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क्या अमिताभ के कारण हमेशा के लिए टूट गई सलीम-जावेद की बेहतरीन जोड़ी?

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था स्क्रिप्ट ऑफ सलीम एंड जावेद ये बहुत ही इंपॉर्टेंट ब्रेकअप था फिल्म इंडस्ट्री में और जिस ब्रेकअप ने इनफैक्ट पूरी इंडस्ट्री को हिला के रख दिया था सबके लोग सब जितने भी बॉलीवुड के फैंस इनफैक्ट इंडस्ट्री वाले प्रोड्यूसर एक्टर्स एक्ट्रेसेस सबके ज़हन में एक ही सवाल होता था कि सलीम जावेद की जोड़ी क्यों टूट कई लोगों ने मुझसे कमेंट में भी पूछा था कि प्लीज इसके ऊपर एक वीडियो बनाइए। एक्चुअली उनको रीजन जानना था कि आखिर ये स्प्लिट क्यों हुआ था? स्प्लिट जो हुआ था वो 1981 में हुआ था और उसको लेकर के गुलजार साहब ने एक बहुत अच्छा स्टेटमेंट दिया था। उनका कोट था। मैं आपको पढ़ के सुनाता हूं। आई सपोज व्हेन पीपल कैन नो लगर कम्युनिकेट वि वन अनदर दे पार्ट बी इट नेहरू एंड जिन्ना और सलीम एंड जावेद मतलब अगर एक दूसरे के साथ अगर लोगों की बात भी नहीं हो सकती तो फिर उन लोगों को अलग हो जाना चाहिए ये गुलजार का थॉट था इस स्प्लिट को लेकर के तो स्प्लिट क्यों हुआ? पहले तो ये थोड़ा सा आपको ब्रीफ में समझना होगा कि ये पेयर बना कैसे था। मैंने पिछले वीडियो में बताया भी था कि इन दोनों ने राइटिंग को पूरे फिल्म इंडस्ट्री में रिवोलशनाइज कर दिया था। राइटर्स की एक अलग पहचान बन गई थी इनके आने के बाद। जो जो क्रेडिट या जो प्रज़ जो रेस्पेक्ट एक एक्टर और एक्ट्रेस को मिलता था वो इन लोगों ने राइटर्स को भी दिलाया अपनी राइटिंग के बदौलत। क्योंकि जिस तरीके का स्क्रिप्ट ये लोग लेकर के आए 70 से वैसी स्क्रिप्टिंग पहले बॉलीवुड में बहुत कम होती थी

और राइटर्स को रिस्पेक्ट देना जरूरी है। ये इन दोनों ने मिलकर के इंडस्ट्री वालों को समझाया भी जो स्टार्टिंग इनकी हुई थी ये हुई थी अंदाज मूवी से। शम्मी कपूर राजेश खन्ना थे। वो रमेश शिपी वो फिल्म बना रहे थे और उसके राइटिंग डिपार्टमेंट में ये दोनों नए लड़के आए और इनका एक पेयर बन गया। हालांकि यह लोग चाहते थे कि फिल्म के पोस्टर पर हमारा नाम हो वो हुआ नहीं। पहले की तीन चार फिल्म में वो क्रेडिट नहीं मिला। क्रेडिट रोल में रहता था लेकिन पोस्टर पे इनके नाम नहीं होते थे। अंदाज में नहीं था। सीता और गीता में नहीं था। हाथी मेरे साथी में नहीं था। तो इन्होंने सोचा कि हमें कुछ अलग करना पड़ेगा और हमारा नाम भी फिल्म में डायरेक्टर या एक्टर के नाम के जस्ट नीचे आना चाहिए। तो जब इन्होंने जंजीर लिखी, जंजीर लिखी और वह जब रिलीज हुई तो इनकी शर्त यही थी कि पोस्टर पर हमारा नाम होना चाहिए। हालांकि जब रिलीज हुई तो फिल्म के पोस्टर पे इनका नाम तब भी नहीं था। तो इन दोनों ने पेंटर को पकड़ के पूरी बॉम्बे इंडस्ट्री बॉम्बे सिटी में जितने पोस्टर्स छपे थे जंजीर के उस पे किसी पेंटर से जाकर के जबरदस्ती लिखवा दिया स्टिल से रिटेन बाय सलीम जावेद। और उसके बाद फिर लोगों में भी कसिटी हो गई कि आखिर ये सलीम जावेद कौन है? तो धीरे-धीरे फिर पता चला अच्छा इन्होंने अंदाज लिखा था हाथी मेरे साथी लिखे और अब जंजीर लिखे और उसके बाद फिर पोस्टर पे भी इनके नाम आने लगे चाहे वो मजबूर हो डॉन हो दीवार हो शोले हो ये सारी चीजें थी और एक टाइम ऐसा लग रहा था कि यही दोनों जो है वो फिल्म इंडस्ट्री को रूल करते हैं। कई सारे एक्टर्स से अगर आप जैसे एक सीरीज है एक डॉक्यूमेंट्री जैसा है उसमें जया बच्चन ने बताया था कि ये दोनों बिल्कुल स्पइल ब्रैट हो गए थे एक टाइम पे ऐसा लगता था कि ये दोनों इंडस्ट्री को रूल कर रहे हैं। घमंडी हो गए थे। अगर हमारी कहानी नहीं चलेगी तो किसी की नहीं चलेगी और वो लिख करके देते थे कि ये फिल्म हिट होगी। ट्रेड मैगजीन में ऐड दे देते जैसे शोले जब पहले तीन वीक में नहीं चली थी तो इन्होंने ऐड दिया था कि वी आर गारंटिंग कि दिस मूवी इस गोइंग टू अर्न करोड़ इन एव्री टेरिटरी और वो हुआ भी तो इस तरह कॉन्फिडेंस था इनको अपने राइटिंग पे जब ईमान धर्म फ्लॉप हुई

जब जो इन्होंने फिल्म लिखी थी और बहुत कुछ दाव पे था उसमें क्योंकि बहुत सा बहुत दिनों के बाद इन्होंने कोई स्क्रिप्ट लिखी थी और ईमान धर्म जब रिलीज हुई तो इन्होंने कहा था कि दिस इज़ गोइंग टू बी आवर रिप्लाई टू आवर क्रिटिक्स एंड ऑल और वो फिल्म हो गई फ्लॉप। तो वो जब फिल्म फ्लॉप हुई थी तो इंडस्ट्री में बहुत सारे लोगों ने पार्टी बनाया था कि सलीम जावेद की फिल्म फ्लॉप हो गई क्योंकि आप जब ज्यादा राइज करते हो तो आपके दुश्मन भी बहुत ज्यादा हो जाते हैं। तो ये सारी चीजें इनके साथ होते रहती थी। लेकिन स्प्लिट की वजह क्या थी? आपको याद होगा कि जो लेट 70 से सलीम जावेद की फिल्में जो थी डॉन के बाद से इनफैक्ट टू बी प्रिसाइज। डॉन के बाद से इनकी जितनी भी कहानियां थी जितने भी स्क्रिप्ट इन्होंने लिखी वो थोड़े से आउटडेटेड होने लगे थे। जेडेड थे और वो एक ही फार्मूला को बार-बार रिपीट कर रहे थे। अगर आप देखो तो जैसे दोस्ताना है दोस्ताना हिट मूवी है। उसमें कोई डाउट नहीं है। लेकिन दोस्ताना की कहानी कहीं से भी उस लेवल की नहीं है जैसी जंजीर थी या त्रिशूल डॉन या शोले थी या दीवार थी। क्रांति इन्होंने लिखी वो इनकी मतलब सबसे कमजोर स्क्रिप्ट कही जाती है। हालांकि वह फिर भी ब्लॉकबस्टर थी लेकिन कहीं से भी उसके ना कोई डायलॉग मेमोरेबल है ना कोई सीन उस तरह का मेमोरेबल है। हालांकि फिल्म हिट थी। तो क्रिटिक्स कहने लगे थे कि अब इनकी कहानी में वो दम नहीं है। वो बात नहीं है। लास्ट नेल इन द कॉफिन जब शक्ति रिलीज हुई। शक्ति देख के जैसा मैंने एक वीडियो बनाया था। शक्ति बहुत अच्छी फिल्म है। बहुत बेहतरीन फिल्म है। कमर्शियली वो बहुत ज्यादा सक्सेसफुल नहीं थी। और उसके पीछे रीजन यही था कि सब ने कहा कि शक्ति वही है जो दीवार थी। दीवार में दो भाई जो थे वो शक्ति में बाप और बेटे हो गए। तो आप नया कुछ नहीं दे रहे हो हमें। शान लिखी थी शान फ्लॉप हो गई थी। तो इनके कहानियों में नयापन नहीं आ रहा था। उसकी दो तीन वजह थी। एक तो 75 के बाद से शोले जब से रिलीज उसके बाद से इन दोनों के पर्सनल लाइफ में बहुत सारे उथलपुथल अप्स एंड डाउंस आ रहे थे। जावेद अख्तर की शादी हुई थी हनी ईरानी से सीता और गीता रिलीज के बाद और जिस वक्त जावेद अख्तर की शादी हुई थी सलीम जावेद ऑलरेडी शादीशुदा थे और सलमान खान उस वक्त करीब आठ साल के थे। तो एक तो इन दोनों में एज गैप बहुत ज्यादा था। उसके बाद जब जावेद अख्तर की हनी हनी ईरानी से शादी हो गई और दो-ती साल तो सब कुछ ठीक चला। उसके बाद इनके इन दोनों के जावेद अख्तर और हनी ईरानी के रिश्ते में ही प्रॉब्लम शुरू हो गए थे। और उसका एक रीजन था शबाना आजमी क्योंकि जावेद अख्तर शबाना को डेट करने लगे थे और यह सारी बातें मार्केट में फैल रही थी और बहुत सारी चीजें इनके अगेंस्ट लिखी जाती थी जावेद अख्तर के बारे में तो वो सारी चीजें कहीं ना कहीं इनको साइकोलॉजिकली अफेक्ट करती थी सेम विद सलीम खान सलीम खान की भी शादी सलमा से हुई थी जिनके कि बेटे हैं सलमान खान और बाकी जो भी तीनों है लेकिन उन्होंने हेलेन से शादी की और उनके अपने पर्सनल लाइफ को लेकर के बहुत सारी बातें मीडिया में छप छपती थी और ये तो ये सारी चीजें जो गसिप कॉलम में जो बातें छप रही थी वो कहीं ना कहीं इन दोनों के प्रोफेशनल लाइफ को अफेक्ट कर रही थी। ये नया कुछ सोच नहीं पा रहे थे क्योंकि अपने पर्सनल लाइफ में ही इतना ज्यादा टर्मल था। ऊपर से क्या हुआ कि इन दोनों में जो एज डिफरेंस था सलीम साहब जो थे जावेद अख्तर से करीब 10 साल बड़े थे। तो जब आप पॉपुलर होने लगते हो तो आपके धीरे-धीरे फ्रेंड सर्कल भी बढ़ते हैं। तो सलीम खान के उनके एज के फ्रेंड्स और बनने लगे। जावेद अख्तर के उनके एज ग्रुप के फ्रेंड्स बनने लगे। और ये जो फ्रेंड सर्कल्स जो इनके बने इन सर्कल्स ने कहीं ना कहीं इन दोनों के कान भरने शुरू कर दिए। जावेद साहब से कहा जाने लगा कि असली राइटर तो आप ही हो। सलीम साहब तो कुछ भी नहीं थे। सलीम खान को यह कहा जाने लगा कि वो जावेद तो बच्चा है। तुमसे 10 साल छोटा है और जो पूरी स्क्रिप्ट है इसमें तो सारा मेहनत तुम्हारा दिख रहा है। उसका कुछ नहीं है। हालांकि कभी भी इन दोनों ने यह बात नहीं बताई।

इनकी जितनी भी स्क्रिप्ट आप उठा के देख लो। कभी भी इन्होंने मीडिया में यह बात नहीं कही है कि ये डायलॉग मैंने लिखा था या ये सीन मैंने लिखा था। ये दोनों एक टीम के की तरह काम करते थे। लेकिन इनके जो वाइडर फ्रेंड सर्कल्स जो बने उन दोनों उन लोगों ने इनके कान भरने शुरू किए और ये सारी बातें मैं अपने मन से नहीं कह रहा हूं। ये बातें खुद जो सलीम जावेद की किताब है उसमें इन दोनों ने ये बातें मानी है कि ऐसा हुआ था। उसके बाद क्या हुआ कि एक तो पर्सनल लाइफ में टर्मल ऊपर से जो फ्रेंड सर्कल थे वो इनके बारे में कान भरने लगे एक दूसरे पे एक दूसरे के खिलाफ और क्या हुआ कि जावेद अख्तर थोड़े एंबिशियस भी थे उन्हें पोएट्री का शौक था। वो जानिसार अख्तर के बेटे थे और उन्हें कहानियों के साथ-साथ शेरोशायरी का भी शौक था। तो उन्होंने सोचा कि मैं एज अ लिरिसिस्ट भी अब हाथ आजमाता हूं। कहानी तो मैं लिख ही रहा हूं। स्क्रीन पर डायलॉग्स वगैरह तो मैं स्टोरी तो लिख ही रहा हूं। कुछ नया भी ट्राई करता हूं। तो उन्होंने एक बार सलीम साहब से कहा कि हमें काम करना चाहिए। सलीम जावेद की कहानी बिकती है। अब हम कंप्लीट पैकेज बेचेंगे। रिटेन बाय सलीम जावेद फिल्म एंड लिरिक्स बाय सलीम जावेद। सलीम खान ने इस बात का ऑब्जेक्शन किया। बोला कि देखो गाने मैं नहीं लिखता हूं। पोएट्री का शौक तुमको है और तुम गाने लिखते हो तो अगर तुमको गाने लिखने हैं तो मेरे नाम के साथ गाने मत लिखो कि सलीम जावेद हैज़ रिटन दिस सॉन्ग वो नहीं होगा। जब मेरा कोई कंट्रीब्यूशन ही नहीं है तो मैं फिर इसको लेकर के अपना नाम क्यों दूं लिरिक्स बाय जावेद अख्तर ही आना चाहिए। मेरा नाम नहीं आना चाहिए। क्योंकि और उनका यह भी कहना था कि अगर कल के डेट में लोग पूछेंगे कि यह गाना किसने लिखा है और जब लोगों को पता चलेगा कि इस गाने में सलीम खान ने तो कुछ काम किया ही नहीं है। जो पोएट्री थी वो तो जावेद अख्तर की ही थी तो सबको लगेगा कि हो सकता है जो कहानियां भी लिखी जा रही है उसमें भी सलीम खान का कोई काम नहीं है। जो कहानी लिख रहे हैं वो जावेद अख्तर ही लिख रहे हैं। तो जिस चीज में मेरा कंट्रीब्यूशन नहीं है उसके लिए मैं अपना उसके लिए मैं क्रेडिट नहीं लेना चाहूंगा। यह बिल्कुल सलीम खान क्लियरली यह बात उन्होंने जावेद अख्तर को कही और यह बात तब है जब सिलसिला के लिए पहली बार जावेद अख्तर ने गाना लिखा था। फिर क्या हुआ? उसके बाद एक जो सबसे बड़ा जो रीजन हुआ इन दोनों के स्पिरिट का वो यह था कि एक फिल्म थी नास्तिक एक फिल्म थी अमिताभ बच्चन की थी और उस उस फिल्म को प्रमोद चक्रवर्ती डायरेक्ट कर रहे थे और उसका जब मुहूर्त था तो उस मुहूर्त में अमिताभ बच्चन नहीं आए वो कहीं बाहर थे और उस मुहूर्त पे अमिताभ बच्चन ने एक टेप रिकॉर्डर में अपनी आवाज रिकॉर्ड करके भेजी थी और उस मुहूर्त पे उस आवाज को प्ले किया गया और जब अमिताभ बच्चन की आवाज प्ले हुई वहां पे तो सबने बड़े ध्यान से सुना और उनकी बातों को बहुत ही बिल्कुल पेनड्रॉप साइलेंस था और

जो भी अमिताभ बच्चन उस टेप रिकॉर्डर में बोल रहे थे वो सब सुन रहे थे। तो सलीम जावेद दोनों को लगा कि यार सिर्फ अमिताभ बच्चन की आवाज से ही अगर इतनी इंटरेस्ट लोग लोगों में जग गई है कि लोग वो क्या बोल रहे हैं सुन रहे हैं तो एक अगर ऐसी फिल्म बनाई जाए जिसमें कि हीरो दिखाई ना दे सिर्फ उसकी आवाज हो तो ये एक नया कांसेप्ट होगा अलग सा होगा और इसे हम साइंस फिक्शन की तरह बनाएंगे। यह बात मैं मिस्टर इंडिया की कर रहा हूं। तो सलीम जावेद ने सोचा कि यह इस आईडिया को लेकर के हम लोग अमिताभ बच्चन से मिलते हैं। और ये जो है ये बात मैं बता रहा हूं कि ये जो पूरी चीजें हुई थी ये एक मराठी बुक है। यही रंग यही धूप इसे लिखा था जर्नलिस्ट अनीता पांडे ने। उन्होंने इस बुक को लिखते समय सलीम खान से इंटरव्यू भी लिया था और फिर उनसे बहुत डिटेल में बात की थी। तो सलीम खान ने बताया कि ये मिस्टर इंडिया का जो पूरा मामला था वो क्या था? हुआ यह कि जैसा मैंने बताया कि आवाज सुना और अमिताभ की आवाज सुन के उस मुहूर्त पे इन दोनों ने सोचा कि हमें एक फिल्म बनानी है, लिखनी है जिसमें सिर्फ हीरो की आवाज होगी वो हीरो दिखाई नहीं देगा। ये दोनों गए अमिताभ बच्चन के पास और कांसेप्ट समझाया। अमिताभ बच्चन ने कहा कि नहीं उन्होंने फिल्म करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि नहीं मेरी आवाज ठीक है वो है लेकिन लोग मुझे देखने आते हैं सिनेमा हॉल में और अगर मैं नहीं रहूंगा तो लोगों को पसंद नहीं आएगा और यह मेरे इमेज के साथ नहीं जाएगी फिल्म। तो यह बात जब कही अमिताभ बच्चन ने कहा उसके बाद फिर सलीम जावेद वापस आने लगे उनके घर से तो रास्ते में जावेद अख्तर ने सलीम खान से कहा कि अब आज के बाद हमें अमिताभ बच्चन के साथ काम नहीं करना चाहिए क्योंकि उसने एक तरह से हमारा इंसल्ट किया है। हमने ही उसे बनाया है। एंग्री यंग मैन उसे हमने ही बनाया था और आज वह हमें ही इंकार कर रहा है। सलीम खान ने इसके जवाब में जावेद अख्तर से कहा कि नहीं वह एक स्टार है और वह विद इन ह राइट ही कैन से कि भाई उनको चूस करने का हक है। अगर वो कन्विंस नहीं है तो ठीक है हम किसी और हीरो के साथ काम कर लेंगे। लेकिन वो यह नहीं कहे कि आज के बाद हम कभी अमिताभ बच्चन के साथ नहीं काम करेंगे। यह प्रोफेशनलली गलत होता। ये बात सलीम खान ने जावेद अख्तर को कही। और यह बात सलीम खान ने इंटरव्यू में भी उस बुक में बताया। उसके बाद क्या हुआ? कुछ दिन के बाद होली पार्टी थी। अमिताभ बच्चन के घर पे। वहां पे सलीम खान नहीं गए वहां जावेद अख्तर गए थे उस वाली पार्टी में और जावेद अख्तर ने अमिताभ बच्चन से यह कह दिया कि सलीम खान कह रहे हैं कि अब हमें हमें यानी सलीम जावेद को अमिताभ के साथ काम नहीं करना चाहिए। ये बात अमिताभ को बुरी लगी और फिर यह बात फैल गई कि ऐसा-सा सलीम खान ने कहा है। और यह जब फैल गई बात तो समहऊ किसी से होते-होते सलीम खान के कान में पड़ी कि ऐसा जावेद ने कहा है मेरे बारे में। जबकि मैंने तो बोला भी नहीं था। मैंने तो यही कहा था कि हमें करना चाहिए। जबकि यह प्रपोजल तो जावेद का था। तो इस बात से सलीम खान नाराज थे। और उन्हीं दिनों क्या हुआ? 21 जून 1981 को सलीम खान गए जावेद अख्तर के जूहू में उनका घर है। वहां गए।

किसी प्रोजेक्ट से रिलेटेड बात कर रहे थे। सुबह में गए और शाम तक वहां पे ब्रेन स्टार्मिंग हुई। प्रोजेक्ट जो भी जो जिस भी कहानियों पे वो लोग काम कर रहे थे। उस पर बातवात हुई। उसके बाद शाम को जावेद अख्तर ने कह दिया उनसे कि हमें लगता है कि अब हमें अलग-अलग काम करना चाहिए। तो सलीम खान ने जावेद अख्तर से कहा कि थोड़ा सा तो उन्हें शॉक लगा ही ऑब्वियसली। उन्होंने कहा कि अगर तुम यह बात कह रहे हो तो तुम बहुत सोच समझ के कह रहेगे और अगर तुम यह बात कह रहे हो और तुमने सोच समझ के कहा है तो फिर मैं कुछ भी कहूंगा तो तुम उस बात को मानोगे नहीं। तो अगर तुमने डिसीजन ले लिया है कि हमें साथ नहीं काम करना है तो मैं तुम्हारे डिसीजन का रेस्पेक्ट करता हूं। ठीक है? लेट्स प्लेट। सिर्फ इतनी बात हुई। उसके बाद फिर सलीम खान जाने लगे। तो जब वो उठे और जाने लगे तो हर रोज की तरह जब भी सलीम खान आते थे जावेद अख्तर के पास राइटिंग वाइटिंग के लिए। उसके बाद जब जाते थे तो जावेद अख्तर उन्हें बाहर गाड़ी तक छोड़ने जाते थे। तो उस दिन भी जब उन्होंने कहा कि ठीक है चलो स्प्लिट कर जाते हैं। उसके बाद सलीम खान जैसे ही जाने लगे तो जावेद अख्तर फिर उन्हें उनकी गाड़ी तक छोड़ने के लिए आगे बढ़े। तो सलीम खान ने कहा कि नहीं मुझे अब अकेले जाने की आदत डालनी चाहिए। अब मुझे तुम्हारे साथ की जरूरत नहीं है। और उसके बाद वो ये डेट जो मैंने बताया कि 21 जून 1981 को ये चीज हुआ था। ये बात ये सलीम जावेद ने ही सलीम खान ने ही इनफैक्ट बताया था मीडिया में। उसका रीजन भी है। वो डेट उन्हें क्यों याद था? वो इसलिए था क्योंकि उस दिन हेलेन जो उनकी वाइफ जो थी उनकी मदद की तबीयत बहुत खराब थी और सलीम खान को उनकी मदद से मिलने जाना था और शाम होते-होते उसी दिन क्या हुआ कि हेललेन की मां की डेथ हो गई। तो सलीम खान एक तो जावेद अख्तर से स्प्लिट हो के आए ही थे। उसके बाद फिर घर पहुंचे। फिर यह हो गया कि उनकी मदद की डेथ हो गई है हेलेन की। तो यह इन सब चीजों में बिजी हो गए। फ्यूनरल और फिर जो भी पोस्ट डेथ दो भी जो भी चीजें होती है उनमें वो बिजी हो गए। जहां एललेन की वहां रहती थी वहां लेके चले गए उन्हें और जो भी पूरा क्रियाक्रम जो होता है वो सब करने के बाद तो वो बॉम्बे से बाहर थे। इस बीच क्या हुआ कि जावेद अख्तर ने ये बात मीडिया को बता दी कि हम अब अलग हो गए। तो ये बहुत कि सलीम जावेद का स्प्लिट हो गया। ये बातें पूरी इंडस्ट्री में फैल गई। अब सलीम खान तो बिजी थे उधर फ्यूनरल और वो सब चीजों में क्रियाक्रम में। उसके बाद जब वो वापस बॉम्बे आए तो इनका फोन खूब बजने लगा और सब सवाल पूछने लगे तो ये थोड़े शॉक भी हो गए कि अरे यार ये बात मीडिया में कैसे चली गई? तो इनको इस बात का बुरा लगा।

अब इन्हीं दिनों क्या हुआ कि जो स्प्लिट हुआ उसको जावेद अख्तर ने बड़े स्मार्टली हैंडल किया क्योंकि वह ऑलरेडी बहुत सारे प्रोड्यूसर डायरेक्टर के साथ लिरिक्स अपने सॉन्ग राइटिंग के प्रपोजल को लेकर के बात कर रहे थे तो बहुत सारे डायरेक्टर और प्रोड्यूसर ने इन्हें साइन कर लिया था। जैसा मैंने पहले ही वीडियो बनाया बेताब के लिए या सागर के लिए रमेश सिप्पी यश चोपड़ा सब इनके साथ काम कर ले उस वक्त सब ने इनको हायर कर लिया था। सलीम खान से अभी तक किसी की बात नहीं होती क्योंकि सलीम खान तो किसी और चीज में बिजी थे। जब वापस आए और ये जब पता चला कि अरे जावेद तो दूसरे दूसरे के साथ काम करना भी स्टार्ट कर दिया है और मेरे से अभी सब लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या हुआ? आप कैसे अलग हो गए ये वो करके तो उस वक्त सलीम खान राइट स्टेट ऑफ माइंड में नहीं थे। तो वो क्या हुआ कि सलीम खान एक ब्रेक लेकर के लंदन चले गए कि मुझे अभी थोड़ा अपने आप को संभालना है और मैं अभी इस कचरे से बाहर निकलना चाहता हूं। तो वो लंदन चले गए हेललेन को लेकर के। लंदन में कुछ दिन तक थे वो एक दो साल। वहां पे इनकी लाइफ ठीक-ठाक चल रही थी। वो हसल से दूर थे और फिर एक दिन क्या हुआ कि किसी ने लंदन में ही उन्हें सलीम खान ना कह करके उन्हें हेललेन का हस्बैंड बताया कि ये जो है ये हेललेन के हस्बैंड है। तो ये बात सलीम खान को लगी कि अरे यार लोग मेरी पहचान भी भूल गए क्या कि मैं सलीम खान हूं और मुझे अब हेलेन का हस्बैंड कह करके संबोधित किया जा रहा है। तो उन्होंने डिसाइड किया कि नहीं अब टाइम आ गया लंदन वापस बॉम्बे वापस लौटना है और फिर से काम स्टार्ट करना है। तो वापस आए बॉम्बे। वापस मुंबई आने के बाद उन्हें लगा कि मैं वापस आऊंगा तो प्रोड्यूसर डायरेक्टर आ जाएंगे जैसे पहले भी आते थे मेरे घर पे काम के लिए लेकिन इंडस्ट्री बदल गई थी उन उस बीच में। तो जब वापस आए तो कोई इनसे ना बात करे ना कुछ। तो एक सलमान खान ने एक बात यह बात कही थी एक इंटरव्यू में कि वो ऐसा टाइम था कि जब सलीम जावेद साथ में काम करते थे तो हमारे घर का फोन हमेशा बजते रहता था और रात को जब पापा जो उनके फादर है सलीम खान वो जब भी अपना ड्रिंक्स वगैरह बनाते थे तो वो फोन के रिसीवर को उठा के नीचे रख देते थे कि अब कोई फोन ना करे डिस्टर्ब ना करे और उसके बाद एक ऐसा टाइम आ गया कि जब इनकी फोन की घंटी बजती ही नहीं थी और बार-बार फोन उठा के चेक करते थे सलीम खान कि यार ये फोन खराब तो नहीं हो गया तो बहुत ही थोड़ा टफ टाइम था। फाइनशियली भी उस वक्त क्योंकि पैसे नहीं आ रहे थे। काम नहीं था तो और सलमान और अरबाज उस वक्त काम करना स्टार्ट भी नहीं किया था।

तो थोड़ा टफ टाइम से सलीम खान गुजर रहे थे। उधर जावेद अख्तर ने कहानियां भी लिखनी चालू चालू कर दी थी और लिरिक्स भी लिखना चालू कर दिया था। इस बीच में कुछ-कुछ इंटरव्यूज हुए कि सलीम खान ने भी मीडिया से बात की। जावेद अख्तर ने कभी भी हालांकि इन दोनों ने एक दूसरे के बारे में कुछ उटपटांग बातें नहीं की। एक इंटरव्यू था उसमें सलीम खान ने दिया था। ये अ स्टार डस्ट को इंटरव्यू दिया था। उसमें सलीम खान ने कहा था कि द बिटर हाफ कॉन्फ्रेंस आवर स्पिरिट वाज़ नॉट म्यूचुअल। हम दोनों ऐसे मतलब ये सोच के एक दूसरे से अलग नहीं हुए थे और दोनों का वो कलेक्टिव डिसीजन नहीं था। डिसीजन जो है वो जावेद का ही था। मैं मैंने प्रपोज नहीं किया था। ये सारी बातें थी। और पहले तो सलीम खान ने बोला भी कि नहीं कोई बात नहीं अच्छा है हम दोनों आज भी फ्रेंड हैं। फिर कुछ दिन के बाद एक और इंटरव्यू उसमें थोड़ा सा उन्होंने बोला कि मैं पैच अप भी नहीं करना चाहता जावेद अख्तर से और जो है वो सो है और मुझे इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। उसके बाद लेकिन क्या हुआ कि सलीम खान को काम की तलाश थी और अच्छे अच्छे प्रपोजल इनके पास आ नहीं रहे थे। तो उस बीच में नाम फिल्म के लिए महेश भट्टिन से मिले। उनके पास जो कहानी थी दो भाइयों की उसका स्क्रीन पर लिखवाने के लिए महेश भट्ट राजेंद्र कुमार आए सलीम खान से मिलने क्योंकि उन्हें पता था कि सलीम खान भी कुछ अच्छा लिखना चाह रहे हैं इस समय क्योंकि उनके पास अभी काम नहीं है और वो अपने आप को प्रूफ करना चाहते हैं तो महेश भट्ट राजेंद्र कुमार और कुमार इनके पास आए और बोला कि भाई एक कहानी है ऐसी स्क्रीन पे लिखने के लिए और जो स्टोरी थी इनके पास महेश भट्ट की उसको बहुत अच्छे से ट्विस्ट करके इन्होंने नाम की कहानी लिखी और नाम फिल्म जब बनी तो हिट हुई और उसने एक तरीके से सलीम जावेद को दोबारा से एक नई जिंदगी दिए गए कि अभी भी मैं हूं कुछ और यह नहीं है कि हमारा जो पेयर था क्योंकि उस दौरान 81 से लेकर के 85 के बीच में जावेद अख्तर की कुछ फिल्में आ भी गई थी। ऐसे बेताब हिट हो गई थी। अर्जुन हिट हो गई थी। सागर बन चुकी थी। मेरी जंग आ चुकी थी। हालांकि मशाल भी आई थी। तो ये सब तो जावेद अख्तर के तो काम चल रहे थे।

सलीम खान बिल्कुल ही आउट ऑफ मार्केट थे। तो जब नाम से एक तरह का कमबैक किया सलीम खान ने तो सबको लगा कि नहीं चलो ठीक है अलग-अलग भी दोनों अच्छा काम कर सकते हैं। लेकिन ये जो काम जो था ये बहुत ज्यादा इनका ज्यादा मतलब कंटिन्यू नहीं कर पाया क्योंकि उसके बाद जितनी भी कहानियां इन दोनों ने लिखी सागर के बाद आप समझ लो तो जैसे या नाम के बाद सलीम खान ने जितनी भी फिल्में लिखी सब फ्लॉप ही रही। उधर अर्जुन और सागर के बाद जितनी फिल्में जावेद अख्तर ने लिखी वो सब के सब फ्लॉप होने लगी। डकैत भी नहीं चली। मैं आजाद हूं नहीं चली। और भी बहुत सारी फिल्में थी। सलीम खान की भी जितनी फिल्में थी तूफान लिखी इन्होंने वो नहीं चली। अकेला लिखी वो नहीं चली। और मतलब एक क्रिटिक्स भी कहने लगे कि लगता है शायद इनका मैजिक खत्म हो चुका था। और अगर ये लोग अगर साथ में भी रहते तो कुछ बहुत कमाल के लिए कहानियां ये लोग नहीं लिख पाते 80 के दौर में। हालांकि अमिताभ बच्चन का मानना कुछ अलग था क्योंकि इनके स्प्लिट से सबसे ज्यादा जो अफेक्ट जो प्रॉब्लम हुई थी वो अमिताभ के करियर को हुई थी क्योंकि इन दोनों ने ही मिलकर के एंग्री यंग मैन को क्रिएट किया था और इनके स्प्लिट के बाद अमिताभ बच्चन ने जितनी फिल्में की वो जादू नहीं कर पाई जो कि 70ज में होती थी। आपको याद ही होगा जितनी भी फिल्में आई थी ये अजूबा अकेला जादूगर तूफान और कौन-कौन सी दुनिया भर की आज का अर्जुन इंद्रजीत तो उनको उनको भी अच्छी कहानियां नहीं मिल रही थी। तो और ये अमिताभ बच्चन ने कहा कि इट वास अ बिग लॉस फॉर मी इनफ कि सलीम जावेद अलग हो गए। अब नस्टाल्जिया जिनको जाता है वो तो कहते अरे नहीं नहीं सलीम खान जावेद एक साथ रहते तो अच्छी-अच्छी कहानियां आती लेकिन जिस तरीके की कहान

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