[संगीत] उनका जन्म पटना में हुआ था 1949 में किंतु उनका परिवार काशी का रहने वाला था और वो काशी में ही पली पढ़ी। [संगीत] उनका भी बचपन ही था कि पिता का देहांत हो गया। पढ़ने लिखने में उनका मन नहीं लगता था। प्रायः शीशे के सामने खड़ी होकर स्वयं को निहारती रहती थी। तंग आकर उनकी मां ने उनसे पूछा वो करना क्या चाहती है? उन्होंने डरतेडरते उत्तर दिया वो नृत्य सीखना चाहती है। [संगीत] उनकी मां उन्हें कबीर चौरा जहां बड़े-बड़े कलाकार रहते थे। तबला वादक, गायक, नर्तक आदि आदि वहां ले गई महान तबला वादक पंडित किशन महाराज के घर। कुल मिलाकर यह कि वह कथक नृत्य में दक्षता प्राप्त करने की दिशा में निकल पड़ी। कालांतर में उन्हें बॉलीवुड की डांसिंग क्वीन भी कहा गया। पद्मा खन्ना ने मुंबई में प्रसिद्ध कथक डांसर गोपी कृष्ण के साथ अनेक स्टेज शोज़ किए।
गोपी कृष्ण बॉलीवुड में एक बड़े नृत्य निर्देशक थे। यादें नई पुरानी में आपका स्वागत है। हम हाजिर हैं किस्से पुराने यादें पुरानी लेकर। मैं हूं देवेश्वर। पद्मा खन्ना की पहली फिल्म थी गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ाइबो जो 196263 में आई। पहली भोजपुरी फिल्म जिसने बहुत नाम और बहुत पैसा कमाया था। इस फिल्म के निर्माण में ₹ लाख खर्च हुए थे और इससे जो आय हुई वो थी 7580 लाख। आप अनुमान लगा सकते हैं कि कितनी बड़ी हिट थी यह फिल्म। कोलकाता में इसने सिल्वर जुबली की थी। खैर हम बात कर रहे हैं पद्मा खन्ना की। गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ाइबो में पद्मा खन्ना का पर्दे पर जो नाम आया था वो था कुमारी पद्मा। उस समय वो 12 13 साल की लड़की थी। इसके पश्चात उन्होंने चारप और फिल्मों में काम किया और फिर 1970 में एक फिल्म आई जिसमें उन्होंने एक डांस वाले गाने से सनसनी फैला दी। [संगीत] इस गाने में उनकी सुंदरता, उनकी कमनीयता और एक्टिंग ने लोगों के अंदर उत्तेजना का, चाहना का ऐसा बवंडर उठाया कि बहुतों ने तो केवल उनके इस डांस और गाने के लिए जॉनी मेरा नाम दो-दो तीन-तीन बार देखी। [हंसी] आप जान गए होंगे कि मैं पद्मा खन्ना के किस डांस और गाने की बात कर रहा हूं।
हुस्न के लाखों रंग हुस्न के लाखों रंग कौन सा रंग देखोगे आग है ये बदन आग है [संगीत] ये बदन कौन सा अंग देखोगे कौन सा अंग देख लेकिन जॉनी मेरा नाम मैं उनके के इस सनसनीखेज प्रदर्शन के बाद जिसे देखो वही पद्मा खन्ना के पास इसी प्रकार की भूमिकाओं के प्रस्ताव लेकर आने लगा। [संगीत] जॉनी मेरा नाम से उन्हें जो प्रसिद्धि मिली वो तो उनके काम की थी मगर इसके बाद उन्हें टाइप कास्ट सा कर दिया [संगीत] गया। जैसा कि हमेशा होता है। इसके बावजूद पद्मा खन्ना ने फिल्मों में कई बहुत अच्छी सहायक भूमिकाएं की हैं। पर हां पर्दे पर उनके डांस और गानों पर उनके थिरकने की अदाओं की धूम बहुत अधिक थी। मैं यार मुझे था मैं यार [संगीत] मुझे था। तुझे होठों में छुपाया वो आईना। पद्मा खन्ना ने ना जाने कितनी फिल्मों में काम किया है। जिनके नाम गिनाना आवश्यक नहीं बल्कि मैं यहां उनसे जुड़ी कुछ रोचक कहानियां सुनाना चाहूंगा। 1973 में एक फिल्म आई थी दाग जो एक स्वतंत्र निर्माता निर्देशक के रूप में यश चोपड़ा की पहली फिल्म थी। रोमांस और ड्रामा से भरपूर इस फिल्म की अधिकतर शूटिंग शिमला और उसके आसपास के क्षेत्रों में की गई थी। [संगीत] कहा जाता है अपनी इस फिल्म में यश चोपड़ा ने शिमला के जाड़ों के मौसम का सौंदर्य और वहां के भारी हिमपात की भव्यता को जिस कुशलता से पर्दे पर उतारा है उसका दूसरा उदाहरण जल्दी नहीं मिलता। इसमें एक गाना है जिसे दो बंजारणें गाती है। पद्मा खन्ना इसमें मुख्य बंजारन थी और उनका साथ देना था एक और अच्छी डांसर लक्ष्मी छाया को। इसकी शूटिंग होनी थी चैल में। पद्मा खन्ना के पास बहुत डेट्स नहीं थी। उन्हें इस गाने की शूटिंग के बाद तुरंत लौटना था। शूटिंग की सारी तैयारी हो चुकी थी और तभी सूचना आई कि लक्ष्मी छाया का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया है और वो नहीं आ सकती।
इस फिल्म के डांस मास्टर थे सुरेश मेहता। उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या किया जाए। यश चोपड़ा अलग परेशान। शूटिंग टाली नहीं जा सकती थी। सारे बड़े कलाकार शूटिंग के लिए वहां तैयार थे। राजेश खन्ना, शर्मिला टैगोर और राखी जैसे कलाकार सब लोग बहुत तनाव में थे। पद्मा खन्ना के मन में एक विचार आया किंतु वो दुविधा में थी कि सुरेश मेहता से कहें या ना कहें। सुनकर सुरेश मेहता को एक बार तो विश्वास ही नहीं हुआ। यहां आपको बता दें कि जो भी डांस मास्टर यानी कोरियोग्राफर होते हैं उनके एक दो असिस्टेंट्स ऐसे होते हैं जो जबरदस्त डांसर होते हैं और डांस मास्टर अपनी कोरियोग्राफी की परिकल्पना को सबसे पहले उन्हीं पर उतारते हैं। अर्थात किसी डांस का उनका जो आईडिया होता है उसको मूर्त रूप देने का काम उनका यह विशेष असिस्टेंट करता है। सुरेश मेहता की इस विशेष असिस्टेंट का नाम था अरुणा जिन्होंने पद्मा खन्ना को यह डांस सिखाया था। पद्मा खन्ना ने सुरेश मेहता से कहा मास्टर जी मेरे साथ यह डांस अरुणा जी क्यों नहीं कर सकती? सुरेश मेहता ने कहा यू विल नॉट माइंड? पद्मा खन्ना ने कहा व्हाट व्हाई शुड आई माइंड? नहीं तुम पद्मा खन्ना हो। किसी अननोन आर्टिस्ट के साथ डांस पद्मा खन्ना ने कहा व्हाट रबिश अननोन आर्टिस्ट का क्या मतलब होता है यहां पिक्चर में वो भी एक बंजारन है और मैं भी एक बंजारन हूं पिक्चर में जो कलाकार होता है वो एक कैरेक्टर होता है ना तो मैं उसमें पद्मा खन्ना हूं और ना ही अरुणा जी उसमें अरुणा जी होंगी। यह सुनकर सुरेश मेहता बहुत प्रसन्न हुए। इसके बाद तो फिल्म की पूरी टीम खिल उठी। फिर किसी ने पद्मा खन्ना से पूछा वास्तव में आप करोगी अरुणा के साथ। पद्मा खन्ना ने कहा आप क्यों ऐसी बात कर रही हैं? मैं कौन सी ऐसी तुर्रम खान हूं कि वो हमसे अच्छा डांस करती है। अरुणा जी जैसे लोग परफेक्ट होते हैं। हम लोगों से चूक हो जाती है। मगर उनसे कभी कोई चूक नहीं होती। कोरि
योग्राफर अपनी कोरियोग्राफी को उनके माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। वे लोग हम आर्टिस्ट से बहुत बेहतर होते हैं। तो फिल्म दाग में नी मैंने यार मनाना नी में पद्मा खन्ना के साथ जो दूसरी डांसर नजर आती हैं वो है सुरेश मेहता की असिस्टेंट अरुणा मैं यार मनाना नहीं चाहे लोग बोलियां बोले मैं यार मनानी चाहे लोग बोलियां बोले मैं चाहे जहर साले घोले इस बीच पद्मा खन्ना से एक ऐसी फिल्म में काम करने का अनुरोध किया गया जिसमें उन्हें अज्ञात साथ रहते हुए अपनी नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन करना था। वो फिल्म थी पाकीजा जिसकी दोबारा शूटिंग एक लंबे अंतराल के पश्चात आरंभ हुई थी। यानी उस समय जब मीना कुमारी का स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता था और नृत्य के दौरान वो तेज या द्रुत गति से अंग संचालन करने में असमर्थ थी। किंत [संगीत] पद्मा खन्ना जैसी नवयुवती नृत्यांगना के लिए यह [संगीत] बाएं हाथ का खेल था। मीना कुमारी के लिए उनके हृदय में बहुत सम्मान था। इसलिए वह पाकीजा में डांस करने के लिए मान गई लोगों के मना करने के बावजूद। [संगीत] फिल्म के दो गानों के दौरान लगता है कि मीना कुमारी डांस कर रही हैं। मगर वो डांस पद्मा खन्ना कर रही हैं। तीर नजर देखे [संगीत] जख्म जिगर देखी। इन गानों में मीना कुमारी का चेहरा केवल वहीं नजर आता है जहां घूंघट उठता है। आज हम अपनी दुआ इन गानों की शूटिंग में पूरे एक महीने का समय लगा क्योंकि पद्मा खन्ना और भी फिल्मों में व्यस्त थी और वो गाने थे तीरे नजर देखेंगे जख्म जिगर देखेंगे और नजरिया की मारी पद्मा खन्ना ने बहुत सी फिल्मों में काम किया उन पर बहुत गाने फिल्माए गए। सबका उल्लेख करना संभव नहीं। उनकी एक और फिल्म जो बेहद मशहूर हुई थी वो थी 1973 में आई सौदागर जिसमें पद्मा खन्ना अमिताभ बच्चन के साथ मुख्य भूमिका में है।
इसमें उनके काम को बहुत सराहा गया। इस फिल्म में उनके ऊपर एक ऐसा गाना फिल्माया गया जो अत्यंत लोकप्रिय हुआ और आज भी है। इसे आशा भोसले ने गाया है। ला ला ला ला ला [संगीत] हम हम सजना है मुझे सजना के लिए सजना है मुझे सजना के [संगीत] लिए सजना है मुझे पद्मा खन्ना ने 1986 में फिल्म निर्माता जगदीश सिडना से विवाह करके घर बसा लिया 1987 में उन्होंने पहली बार टीवी के पर्दे पर कदम रखा और अपने अभिनय का लोहा बनवाया। इस टीवी सीरीज का नाम था रामायण जिसमें पद्मा खन्ना ने कैकई जैसे कठिन [संगीत] चरित्र को अपने अभिनय से जीवंत कर दिया था। इसके लिए उन्हें बहुत ख्याति मिली। 1996 में वो पूरे परिवार के साथ अमेरिका जाकर बस गई। मगर वहां भी उन्होंने अपने टैलेंट और परिश्रम करने की क्षमता से मुंह नहीं मोड़ा। अपने पति के साथ मिलकर उन्होंने न्यू जर्सी में इंडियानिका डांस एकेडमी खोली। जहां नृत्य और अन्य शास्त्रीय विधाओं की शिक्षा दी जाती है। उनके इस काम [संगीत] को आज उनके बच्चे पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। आज पद्मा खन्ना आयु के उस पड़ाव पर हैं जहां पहुंचकर हर किसी का जीवन सिमटता जाता है। सिमटते-सिमटते विलीन हो जाने तक [संगीत] लाखों रंग जी हां हुस्न के लाखों रंग पेश करने वाली पद्मा खन्ना अब 77 वर्ष की हो चुकी हैं। हमारे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए, वीडियो को लाइक और शेयर भी कीजिए। हम लेकर आते रहेंगे और भी रोचक किस्से, रोचक यादें। नमस्कार। [संगीत] [गाना गाने की आवाज़] ल [संगीत]