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जब अमिताभ बच्चन के स्टारडम के आगे झुकने से कादर खान ने कर दिया था मना; टूट गया सालों का याराना!

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हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में दोस्ती और रिश्तों की कई ऐसी कहानियां हैं, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगती। कुछ रिश्ते वक्त के साथ और मजबूत हो जाते हैं, तो कुछ रिश्ते ऐसी गलतफहमियों की भेंट चढ़ जाते हैं, कि फिर कभी पहले जैसे नहीं हो पाते। आज हम बात करने वाले हैं बॉलीवुड के दो ऐसे दिग्गजों की, जिन्होंने मिलकर हिंदी सिनेमा को कई यादगार फिल्में दी। एक तरफ थे अभिनय के शहंशाह अमिताभ बच्चन और दूसरी तरफ थे बेहतरीन लेखक, संवाद लेखक, अभिनेता और कॉमेडियन कादिर खान। एक समय ऐसा था जब कादिर खान और अमिताभ बच्चन की जोड़ी बॉलीवुड की सबसे सफल जोड़ियों में गिनी जाती थी। कादिर खान ने अमिताभ बच्चन के लिए ऐसे ऐसे संवाद लिखे जिन्होंने सिनेमाघरों में तालियां और सीटियां बटोरी। दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी। लेकिन फिर एक ऐसी घटना हुई जिसने इस दोस्ती में दरार पैदा कर दी। कैसे एक संबोधन ने तोड़ दी अमिताभ बच्चन और कादर खान की दोस्ती। जाहिल फिल्म क्यों हुई डब्बा बंद? किस्सा पूरा जानने के लिए आप इस वीडियो को अंत तक देखें। कहा जाता है कि एक फिल्म के सेट पर कादिर खान को अमिताभ बच्चन को सरजी कहने के लिए कहा गया। यह बात उन्हें इतनी बुरी लगी कि उनके मन में नाराजगी पैदा हो गई। धीरे-धीरे दूरी बढ़ती गई और फिर वह रिश्ता पहले जैसा कभी नहीं रहा। इतना ही नहीं इसी दौर में कादिर खान का एक ड्रीम प्रोजेक्ट जाहिल भी अधूरा रह गया। आखिर क्या थी जाहिल फिल्म? क्यों कादिर खान ने इसे बीच में ही छोड़ दिया? क्या सचमुच अमिताभ बच्चन और कादिर खान की दोस्ती एक संबोधन की वजह से टूट गई थी? और क्यों बाद में राकेश रोशन भी इस कहानी को फिल्म बनाने के बावजूद पूरा नहीं कर पाए। आइए जानते हैं पूरी कहानी। 1980 का दशक।

यह वह दौर था जब अमिताभ बच्चन बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार बन चुके थे। उनकी फिल्मों का नाम ही सफलता की गारंटी माना जाता था। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अमिताभ की सफलता के पीछे जिन लोगों का बड़ा योगदान था, उनमें कादिर खान का नाम सबसे ऊपर आता है। कादिर खान केवल अभिनेता नहीं थे, वह एक शानदार लेखक थे। उनकी लेखनी में जादू था। वह ऐसे संवाद लिखते थे जो सीधे दर्शकों के दिल में उतर जाते थे। ये दुनिया बहुत बिगड़ी हुई है। गायतों साहब आए इस दुनिया में जिंदा रहने के लिए बिगड़ा हुआ होना बहुत जरूरी है। जो सुधर गया वो गया ऊपर। अमिताभ बच्चन की कई सुपरहिट फिल्मों के डायलॉग कादर खान ने लिखे थे। जब अमिताभ स्क्रीन पर गुस्से में कोई संवाद बोलते थे और दर्शक सीटियों से थिएटर गूंजा देते थे तो उन शब्दों के पीछे कादर खान की कलम होती थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच सिर्फ पेशेवर रिश्ता नहीं रहा। दोस्ती भी गहरी होती चली गई। फिल्मों की चर्चा, कहानियों पर विचार, नए प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग दोनों अक्सर साथ समय बिताते थे। कादिर खान को अमिताभ पर पूरा भरोसा था और अमिताभ भी उनकी प्रतिभा का सम्मान करते थे। इसी दौरान कादर खान के मन में एक नई कहानी आई। उन्होंने इसका नाम रखा जाहिल कादर खान का मानना था कि इस कहानी में दम है। उस वक्त फिल्मी मैंगेजिन में छपी खबरों के अनुसार इस मूवी की स्टोरी कुछ इस प्रकार थी। एक अनपढ़ लेकिन दिल का साफ युवक यानी अमिताभ बच्चन समाज की नजरों में जाहिल कहलाता है। जब भ्रष्ट ताकतें उसके परिवार और सम्मान पर हमला करती है तो वह अपने साहस, ईमानदारी और इंसानियत से सबको जवाब देता है। अंत में वही जाहिल समाज का सबसे बड़ा नायक बन जाता है। जाहिल मूवी का डायरेक्शन भी खुद कादर खान करने वाले थे। उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए अमिताभ बच्चन के साथ जया प्रदा, अमरीश पुरी, सुरेश ओबेरॉय और रंजीत को चुना। दोनों ने फिल्म को लेकर कई बैठकों में चर्चा की। स्क्रिप्ट तैयार की गई, पात्रों पर काम हुआ और फिर फिल्म को फ्लोर पर ले जाने की तैयारी शुरू हुई। कहा जाता है कि फिल्म की शुरुआती शूटिंग भी शुरू हो चुकी थी। कुछ हिस्सों को फिल्माया भी गया। कादिर खान बेहद उत्साहित थे। उन्हें लग रहा था कि यह फिल्म उनके करियर की सबसे खास फिल्मों में से एक बनने वाली है।

लेकिन इसी दौरान वह घटना हुई जिसकी चर्चा आज तक की जाती है। एक फिल्म की शूटिंग चल रही थी। सेट पर भारी भीड़ थी। सहायक कर्मचारी, निर्माता, निर्देशक और कई लोग मौजूद थे। कादिर खान सेट पर पहुंचे। वह अमिताभ बच्चन को हमेशा की तरह अमित या अमिताभ कहकर संबोधित करते थे। दोस्ती में औपचारिकता नहीं होती। लेकिन तभी अमिताभ बच्चन के पीए ने कादर खान से कहा कि उन्हें अमिताभ बच्चन को सरजी कहना चाहिए। कहा जाता है कि यह बात कादर खान को बिल्कुल पसंद नहीं आई। उनके लिए अमिताभ कोई ऐसे व्यक्ति नहीं थे जिन्हें वह अचानक औपचारिक तरीके से संबोधित करने लगे। दोस्ती बराबरी और अपनापन मांगती है। कादिर खान को लगा कि अब उनके और अमिताभ के बीच पहले जैसा रिश्ता नहीं रहा। उन्हें महसूस हुआ कि स्टारडम के कारण माहौल बदल गया है। हालांकि इस घटना के बारे में अलग-अलग लोगों की अलग राय रही है। कुछ लोग कहते हैं कि यह केवल गलतफहमी थी। लेकिन कादिर खान के कई इंटरव्यू में यह दर्द साफ दिखाई देता था कि उन्हें सम्मान और अपनापन कम होता हुआ महसूस हुआ। यार वो तो अमित है। सर जी कब से हो गया? हां हां वी कॉल हिम सर जी। और सबने सर जी बोलना शुरू ही कर दिया था। तो मेरे मुंह से निकला नहीं सर जी वो सर जी का ना निकलना मैं निकल गया उस ग्रुप में से वह कहते थे कि पहले लोग अमिताभ को अमित कहते थे बाद में उन्हें सर जी कहने का चलन शुरू हो गया और यहीं से दूरी बढ़ने लगी धीरे-धीरे कादर खान अमिताभ बच्चन के करीबी सर्कल से दूर होते चले गए। पहले जो व्यक्ति हर महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का हिस्सा होता था। अब उसे पहले जैसी अहमियत नहीं मिल रही थी। कम से कम कादिर खान को ऐसा महसूस होने लगा उनकी नाराजगी बढ़ती गई। दोस्ती में जब संवाद कम हो जाए तो गलतफहमियां बढ़ने लगती हैं। यही हुआ। दोनों के बीच संपर्क कम होता गया और इसका असर उनके पेशेवर रिश्तों पर भी पड़ने लगा।

सबसे बड़ा झटका लगा जाहिल को। जिस फिल्म को कादिर खान अपना सपना मान रहे थे। वही फिल्म संकट में फंस गई। शूटिंग आगे नहीं बढ़ पाई। फाइनेंस और अन्य व्यवस्थाओं में भी दिक्कतें आने लगी। लेकिन सबसे बड़ी समस्या थी वह उत्साह खत्म हो जाना जिसके दम पर यह फिल्म शुरू हुई थी। कादर खान का मन इस प्रोजेक्ट से उचटने लगा। उन्हें लगने लगा कि अब परिस्थितियां पहले जैसी नहीं है। आखिरकार उन्होंने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में रुचि कम कर दी। फिल्म बीच रास्ते में अटक गई। जाहिल की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। फिल्म इंडस्ट्री में अच्छी कहानियां कभी मरती नहीं है। अगर किसी निर्माता के हाथ से कोई कहानी निकल जाए तो दूसरा निर्माता उसे अपनाने की कोशिश करता है। ऐसा ही कुछ जाहिल के साथ भी हुआ। बताया जाता है कि बाद में इस कहानी में निर्माता निर्देशक राकेश रोशन की दिलचस्पी बढ़ी। राकेश रोशन उस दौर में नए विषयों पर काम करने के लिए जाने जाते थे।

उन्हें लगा कि इस कहानी में संभावनाएं हैं। फिर से योजना बनाई गई नई कास्टिंग और नए ढांचे पर चर्चा हुई। लेकिन किस्मत शायद इस कहानी के साथ नहीं थी। इसी दौरान अमिताभ बच्चन ने राजनीति में कदम रखा और वह राजनीति में ज्यादा बिजी हो गए थे तो वह शूटिंग के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे थे। तो आखिरकार यह फिल्म हमेशा के लिए डब्बा बंद हो गई। सोचिए एक कहानी जो अमिताभ बच्चन और कादर खान जैसे दो बड़े नामों को साथ लेकर शुरू हुई थी। जिस पर शुरुआती काम भी हो चुका था। जिसे बाद में राकेश रोशन जैसे निर्माता ने भी आगे बढ़ाने की कोशिश की। लेकिन वह फिल्म आखिरकार कभी दर्शकों तक पहुंच ही नहीं सकी। दोस्तों, आपको क्या लगता है? क्या कादर खान और अमिताभ बच्चन के बीच हुई दूरी केवल गलतफहमी थी? क्या जाहिल फिल्म बन जाती तो सुपरहिट होती? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए। वीडियो पसंद आया हो तो लाइक और हाइप का बटन दबाकर चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें। थैंक यू।

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