नमस्कार दोस्तों, एक बार फिर आप सभी का स्वागत है मनोज फिल्मी पडकास्ट में। बॉलीवुड में हर डायरेक्टर, प्रोड्यूसर यह चाहते हैं कि उनकी फिल्म जल्द से जल्द बनकर तैयार हो जाए। कुछ फिल्में जल्दी बनकर तैयार हो जाती हैं। तो कुछ 10 साल बाद भी नहीं बन पाती। 70 के दशक में एक प्रोड्यूसर की एक फिल्म 4 साल में पूरी हुई। इसी बीच फिल्म के प्रोड्यूसर ने अपनी दूसरी फिल्म बना डाली और रिलीज भी कर दी। यह इकलौती फिल्म है जिसमें रेखा और जिनत अमान ने साथ में काम किया था। यह फिल्म इतनी [संगीत] मनहूस रही कि अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की दोस्ती भी तोड़ गई। अमिताभ और यश चोपड़ा के रिश्ते खराब हो गए। तो दोस्तों, यह फिल्म कौन सी थी? आइए जानते हैं इस फिल्म से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य। लेकिन दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा। तो चलिए दोस्तों वीडियो को शुरू करते हैं। 1975 की दीवार [संगीत] और कालजाई फिल्म शोले के बॉक्स ऑफिस पर झंडे गाड़ने के बाद अमिताभ बच्चन सुपरस्टार बन गए।
इसके बाद आई फिल्मों ने उनके स्टारम में चार चांद लगाए। 1977 के दौरान अमिताभ बच्चन कई फिल्मों में बिजी थे। 16 के बाद उनकी जोड़ी धर्मेंद्र के साथ 1981 की राम बलराम मूवी में नजर आई थी। लेकिन यह फिल्म पूरे 4 साल में तैयार हुई। इस फिल्म का निर्देशन देवानंद के छोटे भाई विजय आनंद ने किया था। इसी बीच प्रोड्यूसर टोनी जुनेजा ने दूसरी फिल्म अमिताभ के साथ शुरू कर दी और 1979 में रिलीज भी कर दी। इस फिल्म का नाम था मिस्टर नटवरलाल। इन दोनों फिल्मों के बीच यश चोपड़ा की एक शानदार फिल्म भी बन रही थी जो कि बॉक्स ऑफिस पर [संगीत] उतनी सफल नहीं रही थी। सबसे पहले दोस्तों बात करते हैं राम बलराम फिल्म की। राम बलराम में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, रेखा, जीनत अमान, अजीत, प्रेम चोपड़ा, हेलेन और अमजद खान लीड [संगीत] रोल में नजर आए थे। डायरेक्टर, एडिटर विजय आनंद थे। कहानी भी विजय आनंद ने ही लिखी थी। स्क्रीन प्ले कमलेश्वर और विजय आनंद ने लिखा था। डायलॉग कमलेश्वर ने लिखे थे और प्रोड्यूसर टीटो थे। म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का था और गीतकार आनंद बक्शी थे। फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट रहा था। फिल्म के पॉपुलर गानों में हमसे [संगीत] भूल हो गई। हमका माफी दे दो।
यार की खबर मिली, प्यार की नजर मिली। लड़की पसंद की मुश्किल से मिलती है। शामिल है। ओसो रजनीश के आश्रम से लौटकर जब विजय आनंद उर्फ गोल्डी मुंबई आ गए तो प्रोड्यूसर उनसे मिलने लगे थे। प्रोड्यूसर टीटो ने उन्हें राम बलराम के लिए साइन किया था। [संगीत] टीटो का पूरा नाम कुशलदीप सिंह जुनेजा था। राम बलराम के लिए धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन को साइन किया गया था। धर्मेंद्र ने ₹6 लाख जबकि अमिताभ ने ₹4 लाख लिए थे। राम बलराम इकलौती फिल्म है जिसमें रेखा और जिनत अमान ने साथ में काम किया है। कहा जाता है कि अमिताभ के कहने पर ही रेखा को फिल्म में काम मिला था। कहानी में विलेन का किरदार बाद में जोड़ा गया था। दोनों भाई भी शातिर थे। उनसे गलत काम करवाने वाला उनका चाचा ही था। अजीत की उन दिनों तबीयत खराब थी। उनका किरदार बहुत सशक्त था। फिल्म की शूटिंग की शुरुआत में ही अमिताभ को पी लिया हो गया। उस दौर में धर्मेंद्र की मांग अमिताभ से ज्यादा थी। फिल्म बनते-बनते अमिताभ की कई फिल्में हिट हो चुकी थी। अब वो [संगीत] सुपरस्टार बन गए थे। अब प्रोड्यूसर्स को दोनों स्टार्स की डेट नहीं मिल पा रही थी।
इसी बीच प्रोड्यूसर टीटो ने अमिताभ को अपनी अगली फिल्म मिस्टर नटवर लाल के लिए साइन कर लिया और उसकी शूटिंग भी शुरू कर दी। धर्मेंद्र अब खुद को इनसिक्योर समझने लगे। अब धर्मेंद्र ने राम बलराम पर ध्यान देना छोड़ दिया। दोनों कई दूसरी फिल्मों में बिजी थे। जब भी समय मिलता तो मशीनी अंदाज में काम करते। अब विजय आनंद समझ चुके थे। फिल्म की क्वालिटी पर खासा असर पड़ रहा था। इसी दौरान विजय आनंद ने महसूस किया [संगीत] कि धर्मेंद्र काम पर ध्यान नहीं दे रहे जबकि अमिताभ घर से ही तैयारी करके आते थे। वह सीन भी जल्दी ही समझ लेते थे। धर्मेंद्र ने फिल्म की डबिंग में भी नखरे दिखाए। गोल्डी ने कई बार उन्हें समझाया तो धर्मेंद्र ने उनकी मौजूदगी में डबिंग करना बंद कर दिया। राम बलराम को कंप्लीट करने में 4 साल से भी ज्यादा का समय लगा। यह 1980 की तीसरी सबसे बड़ी हिट थी। अब बात करते हैं मिस्टर नटवर लाल की जिसका मुहूर्त 18 अप्रैल 1977 को हुआ था। फिल्म में अमिताभ बच्चन, रेखा, [संगीत] अजीत, कादर खान, इंद्रानी मुखर्जी और अमजद खान लीड रोल में नजर आए थे। स्टोरी ज्ञानदेव अग्निहोत्री ने और डायलॉग कादर खान ने, गीतकार आनंद बक्शी थे और संगीतकार राजेश रोशन। प्रोड्यूसर टोनी जुनेजा थे। स्क्रीनप्ले और डायरेक्शन राकेश कुमार का था। इस फिल्म का किस्सा राम बलराम से जुड़ा हुआ है। दो प्रोड्यूसर भाइयों टोनी और टीटो ने राम बलराम फिल्म शुरू की थी। धर्मेंद्र की डेट्स नहीं मिल रही थी। ऐसे में उन्होंने मिस्टर नटवरलाल शुरू कर दी और यह फिल्म 8 जून 1979 में रिलीज हुई थी। मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव एक जालसाज आदमी था। बहुत बार पुलिस को चकमा दे चुका था। बताया जाता है कि ताजमहल और दिल्ली का लाल किला तक वह बेच चुका था। वह नटवरलाल के नाम से मशहूर था। मिथिलेश की जिंदगी से इंस्पायर्ड होकर मिस्टर नटवरलाल फिल्म का टाइटल और हीरो के कैरेक्टर की इंस्पिरेशन ली गई। फिल्म का टाइटल नटवरलाल रखे जाने पर असली नटवरलाल के वकील का लीगल नोटिस आ गया था। ऐसे में फिल्म का नाम बदलकर मिस्टर नटवरलाल कर दिया गया।
अमिताभ की भाभी का रोल पहले निरूपा रॉय को करना था। लेकिन फिर उन्हें बताए बिना इंद्राणी मुखर्जी के साथ फिल्म की शूटिंग शुरू की गई। खून पसीना की टीम इस फिल्म में [संगीत] भी काम कर रही थी। खून पसीना राकेश कुमार के ही निर्देशन में बनी थी। राजेश रोशन ने मिस्टर नटवर लाल में अमिताभ को फिल्म में गाना गाने के लिए मनाया था। यह गाना था मेरे पास आओ मेरे दोस्तों एक किस्सा सुनाओ। [संगीत] यह एक मसाला फिल्म थी। फिल्म में एक्शन, कॉमेडी, सुपरहिट गाने सब कुछ था। मेन विलेन के रोल में अमजद खान मौजूद थे। परदेसिया यह सच है पिया आज भी उतना ही पॉपुलर है। मिस्टर नटवर लाल का बजट 1 करोड़ 80 लाख था। फिल्म ने 3 करोड़ 25 लाख का कलेक्शन किया। यह एक सेमी हिट फिल्म साबित हुई थी। राम बलराम फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही। लेकिन कई जख्म छोड़ गई। इस फिल्म के बाद अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र ने कभी साथ में काम नहीं किया। रेखा और जीनत अमान की साथ में यह इकलौती फिल्म है। अमिताभ बच्चन मिस्टर नटवर लाल के मुंबई टेरिटरी के डिस्ट्रीब्यूटर थे। वह उसी समय बन रही यश चोपड़ा की फिल्म सिलसिला को समय पर डब नहीं कर पाए। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उतनी नहीं चल पाई। ऐसे में यश चोपड़ा और अमिताभ बच्चन के रिश्ते [संगीत] भी खराब हो गए। तो दोस्तों, आज का वीडियो यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए आप सभी को टाटा बाय-ब टेक केयर।