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गाजा में इजरायल ने जानबूझ कर 20,000 मासूम बच्चों के साथ जो किया वो रूह कंपा देगा!

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20,000 से ज्यादा बच्चों का कत्लेआम हुआ है। क्या किसी देश की सेना बच्चों को भी निशाना बना सकती है? सवाल सुनने में जितना डरावना है उससे कहीं ज्यादा डरावना है वो आरोप जो अब इजराइल पर लगाया गया है। यूनाइटेड नेशंस की एक इन्वेस्टिगेशन कमेटी ने अपनी नई रिपोर्ट में दावा किया है कि गाजा में इजराइली सेना ने कई मौकों पर बच्चों को निशाना बनाया। इतना ही नहीं रिपोर्ट में नरसंहार, युद्ध अपराध यानी वॉर क्राइम और मानवता के खिलाफ अपराध यानी क्राइम अगेंस्ट ह्यूमैनिटी जैसे बेहद गंभीर शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया है। हमेशा की तरह इजराइल इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहा है।

जबकि यूनाइटेड नेशंस का जांच आयोग कह रहा है कि उसके दावे, गवाहों, सबूतों और घटनाओं की डिटेल्ड इन्वेस्टिगेशन पर आधारित हैं। इस आयोग के अध्यक्ष भारत के उड़ीसा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस श्रीनिवासन मुरलीधर हैं। उन्होंने सबूतों का हवाला देते हुए बताया कि इजरायली सेना ने घने रिहाइशी इलाकों, स्कूलों और कैंप्स पर हमले किए जिसके चलते 20,000 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई। ऑक्यूपाइड फिलिस्तीनी टेरिटरी पर बने संयुक्त राष्ट्र के जांच कमीशन ने 23 जून को 100 पेज की रिपोर्ट जारी की। इंडिया टुडे के साथ एक खास बातचीत में जस्टिस एस मुरलीधर ने बताया कि रिपोर्ट से पता चलता है कि 7 अक्टूबर 2023 से 7 अक्टूबर 2025 के बीच गाजा वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलम में 2000 से ज्यादा बच्चे मारे गए और 44,000 से ज्यादा बच्चे घायल हुए। जस्टिस श्रीनिवासन मुरलीधर ने बताया कि जंग के दौरान फिलिस्तीनी बच्चों पर बहुत ज्यादा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को मारने और अपंग बनाने का काम बहुत सोच समझकर और निशाना बनाकर रणनीति के तौर पर किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इजराइली सेना ने घनी आबादी वाले इलाकों में जबरदस्त तबाही मचाने वाले बमों का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं ड्रोन और स्नाइपर राइफल जैसे सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया। पूर्व चीफ जस्टिस ने कहा वो एक और तरीका अपनाते हैं जिसमें कॉडकॉप्टर ड्रोन और स्नाइपर राइफल का इस्तेमाल किया जाता है। इन कॉडकॉप्टर्स का निशाना बहुत सटीक होता है। एस मुरलीधर ने डॉक्टर्स और गवाहों के बयानों के साथ-साथ कमीशन के देखे गए वीडियोस का भी जिक्र किया। जिनमें कैमरे पर बात करते हुए इजराइली सैनिकों के फुटेज भी शामिल थे। कुछ सैनिकों ने दूर से ही टारगेट की पहचान करने में सक्षम एडवांस्ड ड्रोन के इस्तेमाल के बारे में स्वीकार किया। उसके बारे में बताया। उन्होंने बताया कि डॉक्टर्स ने सिर और गर्दन पर गोली लगने से घायल बड़ी संख्या में बच्चों का इलाज करने की बात कही।

डॉक्टर्स ने कहा, “हम हम देख रहे हैं कि बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे आ रहे हैं जिनके सिर और गर्दन पर एक ही गोली लगी है जिससे उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट में स्कूल्स, यूनिवर्सिटी, हॉस्पिटल और अनाथालय जैसे सिविलियर इंफ्रास्ट्रक्चर के तबाह होने की भी जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक गाजा के 97% स्कूल पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। 97% कई बच्चे 3 साल से ज्यादा समय से फॉर्मल पढ़ाई से दूर हैं। कमीशन के सामने गवाही देने वाले डॉक्टर्स ने बताया कि उन्होंने बड़ी तादाद में ऐसे बच्चों का इलाज किया है जिन्होंने अपने पूरे परिवार को खो दिया है। आयोग ने हिरासत में नाबालिगों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों को भी दर्ज किया। पूर्व चीफ जस्टिस श्रीनिवासन मुरलीधर ने कहा कि अब सिर्फ चिंता जताना काफी नहीं है। एक्शन लेने की जरूरत है। इधर एक्शन की डिमांड हो रही है।

दूसरी तरफ इजराइल रिपोर्ट में किए गए दावों को नकार रहा है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक यूनाइटेड नेशंस में इजराइल के राजदूत डेनी डेनन ने कहा है कि कमीशन हमास के अपराधों को नजरअंदाज कर इजराइल को निशाने पर रख रही है। वैसे इजराइल से ऐसे जवाब आना कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। यूएन की रिपोर्ट साफ बता रही है कि इजराइल की सेना और सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों को तार-तार कर दिया है। इंटरनेशनल लॉज़ को पूरी तरह तोड़ दिया है जैसा कि रिपोर्ट में बताया गया है। अब इस रिपोर्ट्स में जो फाइंडिंग सामने आई हैं और इजराइल का जो जवाब है उनमें से आप किसे सच मानते हैं और इस पूरे मामले पर आप क्या सोचते हैं? हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं। आपके लिए तमाम जानकारी जुटाकर इस वीडियो की स्क्रिप्टिंग की हमारे साथी नीरज और अर्पित कटिहलर ने। मैं हूं शेख नावेद। देखते रहिए ललन टॉप।

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