क्या आप जानते हैं कि अमेरिका भारत के खिलाफ जो एक्शन ले रहा है वह दरअसल एक्शन नहीं रिएक्शन है। असली एक्शन तो भारत ले रहा है जिसके बारे में कोई बात ही नहीं कर रहा। भारत पर टेरिफ लगाना, एच1 बी वीजा के खिलाफ बयान देना, भारतीय नाविकों को मारना, आपको क्या लगता है अमेरिका यह सब कुछ बेवजह कर रहा है?
दरअसल सच यह है कि भारत ने अमेरिका के खिलाफ एक इतना बड़ा एक्शन लिया है जिसका रिएक्शन अमेरिका अपनी बौखलाहट में दिखा रहा है। अमेरिका नाराज है कि भारत अभी तक ट्रेड डील फाइनल नहीं कर रहा। ईलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में घुसने नहीं दे रहा लेकिन भारत सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने अमेरिका की जड़े हिला दी हैं।
इस एक फैसले से पीएम मोदी ने अमेरिकी डीप स्टेट के कई खतरनाक लोगों की गर्दन पकड़ ली है। जिसके बाद इन सभी लोगों ने डॉनल्ड ट्रंप पर भारत के खिलाफ कदम उठाने का दबाव बनाया।
पीएम मोदी ने किसकी गर्दन पकड़ी है और अमेरिका की जड़े किस तरह से काटी जा रही है। आपने देखा होगा कि पीएम मोदी की सरकार गिराने की कई बार कोशिशें हुई। अमेरिकी डीप स्टेट के एक बड़े खिलाड़ी जॉर्ज सोरोस ने कहा था कि मैं पीएम मोदी को हटाने के लिए $ बिलियन तक खर्च कर दूंगा।
अमेरिका में ऐसे कई जॉर्ज सोरोस बैठे हैं जो भारत को अस्थिर करना चाहते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करना चाहते हैं। अमेरिकी डीप स्टेट जिस विदेशी फंडिंग और एनजीओस का इस्तेमाल करके भारत को अस्थिर करना चाहते थे। अब पहली बार पीएम मोदी ने अमेरिका के उसी पर हमला कर दिया है। अमेरिका की इसी बौखलाहट का सबसे बड़ा सबूत कुछ दिन पहले देखने को मिला जब पहली बार अमेरिका की डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों ही पार्टियों ने भारत के फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट यानी एफसीआरए कानून में प्रस्तावित बदलावों की आलोचना शुरू कर दी है।
इसी एफसीआरए कानून की कमजोरियों का फायदा उठाकर अमेरिका और यूरोपीय देश भारत में काम कर रहे एनजीओस को फंडिंग भेजते थे। क्रिश्चियन मिशनरीज को फंडिंग देते थे। लेकिन अब यह सब कुछ रुक जाएगा क्योंकि भारत ने एफसीआरए कानून में बहुत बड़े बदलावों का ऐलान कर दिया है।
पहली बार अमेरिका भारत के किसी घरेलू कानून को रुकवाने के लिए इतना पागल हो गया है। इससे साफ होता है कि भारत ने अमेरिका पर बहुत बड़ी स्ट्राइक की है। अमेरिका के दोनों बड़े राजनीतिक दलों ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा है कि भारत एफसीआरए कानूनों में जो बदलाव ला रहा है उसे किसी भी तरह से रोकना होगा। दरअसल खबर है कि मोदी सरकार 2010 के फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट में जो बदलाव कर रही है, उससे अमेरिका का भारत में फंडिंग भेजना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
यह कानून अगर पास हो गया, तो अमेरिका और यूरोपीय देश भारत में बैठे क्रिश्चियन मिशनरीज और एनजीओस को आसानी से पैसा नहीं दे पाएंगे। यह बात किसी से नहीं छुपी कि अमेरिका से आने वाले पैसे का इस्तेमाल भारत में किस तरह से होता है। भारत एफसीआरए कानूनों में जो बदलाव कर रहा है उससे अमेरिकी डोनेशन से चलने वाली संस्थाएं और एनजीओस अब गलत काम नहीं कर पाएंगे। अगर यह गलत काम करते पकड़े गए तो इनकी प्रॉपर्टीज जब्त की जा सकती हैं।
इनके अकाउंट्स को फ्रीज किया जा सकता है। सरकार का ऐसे एनजीओस और संस्थाओं पर नियंत्रण और भी ज्यादा बढ़ जाएगा। अमेरिका जिस पैसे से भारत में सरकार गिराने की कोशिशें करता है, समाज में अस्थिरता लाने की कोशिश करता है, कॉकरोच जैसे प्रदर्शनों और किसान आंदोलन जैसे प्रदर्शनों में जो फंडिंग होती है, वो सब बंद हो जाएगी। इसीलिए अमेरिका बौखला गया है। 2010 का एफसीआरए कानून इतना कमजोर और इतने लूप होल वाला था जिसकी वजह से हजारों एनजीओस ने धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे कामों के लिए विदेशी चंदा जुटाना शुरू कर दिया।
इस कमजोर कानून की आड़ में अलगाववादियों, आतंकवादियों, जिहादियों, नक्सलियों और ईसाई मिशनरियों को फंडिंग मिलनी आसान हो गई थी। भारत विरोधी ताकतों ने इस कानून का इस्तेमाल भारत के खिलाफ ही कर दिया था। यह नेशनल सिक्योरिटी का इशू बन गया था।
लेकिन अब यह सब कुछ रुक जाएगा। अमेरिका इस कानून से इतना डर रहा है कि कुछ समय पहले उसने अपने विदेश मंत्री मार्को रूबियो को सीधे कोलकाता भेज दिया। क्योंकि कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी नाम की एक ईसाई संस्था चलती है जिस पर धर्मांतरण के आरोप लग चुके हैं।
ऐसी संस्थाओं के टारगेट पर बहुसंख्यक हिंदू रहते हैं। लेकिन अभी तक अमेरिका का डीप स्टेट एनजीओस की आड़ में जिस तरह से भारत की राजनीति में दखल दे रहा था, पीएम मोदी को हटाने की कोशिशें कर रहा था, वह अब रुक जाएंगी।