि मुझे भगवान पर विश्वास नहीं था और उस रात किसी ने मुझसे कहा कि कुरान पढ़ो भगवान सुनेगा। मैं भागते हुए इंजेक्शन ढूंढते हुए सिर्फ अल्लाह को याद करता रहा। भगवान से पहली बार मांग रहा था। जब इंजेक्शन [संगीत] लेकर वापस आया तो अंकल बाहर ही बता रहे थे कि तुम्हारी मां चल बसी। एसआर के उनके पास गए। उनकी मां की आंखें खुली थी। फिर धीरे-धीरे बंद हो गई। एसआरके ने कहा कि उनके जाने के बाद एक अजीब सी [संगीत] शांति छा गई। एसआरके जो अपने पिता के जाने पर नहीं रोए थे उस रात फूट-फूट कर रोए। पहली बार पब्लिकली उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा। मां के जाने के बाद मुझे पहली बार रियलाइज हुआ। मैं वो नहीं हूं जो वो सोचती थी। मैं कोई बड़ी चीज नहीं हूं। मैं नोबडी हूं जिसका कोई बड़ा सपना नहीं था। मुझे स्क्रीन पर बिग स्क्रीन पर मेरी मां का देखने का सपना था जो वो नहीं देख पाई। सर्कस उनका पहला सीरियल था। मां के जाने के बाद रिलीज हुआ जिसकी सक्सेस उनकी मां नहीं देख पाई। अब जरा टाइमलाइन देखो। एसआरके 15 साल के थे जब उनके पिता गए। एसआरके 25 साल के [संगीत] थे और इन्हीं 10 सालों में एसआरके ने गौरी से प्यार किया। उनसे परिवार वालों से लड़े और अपने साथ मुंबई में उन्हें लेकर आए। शादी की। यानी जो सबसे बड़ी पर्सनल मोमेंट्स थी वो उनके माता-पिता के बिना थे।
करियर शुरू हुआ। मां नहीं थी। डीडीएलजी की सक्सेस मिली तब भी माता-पिता नहीं थे। कुछ-कुछ होता है ब्लॉकबस्टर हुई। मन्नत जब मिला तब भी मां पापा नहीं थे। एसआरके ने कई बार कहा है कि मैं मानता हूं कि वो कहीं है आसमान में है, तारों में हैं और एक दिन मैं उनसे मिलूंगा। और 2014 में पिता के बर्थडे पर उन्होंने Twitter पर लिखा आज मेरे पिता का बर्थडे है। अगर होते तो 87 साल के होते और मुझ पर शायद बहुत प्राउड करते। मुझे लगता है यह दोनों शब्द पढ़कर दिल भारी हो जाता है। एक बेटा जो नहीं जानता कि क्या उसके पिता उस पर प्राउड होते होंगे या नहीं क्योंकि उन्होंने कभी देखा ही नहीं। मीरताज मोहम्मद खान एक फ्रीडम फाइटर जिसने पेशावर से चलकर [संगीत] इंडिया के लिए लड़ाई लड़ी जिन्होंने चार जुबान सीखी। जेंटलमैन थे और 53 की उम्र में चले गए। तब तक उनका बेटा बहुत छोटा था। आज बॉलीवुड का सबसे बड़ा स्टार है उनका बेटा। लेकिन उसकी हर सक्सेस के पीछे [संगीत] खालीपन है। एक ऐसा खालीपन जो कोई अवार्ड नहीं भर सकता। कोई बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड नहीं भर सकता। तुम मुझे कमेंट करके बताओ कि क्या तुम्हें पता था कि एसआरके की स्टोरी ऐसी है जिसे तुम हंसते खेलते बाहें फैलाते [संगीत] हुए देखते हो वो शायद अंदर से थोड़ा खाली है।