गुजरात के वडोदरा स्थित 978 स्क्वायर मीटर का एक प्लॉट जिसकी कीमत है ₹2.5 करोड़। यह प्लॉट विवादों में है क्योंकि इस विवाद के साथ नथी है पूर्व भारतीय क्रिकेटर और अब टीएमसी छोड़ एनसीपीआई सांसद हो चुके यूसुफ पठान। आरोप है कि पिछले 14 साल से युसुफ पठान ने इस जमीन पर कब्जा कर रखा है। लेकिन अब इस जमीन को वडोदरा नगर न्यू उगम यानी कि वीएमसी ने नीलाम करने का फैसला किया है। जमीन की कीमत ₹20.5 करोड़ तय की गई है। 19 जून को नीलामी का प्रोसेस भी चालू हो गया। यूसुफ पठान को प्लॉट खाली करने का आदेश दिया गया और नोटिस मिलने के बाद पठान ने इस मामले को गुजरात के हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। पठान ने अपना पक्ष रखने के लिए 4 हफ्ते का समय मांगा ताकि वह इंटरनेशनल क्रिकेटर्स को अलॉट होने वाली सरकारी जमीन की नीति को कोर्ट में पेश कर सकें। अब क्या है जमीन से जुड़ा विवाद? क्यों इस प्लॉट के साथ सालों से पठान का नाम जुड़ता आया है? क्या इसी प्लॉट को बचाने के लिए पठान ने बागी टीएमसी गुड से हाथ मिलाया? शुरुआत विवाद की जड़ से करेंगे।
जमीन वड़ोदरा शहर के टंड लाजा इलाके में टाउन प्लानिंग स्कीम के तहत प्लॉट नंबर 90 पर है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट यह कहती है कि साल 2012 में यूसुफ पठान ने नगर निगम से जमीन को 99 साल की लीज़ पर देने की मांग की थी। तब वडोदरा म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की कमेटी और बोर्ड ने इस प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी। तब यह तय हुआ कि प्लॉट को ₹57,270 पर स्क्वायर मीटर के रेट पर दिया जाएगा। किसी भी तरह की सार्वजनिक नीलामी नहीं हुई और जमीन सीधे यूसुफ पठान को दे दी गई। नगर निगम की मंजूरी तो मिल गई। अब बारी थी राज्य सरकार के फैसले की। साल 2014 में जमीन की लीज़ का मामला राज्य सरकार तक पहुंचा। साल 2014 में ही राज्य के अर्बन डेवलपमेंट विभाग ने इसे मंजूरी देने से मना कर दिया। विभाग का कहना यह था कि बिना सार्वजनिक बोली लगाए इस जमीन को किसी एक शख्स को नहीं दिया जा सकता। माने जमीन पर पठान के कब्जे को गलत ठहराया गया। इसके बावजूद जमीन पर एक बाउंड्री बनाई गई और यह यूसुफ पठान के कब्जे में ही बनी रही। साल बीते, मामला ठंडा पड़ा और जून 204 में फिर से चर्चा में आए। हुआ यूं कि उसी साल पठान पश्चिम बंगाल के बहारामपुर सीट से टीएमसी के टिकट पर लड़े, जीते और लोकसभा सांसद भी बने। सांसद बनते ही उन्हें गुजरात के नगर निगम का नोटिस मिल गया और नोटिस में यह आरोप लगाया गया कि पठान ने नगर निगम की जमीन पर अवैध कब्जा किया हुआ है। इसे जल्द से जल्द खाली कराया जाए।
उसी साल पठान ने गुजरात हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। याचिका में नगर निगम के फैसले को चुनौती दी गई। पठान ने इस कार्यवाही को अदालत में चुनौती दी और उस प्लॉट पर अपने हक को मान्यता देने की मांग की। लेकिन साल 2025 में मामला पलट गया। 18 सितंबर 2025 को गुजरात हाईकोर्ट में केस की सुनवाई कर रही जज मौना भट्ट ने तब कहा कि अगर किसी सेलिब्रिटी या बड़े व्यक्ति को राहत दी जाती है तो इससे गलत संदेश जाएगा। लोगों का जुडिशरी पर भरोसा कम हो सकता है। कोर्ट ने यूसुफ पठान को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्होंने वड़ोदरा में एक रिहाइशी प्लॉट पर बिना किसी कानूनी अधिकार के कब्जा किया हुआ है। जस्टिस भट्ट ने यह भी साफ कहा कि जब तक जमीन का सही तरीके से अलॉटमेंट नहीं होता और भुगतान नहीं किया जाता तब तक किसी को उस जमीन पर कब्जा करने का कोई हक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पठान ने बाउंड्री वॉल बनाकर जमीन पर कब्जा कर लिया जो कि एनक्रोचमेंट माना जाएगा। द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने यह माना कि पठान को सिर्फ [नाक से की जाने वाली आवाज़] यह बताया गया था कि उनकी एप्लीकेशन को कंसीडर किया जा रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि वह जमीन के मालिक बन जाए। यहां तक कि अगर वह पैसे देने को भी तैयार थे तब भी उन्हें मालिक नहीं माना जा सका। कुल मिलाकर कोर्ट ने यह माना कि पठान बिना किसी अधिकार के उस प्लॉट का इस्तेमाल करते रहे। पठान ने जज के इस फैसले को ही हाई कोर्ट में चुनौती दे दी। 8 जून 2026 को इस मामले पर फिर सुनवाई हुई। कोर्ट ने फिर वही बात दोहराई कि कोई भी व्यक्ति बिना ₹1 दिए सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं कर सकता है। खासकर तब जब राज्य सरकार पहले ही उस जमीन के अलॉटमेंट की मंजूरी देने से मना कर चुकी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पठान को इस जमीन के इस्तेमाल और कब्जे के लिए हर्जाना देने के लिए तैयार रहना चाहिए और जमीन खाली करने में जितनी देरी होगी उतना ही हरजाना बढ़ता जाएगा। अगली सुनवाई की तारीख 15 जून तय की गई।
15 जून 2026 की सुनवाई में कोर्ट ने पठान को 4 हफ्ते का समय दिया ताकि वह 1999 की राज्य सरकार की पॉलिसी के तहत राहत पाने की कोशिश कर सके। इस पॉलिसी के तहत ऐसे खिलाड़ियों को जिन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर भारतीय टीम को रिप्रेजेंट किया हो उन्हें कुछ शर्तों के साथ राज्य सरकार की जमीन या प्लॉट देने का प्रावधान रखा गया था। कोर्ट तो ऐसा कह रहा है लेकिन नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह पॉलिसी इस मामले में लागू ही नहीं होती। क्योंकि यह जमीन राज्य सरकार की नहीं बल्कि नगर निगम की है। पठान का प्लॉट उन सात प्लॉट्स में से एक है जिनकी कीमत तय की गई है। पठान का यह जमीन विवाद राजनीति से भी दूर नहीं रहा। ऐसा इसलिए भी हुआ क्योंकि पठान उन टीएमसी सांसदों में से एक है जिन्होंने अलग गुट बनाया है और इसी विवाद पर 15 जून को नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुल्ला मेहंदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा संसद के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक मुस्लिम सांसद ने पठान को चेतावनी दी यह कहते हुए कि बीजेपी उनके गुजरात वाले घर पर बुलडोजर चला सकती है और उन्हें आंदोलन से दूर रहने की सलाह दी गई। तब पठान परेशान थे। इस बीच जब महुआ मोहित्रा ने उनसे पूछा कि बात असल में है क्या? तो मोहित्रा को सब बताया गया।
तब मोहित्रा ने पठान को भरोसा दिलाया था कि विपक्ष उनके साथ हमेशा खड़ा रहेगा और उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। इसके जवाब में महुआ मोहित्रा ने उस सांसद का नाम भी बताया। यह हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी। पठान की आलोचना भी की गई। यह कहते हुए कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का साथ दिया जो अब गद्दार निकला। इस मुद्दे पर एआईएमआईएम लीडर असदुद्दीन ओवैसी का भी रिएक्शन आया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि कुछ सांसद बीजेपी में जाने की सोच रहे हैं तो इसके लिए किसी एक व्यक्ति को दोष नहीं दिया जा सकता। इतने लोग पार्टी छोड़कर क्यों जा रहे हैं और इसे लेकर दूसरों पर आरोप लगाने से कुछ नहीं होगा। फिलहाल यूसुफ पठान के कब्जे वाले प्लॉट की नीलामी की तैयारी में नगर निगम अपना प्रोसेस चालू किए हुए हैं। क्या पठान चार हफ्तों का समय लेकर कोई नीति पेश कर पाएंगे या फिर नहीं यह अगली तारीख में ही साफ हो पाएगा। फिलहाल इस वीडियो में बस इतना ही। इसे रिकॉर्ड किया हमारे साथी तौफीक ने। मेरा नाम है रिया। आप देखते रहिए खबरगांव। शुक्रिया।