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आखिर क्यों अमिताभ बच्चन ने दिलीप कुमार के सामने एक्टिंग करने से साफ मना कर दिया था?

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क्या आप जानते हैं कि अभिनय की दुनिया के सबसे बड़े नाम दिलीप कुमार ने एक बार अमिताभ बच्चन के बारे में कुछ ऐसा कहा था जो सुनने में शायद थोड़ा कड़वा लगे लेकिन वो एक बहुत बड़ी सच्चाई थी। दिलीप साहब की अमिताभ के बारे में वो क्या बेबाक राय थी यह मैं आपको इस वीडियो के आखिर में बताऊंगी। फिलहाल बात करते हैं दोनों दिग्गज कलाकारों के आपसी रिश्तों की। कमाल करते हो तुम। अगर खुद नहीं समझ सकते तो कम से कम पूछ तो लिया करो। मुझे क्या फर्क पड़ता है? लेकिन मुझे फर्क पड़ता है। यह तो शायद हम सभी जानते हैं कि दिलीप कुमार ने प्रकाश मेहरा की जंजीर करने से मना कर दिया था। उनकी छोड़ी हुई वह फिल्म कैसे अमिताभ की झोली में आई और हिंदी सिनेमा का इतिहास कैसे बदल गई? यह भी हमने देखा है। लेकिन क्या आप जानते हैं दिलीप साहब ने जंजीर को मना क्यों किया था। कहानी सुनने के बाद उन्हें लगा था कि इंस्पेक्टर विजय के कैरेक्टर में कुछ खास नहीं है। सीधी सी कहानी है और पूरी फिल्म में बस उन्हें नाराज रहना है। कई साल बाद सलीम खान को दिए गए एक इंटरव्यू में दिलीप साहब ने माना कि जंजीर को छोड़ना उनकी भूल थी। एक छोटी सी भूल और उसकी इतनी बड़ी सजा। उन्होंने कहा मैं समझ ही नहीं सका उस किरदार को उसकी खामोश शक्ति को। मैंने बड़े-बड़े मुजरिमों को टूटते देखा है। मैं 1000 साल तक तुमसे पूछता रहूंगा और तुम्हें बताना होगा। बताना होगा बताना होगा। अमिताभ बच्चन का दिलीप कुमार कनेक्शन उनके करियर के शुरू होने से भी पहले का है। एक्चुअली बचपन का है।

जब वो छोटे थे तो अपने मां-बाप हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन के साथ मुंबई के एक होटल में उन्हें दिलीप साहब की एक झलक मिली थी। लेकिन दिलीप के इर्द-गिर्द इतनी भीड़ थी कि वह उनसे मिल नहीं पाए। बस दूर से ही देखकर रह गए। कई साल बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू के घर हुए एक जलसे में भी अमिताभ ने दिलीप साहब को करीब से देखा। लेकिन तब भी उनका ऑटोग्राफ नहीं ले सके जो उनकी दिली इच्छा थी। उस वक्त उन्हें क्या मालूम था कि वो अपने आइडल के साथ एक फिल्म में काम करेंगे। दिलीप कुमार ने पहली बार अमिताभ बच्चन का नाम सुना था अपने करीबी दोस्त एक्टर ओम प्रकाश से। यूसुफ जान एक नया एक्टर आया है। बहुत उम्दा। पहली बार कोई ऐसा देख रहा हूं जिसकी आंखों में तुम्हारे जैसी शिद्दत है। ओम प्रकाश ने उन्हें बताया और जब दिलीप कुमार ने अमिताभ का काम देखा तो उन्होंने भी माना कि इस नए लड़के में सचमुच कुछ बात है। उधर दिलीप साहब की गंगा जमुना देखने के बाद अमिताभ उनके इतने मुरीद हुए कि उन्होंने कई इंटरव्यूज में बताया कि मेरे लिए वो फिल्म एक्टिंग की मास्टर क्लास की तरह थी। मुझे सबसे ज्यादा हैरत यह हुई कि एक शख्स जो उत्तर प्रदेश का है ही नहीं। कैसे अवधी भाषा इतनी खूबसूरती से बोलता है। वाकई मेरे लिए वो फिल्म अल्टीमेट थी। ये छोकरी तो एकदम गैया हो गई। एक दिन हम बहुत लंबा चौड़ा सपना देखा रहा। देखा कि जाने कौन बात पे तेरी मेरी कोई झगझिग हो गई। हम और हमें गुस्से में आए कि

ना किचकिचाए के एक रपटा धर दिया तेरे और तू दाएं से इतनी दूर जाके गिरी। आगे चलकर सलीम जावेद ने जब दीवार लिखी तो उन्होंने माना कि दो भाइयों में दरार का आईडिया उन्हें गंगा जमुना से ही आया था। सलीम जावेद का दिलीप कुमार से इतना गहरा रिश्ता था कि एक दिन वह अमिताभ बच्चन को साथ लेकर दिलीप साहब के बंगले पर रात के 2:00 बजे पहुंच गए। बस उनसे मिलने के लिए। अमिताभ बताते हैं कि उन्हें ऐसा करने में बहुत संकोच हो रहा था लेकिन सलीम जावेद ने कहा कि दिलीप साहब बुरा नहीं मानेंगे। वह हमसे जरूर मिलेंगे और ऐसा ही हुआ। दिलीप कुमार गहरी नींद से उठकर नीचे आए और देर सुबह तक अमिताभ बच्चन और सलीम जावेद से बातें करते रहे। अमिताभ आज भी उस वाक्य को याद करके कहते हैं कि उनकी जिंदगी के सबसे यादगार लम्हों में से था। अपनी एक स्पीच में अमिताभ ने दिलीप साहब की तारीफ करते हुए एक बहुत ही खूबसूरत बात कही थी कि मुझे किसी ने पूछा कि आपको दिलीप कुमार की एक्टिंग क्यों इतनी पसंद है। मैंने इस पर काफी देर तक सोचा और फिर मुझे रियलाइज हुआ कि जब दिलीप कुमार कोई सीन करते हैं तो यह समझ में आता है कि उनसे बेहतर यह सीन चाहकर भी कोई एक्टर नहीं कर सकता और यही एज एन एक्टर उनकी महानता है। ये चूड़ी तो अब सुहाग की चूड़ी बनने वाली है। सपना क्या देखा है? सपने कभी-कभी उल्टे भी हो जाते हैं। तो तो और भी बढ़िया बात है। मैं तुझे लेने नहीं आऊंगा। तू मुझे लेने आ जाएगी क्यों? दिलीप साहब और अमिताभ बच्चन ने सिर्फ एक फिल्म में साथ काम किया। रमेश सिप्पी की शक्ति। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमिताभ ने इस फिल्म को करने से पहले साफ मना कर दिया था। जी हां। और इसका कारण था कि वह अपने आइडल दिलीप कुमार साहब के सामने खड़े होकर एक्टिंग करने से घबरा रहे थे। जब दिलीप कुमार ने यह बात सुनी तो उन्होंने खुद अमिताभ को फोन करके कहा कि इस रोल को करने से मना मत करो।

मैं तुम्हारे साथ काम करना चाहता हूं और तुमसे कुछ सीखना चाहता हूं। इस पर अमिताभ की आंखें भर आई और उन्होंने शक्ति को साइन कर लिया। 1982 की यह फिल्म आज बॉलीवुड की बेहतरीन इंटेंस मूवीज में शुमार होती है। डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब वो शक्ति का आखिरी सीन शूट कर रहे थे। वो एयरपोर्ट वाला जिसमें बाप अपने बेटे को गोली मार देता है तो दिलीप कुमार ने उनसे कहा था कि यह लड़का यानी अमिताभ कितना बढ़िया कितना नेचुरल एक्टर है। इसके साथ काम करके मुझे समझ आया कि यह कैसे इतने बड़े मुकाम पर पहुंचा है। इसकी मेहनत इसका डिसिप्लिन तो है ही काबिले तारीफ लेकिन उससे भी ज्यादा अमिताभ बच्चन को टेक्निक की समझ है। मैं भावनाओं में बह जाता हूं और एक्टिंग करते वक्त सिर्फ एहसास में खो जाता हूं। लेकिन वह कैमरा के लिए एक्टिंग करते हैं। तभी वह आज इस मंजिल पर हैं। अमिताभ बच्चन के रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति में? एक बार विक्की कौशल और किियारा आडवाणी आए थे। उन्हें अमिताभ बच्चन ने दिलीप कुमार से जुड़ा किस्सा सुनाया। अमिताभ ने बताया दिलीप साहब ने कहा था कि कोई भी डायलॉग मिले तो उसे अलग-अलग स्टाइल में बोल कर देखो। उससे एक कलाकार की हैसियत बाहर निकल कर आती है।

जैसे एक चित्रकार देखता है। इतना ही नहीं अमिताभ ने यह भी बताया कि दिलीप साहब को हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, गुजराती, तमिल, बंगाली समेत कई भाषाएं आती थी। क्या आप जानते हैं दिलीप कुमार ने अमिताभ को एक खत लिखा था जिसमें उन्होंने कहा, सायरा बानो के साथ मैंने तुम्हारी फिल्म ब्लैक देखी और उसका प्रीमियर देखने के बाद मुंह से शब्द नहीं निकले। कैसे तारीफ करूं तुम्हारी एक्टिंग की? काश इस फिल्म को ऑस्कर मिला होता। मेरा अपना ख्याल यह है कि अगर हिंदुस्तान में कोई एक ऐसा एक्टर है जिसे ऑस्कर मिलना चाहिए तो वह तुम हो। अमिताभ के लिए यह खत किसी अवार्ड से कम नहीं था क्योंकि इसके जरिए उन्हें ना सिर्फ अपने आइडल से तारीफ मिली बल्कि वो ऑटोग्राफ भी मिल गया जिसका उन्हें सालों से इंतजार था। लेकिन यह सब बहुत बाद की बातें हैं। एक इंटरव्यू ऐसा भी था जिसमें दिलीप कुमार ने बड़ी बेबाकी से अमिताभ बच्चन के बारे में कुछ ऐसा कहा था जिसे हम कड़वा सच कह सकते हैं। उन्होंने कहा था कि अमिताभ अपने आप में एक पूरे कलाकार हैं और वह कॉमेडी और ड्रामा दोनों को बखूबी निभा सकते हैं। लेकिन यह हिंदी सिनेमा का दस्तूर है कि एक बार एक कलाकार एक रोल में फिट हो जाए तो उसे उसी तरह की इमेज में बांधता चला जाता है। इसीलिए बेचारा अमित यानी अमिताभ बच्चन सिर्फ एंग्री यंग मैन और एक्शन हीरो की इमेज में फंस कर रह गए हैं। हां बेटा ठीक ही बोल रहा है तू। जब तेरी उम्र का मैं था ना मुझे भी ऐसी बातें करने का बड़ा शौक। जबकि उनमें राज कपूर जैसी खूबी है कि वह हर तरह के रोल कर सके। सच तो यह है कि बॉक्स ऑफिस की कमाई का बहुत छोटा हिस्सा ही

फिल्म बनाने वाले के पास पहुंचता है। इसलिए कलाकार चाहकर भी अपनी पूरी प्रतिभा नहीं दिखा पाता। यह बात दिलीप साहब ने एक वीडियो में कही थी जिसे आप YouTube पर ही देख सकते हैं। लिंक मैं डाल दूंगी डिस्क्रिप्शन में। यह इंटरव्यू देखकर मुझे ऐसा लगा कि दिलीप साहब जो खुद एक कंप्लीट एक्टर थे वो भी ट्रेजडी किंग के लेबल से बच नहीं सके। जबकि उन्होंने आजाद और राम और श्याम जैसी आउट एंड आउट कॉमेडीज में कमाल की परफॉर्मेंस दी थी। इधर आओ खाने में क्या भाई? आप खाने में मटन करी, मटन मसाला, मटन रोज मटन चाप, मटन बिरयानी, चिकन करी, चिकन मसाला, चिकन रोज चिकन चाप, चिकन बिरयानी, भेजा करी, भेजा मसाला साहब। क्या मांगता है? दो-दो प्लेट लाओ। ए दो-दो प्लेट सब जो कुछ हम बोला सबका दो-दो प्लेट यानी मटन करी मटन रोज मटन चाप मन बिरयानी चिकन करी चिकन रोज चिकन चाप चिकन भेजा करी भेजा मतलब सबका दो-दो प्लेट वो बकरे का आर्डर है ना ओहो भेजा भेजा उसका भी दो प्लेट और कुछ तो नहीं बनता है पर ये खा लेने दो फिर बोलेगा बेटा और कुछ है और कुछ नहीं है बवर्ती खाना खाली हो गया है मैंने यहां के लोगों से प्यार किया है और यहीं अपनी मोहब्बत को मिटते भी देखा है और मेरे देश में यही तालीम दी जाती है कि जिसे प्यार करो उसके लिए अपनी जान भी दे दो।

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