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आखिर क्यों रेखा की गाड़ी के पीछे पागलों की तरह भागने लगे थे पति मुकेश? वजह जानकार होश उड़ जाएंगे।

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रेखा और उनके पति मुकेश अग्रवाल और उनकी शादीशुदा जिंदगी का है जो शुरू होते ही संकट में आ गई। मुश्किल में आ गई, तनाव से घिर गई। दोनों ही समझ गए थे कि उनका जो शादीशुदा जिंदगी का सफर है वह बहुत बेमेल है। रेखा ने इस उम्मीद से शादी की कि बहुत सामान्य इंसान है। साधारण इंसान है। फिल्मी चकाचौंध से दूर एक सीधा साधा सच्चा पति। और मुकेश अग्रवाल को लगा कि सेलिब्रिटी है और उस चकाचौंध का दीवाना मुकेश बहुत पहले से था और शादी के बाद यह दीवानगी सिर चढ़कर बोलने लगी।

साल 1990 जिस साल मुकेश और रेखा की शादी हुई दुनिया भर में वित्तीय संकट का साल था। मुकेश को भी अपने कारोबार में असफलता का सामना करना पड़ा था। लेकिन बिजनेस के इस घाटे के बारे में उन्होंने रेखा को कभी कुछ नहीं बताया और जब रेखा को पता चला तो उन्हें बहुत बुरा लगा। वो हैरान थी कि बिजनेस पर ध्यान देने की बजाय वो फिजूल की पार्टियों में क्यों अपना वक्त बर्बाद करते हैं। रिश्ते में दरार पड़ने लगी थी। मुकेश के बीच मुकेश के लिए बीच का कोई रास्ता ही नहीं था। वह हर काम को अति तक पहुंचा देते थे और रेखा को अब एहसास होने लगा था।

शादी के दो महीने ही हुए थे और रेखा का दिल्ली आना कम होने लगा। लंबे वक्त तक रेखा की गैर मौजूदगी मुकेश को बेहद परेशान करने लगी। अब वह चाहते थे कि रेखा फिल्मों में काम करना छोड़ दें।

मुकेश की यह मांग ना सिर्फ अतार्किक थी जिसमें कोई तर्क नहीं था बल्कि शादी के समय दोनों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन भी थी। रेखा ने एक बार मुकेश से कहा था कि मैं फिल्में तभी छोडूंगी जब मैं प्रेग्नेंट हो जाऊंगी। [प्रशंसा] मुकेश जो रिश्ते की शुरुआत में परिपक्व और गंभीर नजर आए थे। अब किसी टीनएजर फैन की तरह बर्ताव कर रहे थे। जब रेखा ने दिल्ली आना कम कर दिया तो मुकेश अपना कामकाज छोड़कर अपना ज्यादातर समय मुंबई में बिताने लगे और अपने खराब होते कारोबार पर ध्यान देने की बजाय वो रेखा की शूटिंग और बॉलीवुड पार्टियों में अपना वक्त बर्बाद करते नजर आते और लोग पूछते भी थे हैरान होकर रेखा से क्या यही वो शख्स हैं जिन्होंने जिससे आपने शादी की है मुकेश का व्यवहार रेखा के लिए अब शर्मिंदगीगी की वजह बनता जा रहा था।

लेकिन मुकेश इस बात को समझ ही नहीं पा रहे थे। फिल्मी दुनिया के ग्लैमर और चकाचौंध में सोचने की ताकत शायद हल्की पड़ गई थी। मशहूर और प्रभावशाली लोगों से संबंध बढ़ाने की मुकेश की दीवानगी अब रेखा को डराने लगी थी। एक बार राजीव गांधी के फार्म हाउस के आगे से गुजरते हुए मुकेश ने रेखा से कहा कि वह उन्हें राजीव गांधी से मिलवा दें। चलो अंदर चलकर उन्हें हेलो बोल देते हैं।

मुझे ऐसे खास लोगों से जान पहचान बनाने की सख्त जरूरत है। यह बातें मुकेश ने रेखा से कही। रेखा ने जवाब दिया, मैं उन्हें जानती हूं, लेकिन वह मेरे दोस्त नहीं हैं। और मुकेश की बात मानने से सख्ती से रेखा ने इंकार कर दिया। कुछ दिन बाद वह रेखा के साथ को साथ लेकर ग्वालियर जाने की जिद करने लगे। जहां कांग्रेस के नेता माधवराव सिंधिया एक क्रिकेट मैच का आयोजन कर रहे थे। मुकेश ने कहा कि चलो सिंधिया से मिलते हैं। वो मेरे बिजनेस में बहुत काम आ सकते हैं। मुकेश ग्वालियर में एक फैक्ट्री शुरू करने की योजना बना रहे थे और इस पर रेखा ने कहा कि प्लीज अपनी बिजनेस डील्स में मुझे शरीक मत करो। रेखा ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए यह बातें कही थी। मुकेश को बहुत बुरा लगा। क्या मेरा बिजनेस और इससे जुड़े मसले तुम्हारे नहीं है? मुकेश ने पलट कर कहा।

दोनों के अलग नजरिए अब टकराने लगे थे और इस नाजुक रिश्ते पर अब अहम की चोट पड़ने लगी थी। उनका बेमेल रिश्ता अब अब बिल्कुल उभर कर सामने आने लगा था। शादी के तीन महीने में ही रेखा को अपनी बड़ी गलती का एहसास हो गया था।

वो शायद महसूस कर रही थी कि बेहद जल्दबाजी में उन्होंने शादी का जो कदम उठाया वह उल्टा पड़ चुका था। लेकिन वह तो पूरे शहर में अपनी खुशहाल शादीशुदा जिंदगी का ढिंढोरा पीट चुकी थी। अपने इंटरव्यूज में मुकेश को आदर्श जीवन साथी बता चुकी थी। अब वो सबसे क्या कहेंगी? इमेज भी तो भला कोई चीज होती है। शादी को लेकर रेखा की सोच हमेशा से बेहद सपनीली रही थी। लेकिन यह सपना तो उनकी उम्मीद से बिल्कुल जुदा था। उन्हें शायद एक फिल्मी लार्जर देन लाइफ पति की तमन्ना थी।

लेकिन हकीकत उनके इस ख्वाब से परे थी। उनका पति एक आम आदमी था और वो भयंकर डिप्रेशन से जूझ रहा था और इसके लिए वो रोज बहुत सारी दवाइयां भी खाता था। यह बात रेखा को पहले पता नहीं थी और इसके अलावा हनीमून के बाद रोजमर्रा की जिंदगी में वह रोमांच और ग्लैमर भी नहीं था।

जिसकी फिल्म इंडस्ट्री में रहकर रेखा को हमेशा आदत रही थी। मिसेज अग्रवाल का टाइटल भी अब अपनी चमक को खोता जा रहा था। क्या इतने बरस उसने इसी रिश्ते के इंतजार में गुजारे थे? क्या उसे यही चाहिए था? यह सवाल अब रेखा के मन में घूमने लगा। रेखा के पास अचानक इस सवाल का कोई जवाब नहीं था। शायद मन में उठ रही भावनाओं के मंथन के बीच रेखा ने इस रिश्ते से कुछ समय के लिए दूरी बना ली थी।

वो ठंडे दिमाग से सोचने के लिए थोड़ा समय चाहती थी। लेकिन रिश्तों का भंवर कुछ ऐसा था कि शायद कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। हारकर रेखा ने मुकेश और उनके परिवार से खुद को अलग करना शुरू कर दिया। उन्होंने मुकेश के फोन कॉल लेने बंद कर दिए। डिप्रेशन से लड़ रहे मुकेश के लिए यह एक बड़ा झटका था कि उसकी पत्नी जिसकी शादी को अभी तीन-चार महीने ही हुए हैं। वह फोन कॉल तक अटेंड ना करें। रेखा के इस बर्ताव ने शायद मुकेश के मन में पिछले नाकाम रिश्ते की यादें फिर से ताजा कर दी। वो बुरा वक्त जब किटी उन्हें छोड़कर चली गई थी। जब रेखा के साथ बात करने की कोशिश असफल हुई तो बौखलाहट में मुकेश ने मीडिया से बात करनी शुरू कर दी। दोनों के निजी रिश्ते की दरारें अब फिल्मी मैगजीनंस के पन्नों में मुखर होकर दिखाई देने लगी। इनमें से कई स्टोरीज के शीर्षक काफी सनसनीखेज जैसे रेखा एक्सपोज्ड और द शॉकिंग पास्ट ऑफ रेखास हस्बैंड।

मुकेश को शायद लगा था कि मीडिया के जरिए रेखा तक अपनी बात पहुंचाने से शायद वो पिघल जाएंगी। लेकिन हुआ इसके ठीक उल्टा। रेखा ने अपने आसपास मानो और भी कड़ी और बड़ी मजबूत दीवार खड़ी कर ली। मुकेश पर उन्हें जो भी बचा खुचा विश्वास था वह भी जाता रहा। वो खामोश रही और मुकेश से दूरियां बरकरार रखी। इस बर्ताव ने मुकेश को बुरी तरह परेशान कर दिया। वो दीवानों की तरह रेखा से फोन पर बात करने उनसे मिलने की कोशिश करते रहे। वो रेखा के घर फोन करके रोते और रेखा से वापस आने की विनती करते। जब कोई जवाब नहीं मिला तो एक रोज वह अपनी भाभी अपने बड़े भाई अनिल गुप्ता की पत्नी के साथ मुंबई पहुंच गए।

अपने होटल से दोनों ने रेखा को फोन किया लेकिन मुकेश की भाभी के मुताबिक रेखा कभी फोन पर नहीं आई। और आखिरकार दोनों ने बैंड स्टैंड में रेखा के घर जाने का फैसला किया। घर पर दोनों की मुलाकात रेखा की वफादार सेक्रेटरी फरजाना से हुई। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में यह आम धारणा है कि रेखा फरजाना की मर्जी के बिना कोई कदम नहीं उठाती। फरजाना ही उनके करियर, घर यहां तक कि उनकी जिंदगी को भी बड़ी शिद्दत से देखभाल करती हैं। आप लोग इस तरह अपमानित क्यों होना चाहते हो? फरजाना ने मुकेश और उनकी भाभी से कहा, वो आपसे नहीं मिलेंगी और वैसे भी वह घर पर है नहीं। रेखा के बारे में फरजाना कह रही थी और तभी एक गार्ड अंदर आया और उसने खबर दी कि रेखा आ गई हैं।

मुकेश तेजी से नीचे भागे उनके पीछे उनकी भाभी भी गई और जैसे ही मुकेश भागते हुए गेट तक पहुंचे रेखा की नजर उन पर पड़ी और वो फौरन वापस मुड़ी और गाड़ी में बैठ गई। गाड़ी बहुत तेजी से वहां से निकल गई। कहते हैं कि मुकेश रोते हुए उनकी गाड़ी के पीछे भागे। वह चीख-चीख कर उनसे रुकने की विनती कर रहे थे। उस रात बहुत बारिश हो रही थी। रेखा की भाभी ने बाद में दीप्ति नवल को बताया कि मुकेश बुरी तरह भीगे हुए थे और उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे। चीखते-चीखते उनका गला बैठ गया। लेकिन उस औरत ने एक पल के लिए मुड़कर नहीं देखा। रेखा के बारे में। रेखा के लिए इस रिश्ते का मानो मतलब ही अब खत्म हो चुका था। उनके ज़हन में यह रिश्ता एक ऐसे मोड़ तक पहुंच गया था जहां से वापस लौटना मुमकिन नहीं था। मुंबई में तलाक के कागजात तैयार कराए जाने लगे। रेखा इस पूरे हंगामे से अपने दिमाग को हटाने के लिए खुद को शूटिंग और फिल्मों में व्यस्त कर रखने लगी।

वो सुनील दत्त की सामाजिक ड्रामा फिल्म या कब बुझेगी जो 1991 में आई और इच्छाधारी नागनागिन के कामयाब फार्मूले पर बन रही फिल्म शेषनाग जो 1990 में आई उसकी शूटिंग कर रही थी और इसी दौरान मनोबाला के निर्देशक निर्देशन में एक अजीब से नाम वाली उनकी फिल्म मेरा पति सिर्फ मेरा है। 1990 में रिलीज हुई। फिल्म में रेखा दूसरी औरत के किरदार में थी और फिल्म में उनके साथ जितेंद्र और राधिका भी लीड रोल में थे। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सामान्य बिजनेस किया और फिल्म से ज्यादा चर्चा रेखा की निजी जिंदगी की होती रही। अगस्त 1990 में खबरें छपी कि खतरनाक के आलम में मुकेश ने नींद की कई गोलियां खाकर करने की कोशिश की। उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया और किसी तरह उनकी जान बची। रेखा उस समय मुकेश के साथ नहीं थी।

ना ही उन दोनों की कोई बात हुई। मगर फिर भी फिल्म मैगजीनंस को मसाला मिल गया और मुकेश की हालत का पूरा इल्जाम रेखा पर थोपा जाने लगा। स्टार्टस्ट मैगजीन की कवर स्टोरी का टाइटल मानो चीखता हुआ सा था। हाउ रेखा ड्रो मुकेश टू अटेमप्ट । यह लिखा हुआ था। यह भी रिपोर्ट आई कि इस वाक्य के बाद रेखा ने खुद मुकेश को फोन किया और कहा कि अगर एक शादी नहीं चल पा रही है तो इसमें हम कुछ नहीं कर सकते। मैं उस तरह की लड़की नहीं हूं जो झूठे दिखावे के लिए रिश्ते का ढोंग या धोखा करती रहूं।

एक ऐसे रिश्ते को आगे बढ़ाने का क्या फायदा जिसका कोई भविष्य ही ना हो। आधी अधूरी जानकारी की बुनियाद पर पक्ष लेना और बातें बनाना बहुत आसान है। लेकिन किसी शादीशुदा जोड़े की निजी जिंदगी में वाकई क्या चल रहा है यह पूरी तरह जानना शायद मुमकिन नहीं है। और ऐसे रिश्ते में जज्बात, अल्फाज़ और अहम का टकराव होता है। और बाहर से यह समझना बहुत मुश्किल है कि गलती आखिर है किसकी? क्या अपने मन की शांति के बजाय रेखा को मुकेश का साथ निभाना चाहिए था? क्या 11 मतभेदों के बावजूद उन्हें मुकेश के साथ रहना जारी रखना चाहिए था? और अगर वह ऐसा करती तो क्या इसे पक्के से कहा जा सकता है कि मुकेश फिर कभी खुदकुशी की कोशिश नहीं करेंगी?

क्या रेखा अपने पति और इस रिश्ते की जिम्मेदारियों से दूर भाग रही थी? नीरज कुमार दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर और मुकेश अग्रवाल के बहुत करीबी दोस्त एक इंटरव्यू में बताते हैं कि ऐसा नहीं था कि रेखा से शादी करने के बाद उसे अपने हालात या से निजात मिल गई हो। मुझे नहीं लगता कि वह वास्तव में कभी बेहद खुश था क्योंकि बीमारी उसके अंदर थी और उससे बचकर निकलना आसान नहीं था।

नीरज बताते हैं कि मुकेश ने कई बार खुदकुशी की कोशिश की थी। एक बार तो उसने खुद अपने को स्विमिंग पूल में डूब कर खुदकुशी की कोशिश की। लेकिन उसके स्टाफ ने देख लिया और उन्हें खींच कर पूल से बाहर निकाला। मुकेश के दोस्तों और परिवार के लिए उन्हें हर रोज समझना मुश्किल होता जा रहा था। आखिरकार नौबत यहां तक आने लगी थी कि जबजब यह खबर आती कि मुकेश ने करने की कोशिश की है तो मुझे चिड़ होने लगती।

हर दूसरे तीसरे दिन तो उसका फोन आता कि वह अब जीना नहीं चाहता। फिर उसकी आत्महत्या के प्रयास की खबरें आती। मुझे लगने लगा था कि यह आदमी बस अपनी तरफ ध्यान खींचने या अटेंशन सीकर की तरह अटेंशन पाने की कोशिश करता है। मुकेश बुरी तरह हताश, निराश और लंबे समय से डिप्रेशन में था। यह बातें नीरज कुमार कहते हैं। तारीख 10 सितंबर और साल 1990। मुकेश ने एक बार फिर रेखा को फोन मिलाया और इस बार रेखा ने फोन उठाया। दोनों की बात हुई। कुछ देर बातचीत के बाद वह आपसी सहमति से तलाक के लिए राजी भी हो गए। शादी के बस 6 महीने के बाद ही उनका रिश्ता खत्म होने की कगार पर पहुंच गया। 26 सितंबर को रेखा एक स्टेज शो में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका चली गई।

एक खुशहाल शादीशुदा जिंदगी बिताने का रेखा का ख्वाब चटक कर चकनाचूर हो गया था। कुछ दूर तक साथ चलने के बाद हमसफर अपनेप अलग रास्तों पर जाने को तैयार थे। लेकिन जो रास्ता मुकेश ने चुना वो सबके दिलों में कभी ना भरने वाला एक गहरा जख्म। गहरा जख्म छोड़ दिया।

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