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मेलोनी और द्विशा शर्मा में एक बात कॉमन है !

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पीएम मोदी और इटली की पीएम जॉर्जिया मिलोनी एक फ्रेम में साथ के आए इंटरनेट क्रैश हो गया। मीम फैक्ट्री को रॉ मटेरियल मिल गया। ट्रोलर्स को मसाला मिल गया और एप्रिसिएशन क्रिटिसिज्म में बटे रिएशंस ने इस वीडियो को विजुअल ऑफ द डे बना दिया। प्राइम मिनिस्टर मोदी ब्रोट अ गिफ्ट अ वेरी वेरी गुड टॉपिक रोम से लेकर नई दिल्ली तक जब सोशल मीडिया मेलोडी मेलोडी के नारोंसे रील्स से और कॉमिक टाइमिंग से गुलजार था। ठीक उसी वक्त देश के भीतर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने यूपी से बयान दिया और पीएम मोदी को गद्दारकह दिया। जब ये आरएसएस के कार्यकर्ता आपके सामने आएंगे।

नरेंद्र मोदी की बात करेंगे। अमित शाह की बात करेंगे। उनसे आप सामने उनको कहो कि आपका प्रधानमंत्री गद्दार है। आपका होम मिनिस्टर है। आपका संगठन है। आपने हिंदुस्तान को बेचने का काम किया है। चलिए ये तो साफ है। कांग्रेस को मेलडी का स्वाद नहीं भाया या मेलडी के पुराने विज्ञापन की लाइन पर कहूं तो मेलडी चॉकलेटी नहीं लगी। लेकिन मसला यहां तक सीमित नहीं है। विपक्ष ने इसे तंज का जरिया बनाया।

ट्रोल्स ने इसे महज एक खूबसूरत महिला और मुस्कुराते प्रधानमंत्री के फ्रेम में समेट दिया। लेकिन जो लोग वैश्विक राजनीति की गहरी समझरखते हैं, वो जानते हैं कि यह सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं बल्कि द न्यू ग्लोबल ऑर्डर की वो कड़कती हुई तस्वीर है जिसने बीजिंग से लेकर वाशिंगटन तक के गलियारोंमें हलचल पैदा कर दी है। मैं ग्लोबल पॉलिटिक्स पर आगे जाऊंगी। लेकिन उससे पहले आज मैं एक सवाल आपसे पूछती हूं। । जॉर्जिया मेलोनी आपको पता है आज इनके बारे में कितनी भद्दी टिप्पणियां की गई हैं। कैसे-कैसे मीम बनाए गए हैं? मैं पढ़कर नहीं बता सकती आपको ऐसे कमेंट्स हैं जिसके जरिए इनको टारगेट किया गया। और ये सब किस लिए? क्योंकि पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी दो देशों के पीएम तय प्रोग्रामके हिसाब से मुलाकात करते हैं। वीडियो वायरल होता है और फिर उस परटिप्पणियां आती है। के परिश्रम ही सफलता की कुंजी है देता। आई डोंट नो। तो आज हर वो इंसान जो मोबाइल हाथ में लेकर बैठा है और कमेंट बाजी करके खुद को एंपावर्ड फील करता है। आज उसे खुद से सवाल पूछना चाहिए कि जॉर्जिया मेलोनी में आपको पहले क्या दिखता है? सुंदर चेहरे वाली महिला या फिर इटली की पीएम। आपका जवाब ही आज कचहरीके इस केस का फैसला होगा। क्योंकि एक महिला को देखकर आपका ज़हन किस तरह की टिप्पणियां प्रोसेस करता है, यह तय करता है। आपकी तरबियत क्या है? आपकी परवरिश क्या है? आप किस समाज से आते हैं? हैं

ट्वीशा शर्मा और जॉर्जिया मिलोनी। ये दोनों पर्सनालिटीज दो अलग-अलग देश काल परिस्थितियों में पली भड़ी हैं। लेकिन आज एक बात कॉमन है। एक महिला को देखने का समाज का नजरिया। एक महिला की कामयाबी को परखने का समाज का नजरिया। एक महिला को बदनाम करके चरित्र हनन करके अपना हित साधने का समाज का नजरिया। इन तीन पॉइंट्स पर आज चाहे भोपाल की ट्विषा शर्मा हो या इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ये दोनों एक हैं। एक तरफ पौधे अच्छे लगते हैं। एक तरफ बच्चे अच्छे लगते हैं लेकिन पौधों की देखरेख नहीं करना है। बच्चे नहीं पैदा करने हैं। एंड मुझे कुकिंग भी अच्छा लगता है लेकिन कुकिंग में अगर बोलो। सोचिए साल 2026 में एक पढ़ा लिखा हाईली एजुकेटेड परिवार जो खुद जज रह चुकी हैं महिलाएं हैं वो अपनी मर चुकी बहू के लिए जो बातें कह रही हैं जिसमें एक लाइन का अफसोस दुख तकलीफ नहीं झलकती कितनी पॉसिबिलिटीज थी त्व्विशा में सोचिए लेकिन वो पॉसिबिलिटीज 5 महीने की शादी के बाद सुसाइड पर खत्म हो गई।

ससुराल और समाज को त्व्विशा की कामयाबी से उतना मतलब नहीं था जितना इस बात से मतलब है कि वो पूजा पाठ करती है नहीं करती है खाना बनाती है या नहीं बनाती है उनकी बात सुनती है या नहीं सुनती है मतलब सो कॉल्ड वो संस्कारी लगती है या नहीं इन पैराटर्स पर अगर बेटियां और बहुएं तोली जाएंगी तो एक बात तो तय है कि वो जॉर्जिया मेलोनी नहीं बन पाएंगी बेटियों के हक पर बात करना बहुत आसान है लेकिन समाज के स्टीरियोटाइप तोड़ने के क्या आप तैयार हैं?

आज यह सवाल खुद से भी पूछना जरूरी है क्योंकि जॉर्जिया मेलोनी शानदार व्यक्तित्व की धनी है। इससे किसे इंकार है? लेकिन जॉर्जिया मेलोनी कैसे इटली की पहली महिला पीएम बनीऔर क्यों आयरन लेडी की तरह देखी जाती हैं? और दुनिया के बड़े-बड़े धुरंधरों को कैसे अपने अंदाजमें जवाब देती आई हैं। अगर यह आपको नहीं पता तो वाकई आपने कूटनीति की दुनिया का एक दिलचस्प अध्याय मिस कर दिया है।है फ्रॉम द मेलोडी टीम मेलोनी का यह रुतबा उन्हें चांदी की चम्मच के साथ पैदा होने से नहीं मिला। उनका बचपन स्ट्रगल्स में बीता है। रोम के बेहद साधारण कामकाजी इलाके गारबाटेला में पली बढ़ी मेलनी को उनके पिता ने बचपन में छोड़ दिया था। सिंगल मदर ने पाला है उन्हें। पेट पालने से लेकर पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए मेलन ने एक नाइट क्लब में बार टेंडर का काम किया।

नैनी बनी शादियों में सामान तक बेचा। वो लड़की जो कभी लोगों को सर्वकरती थी, उसने महज 15 साल की उम्र में राजनीति के कड़े दलदल में कदम रखा। लेकिन घबराई नहीं, झुकी नहीं। अपनी बेबाक आवाज के दम पर वो इटली की सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनी और फिर साल 2022 में वो कर दिखाया जो इटली के इतिहास में कभी नहीं हुआ। वो देश की पहली महिला प्रधानमंत्री चुनी गई। तो फर्श से अर्श तक यह सफर मेलनी की फौलादी इच्छाशक्तिकी कहानी कहता है। राजनीति के पुरुष प्रधान गढ़ को तोड़कर जब मेलनी सत्ता के शीर्ष पर पहुंची तो विरोधियों ने उनकी काबिलियत से ज्यादा उनकी सुंदरता पर बात की। कुछ नेताओं ने उन्हें हल्के में लेने की कोशिश की।

लेकिन मेलन ने अपनी खूबसूरती को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। जो नेता उनकी सुंदरता पर टिप्पणी [संगीत] करते हैं या सिर्फ सिर्फ एक महिला के चश्मे से उन्हें देखते हैं। मेलनी उन्हें सरेआम ऐसा करारा जवाब देती हैं कि सामने वाला परेशान हो जाए। सोई जॉर्ज सोना मुहैर सोना मार सोई दलियाना सोई क्रिसियाना। मेलोनी की रीड कितनी मजबूत [संगीत] है इसका अंदाजा हाल की एक घटना से लगाया जा सकता है। जब गाजा सहायता फ्लोटिला के इतालवी कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार का वीडियो सामने आया तो मैलोनी ने बिना किसी दबाव के इजराइल के कड़े रुख के सामने साफ कह दिया कि यह मानवीय गरिमा का उल्लंघन है जिसे इटलीकभी बर्दाश्त नहीं करेगा। यह एक ऐसी नेता की तस्वीर है जो अपने देश के नागरिकों के सम्मान के लिए किसी भी ग्लोबल पावर से टकरा सकती [संगीत] है। मेलोनी सिर्फ मुस्कुराना नहीं जानती। वो आंखें मिलाना जानती हैं।

जब यूक्रेन को लेकर पूरी दुनिया बटी हुई थी तब मेलनी ने यूरोपीय संघ के कई बड़े देशों के दबाव के बावजूद यूक्रेन का खुलकर समर्थन किया। अपनी शर्तों पर उन्होंने इटली के राष्ट्रीय हितों को ऊपर रखा और यह कह दिया कि अपने हितों से हम समझौता नहीं करेंगे। दुनिया के बड़े-बड़े देश चीन के कर्ज के जाल और उसके दबदबे से डरते हैं। लेकिन मेलोनी ने सत्ता में आते ही साफ कर दिया कि इटली चीन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बीआरआई से बाहर निकलेगा। शी जिनपिंग के सामने झुकने से इंकार कर दिया।

यह एक बेहद टफ और रिस्की फैसला था जो सिर्फ एक ताकतवर लीडर ले सकता है। आज इमैनुअल मैक्रोन फ्रेडरिकमर्ज जैसे नेता जब यूरोपीय पॉलिसीज पर बात करते हैं तो उन्हें मेलोनी की राय को सबसे आगे रखना पड़ता है। मेलोनी ने अवैध प्रवासन के मुद्दे पर पूरे यूरोप को अपनी लाइंस पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया और फिर ट्रंप और मैक्रोन के साथ उनके स्टिफनेस ने तो ग्लोबल हेडलाइंस को ट्रेंड करा दिया था। तो ये आपने पूरा सफर जो जॉर्जिया मेलोनी का देखा ये ये साबित करने के लिए काफी है कि अगर आप उन्हें सिर्फ खूबसूरत चेहरे खूबसूरत महिला के आईने में देख रहे हैं तो आप उनकी पर्सनालिटी के साथ नाइंसाफी कर रहे हैं और इसके साथ-साथ एक महिला जो अपने संघर्ष और अपने जबरदस्त सफर के आधार पर उस पद तक पहुंची है जहां पर वो यूरोप के प्रमुख चेहरों में से प्रमुख लीडरशिप में से एक है।

तो यह समझने में आपने कहीं ना कहीं कमी छोड़ दी और इसीलिए मैंने कहा कि अगर आपने मोदी और मेलोनी की मुलाकात को सिर्फ तंज या ट्रोलिंग [संगीत] तक सीमित कर दिया तो डिप्लोमेसी का एक अध्याय आपने मिस कर दिया। अब देखिए देश के भीतर जो मुद्दे हैं उन पर बात और उन पर सवाल ये दोनों अपनी जगह वाजिब है। लेकिन आज जिस अंदाज में राहुल गांधी ने पीएम पर टिप्पणी की वो भी कई सवाल खड़े करती है। पहले आप यह बयान सुनिए फिर मैं आगे [संगीत] की बात करूंगी। पता नहीं आपने आज मोदी जी का वीडियो देखा नहीं देखा

हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री इटली के प्रधानमंत्री को मेलोनी को मेलोडी टॉफी दिए हैं। तो आप सोचिए क्या जॉर्जिया मेलोनी को जो सफर मैंने आपको उनका अभी तक दिखाया [संगीत] सिर्फ एक रील बनाने वाली महिला के आईने में देखा जाना चाहिए। क्या ये इंसाफ है उनके व्यक्तित्व के साथ? राहुल गांधी कह रहे हैं कि पीएम मोदी उन्हें टॉफी खिला रहे हैं। एक टॉफी खिला रहे हैं। यह सब बातें अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमेसी की मेज पर कितनी हल्की साबित होती हैं। यह समझने के लिए आप देखिए इस एक वीडियो के बाद Parle कंपनी के शेयर ने शेयर बाजार में कैसे उछाल मारा क्योंकि बाजार सेंटीमेंट्स से प्रभावित होता है और कैंडी डिप्लोमेसी विपक्ष को पसंद आई हो या ना आई हो लेकिन उस पर बाजार ने तो रिएक्ट किया। हालांकि फिर यह अलग बात है कि इधर पीएम मोदी ने मेलोनी को मेलडी टॉफी गिफ्ट किया। उधर शेयर बाजार में Parle Industries का स्टॉक 5% के अपर सर्किट के साथ रॉकेट बन गया।

लेकिन इस शेयर का असली Parleg और मेडी बनाने वाली कंपनी से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं। वजह यह है कि Parle प्रोडक्ट्स ही वो कंपनी है जो यह टॉफी बनाती है। इसका असर शेयर बाजार में भी दिखा जहां Parle नाम से जुड़े हुए शेयर्स पर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी और Parle Industries के स्टॉक में तेजी [संगीत] देखने को मिली। बीएसई पर लिस्टेड Parle Industries LED के शेयर में आज 5% तक की तेजी देखी गई। Parle Industries LED एक अलग लिस्टेड कंपनी है जिसका बिजनेस रियलस्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर वेस्ट मैनेजमेंट रिसाइक्लिंग जैसे सेक्टर्स से जुड़ा हुआ है। वहीं Parle प्रोडक्ट्स एक एफएमसीजी [संगीत] दिग्गज कंपनी है जो बिस्किट कनफेक्शनरी और फूड बिजनेस से जुड़ी हुई है।

तो देखिए सेंटीमेंट ने कहां किस तरह से रिएक्ट किया शेयर मार्केट में। वो ये बताने के लिए काफी है कि इस वीडियो ने अपनी धमक किस तरह से दुनिया के शेयर मार्केट पर दिखाई। अब देखिए इसी तस्वीर के मैं दूसरे पहलू पर बात करती हूं। क्रिटिसिज्म की सीमा पार करने का एक उदाहरण नॉर्वे से भी मिला। इटली से पहले प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे ही गए थे। वहां के प्रमुख अखबार ने स्वागत करने की जगह अपनी घिनौनी और नस्लवादी मानसिकता का प्रदर्शन किया। इस अखबार ने पीएम मोदी का एक कार्टून छापा है जिसमें उन्हें एक सपेरे के रूप में दिखाया गया और बीन के आगे कौन नाच रहा है? सांप नहीं है। सांप की शेप में पेट्रोल या ईंधन जिससे भरा जाता है, उसका उस पाइप का नोज दिखाया गया है। कार्टून के साथ छपे लेख का शीर्षक था एक क्लेवर एंड स्लाइटली अनइंग मैन।

यानी एक चालाक और थोड़ा परेशान करने वाला आदमी। यह सीधे-सीधे 140 [संगीत] करोड़ भारतीयों के आत्मसम्मान पर चोट है। लेकिन नॉर्वे के नीति नियंता और वहां का मीडिया शायद यह भूल गया कि वो जिस भारत को सपेरों का देश दिखाकर उसका मजाक उड़ाने की कोशिश कर रहे हैं। वो भारत आज दुनिया में कितनी मजबूत [संगीत] स्थिति रखता है। याद करिए अक्टूबर 2022 जब स्पेन के अखबार लावेंगार्डिया ने भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था पर एक आर्टिकल लिखा था तो हेडलाइन में भारत को एक सांप और सपेरे के साथ दिखाया। यानी तरक्की भी देखनी है लेकिन चश्मा वही 19वींसदी का रखना है। इस सोच को पीएम मोदी ने करारा जवाब इससे पहले भी दिया है। साल 2014 में जब पीएम मोदी अमेरिका गए थे तब उन्होंने वहां के मंच से पश्चिमी मीडिया को कड़ा संदेश देते हुए कहा था कि एक वक्त था जब लोग सोचते थे कि भारत सांप सपेरों का देश है। लेकिन आज हमारा देश स्नेक चार्मर्स का नहीं बल्किमाउस चार्मर्स का देश बन चुका है जो कंप्यूटर के एक माउस से पूरी दुनिया को घुमा रहा है। अब इस कहानी के सबसे बड़े सच पर आते हैं।

नॉर्वे की कुल आबादी मात्र 55 लाख के आसपास है। यानी हमारे दिल्ली मुंबई के एक छोटे से हिस्से जितनी है। यह देश तेल बेचकर अमीर तो बन गया लेकिन सोच से आज भी गरीब है। [संगीत] आइए इन्हें बताते हैं कि जिस भारत को इन्होंने सपेरा कहा है उसकी हालिया उपलब्धियां क्या है जिन्हें हासिल करने में नॉर्वे को शायद अगले 20 साल भी कम पड़ जाएंगे। जिस वक्त नॉर्वे के कार्टूनिस्ट कागज पर सांप बना रहे थे। ठीक उसी वक्त भारत का चंद्रयान थ्री चांद [संगीत] के उस दुर्गम दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहरा रहा था। जहां पर अमेरिका, चीन और रूस जैसे सुपर पावर्स तक नहीं पहुंच पाए हैं। सपेरों का देश आज स्पेस की सुपर पावर बन चुका है। आज भारत का यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस पूरी दुनिया के लिए मिसाल है।

दुनिया के कुल रियल टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शंस का 46% अकेले भारत में होता है। नॉर्वे की पूरी आबादी पूरी पॉपुलेशन जो है ना नॉर्वे की जितने ट्रांजैक्शन भारत में हर दिन 10 मिनट में लोग चाय की एक lछोटी सी दुकान पर कर देते हैं उतने नॉर्वे में नहीं होते होंगे। जिस यूरोप के दम पर नॉर्वे उछलता हैउसी यूरोप के सबसे ताकतवर देश ब्रिटेन को पछाड़कर भारत दुनियाकी पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और बहुत जल्द तीसरे पायदान पर पहुंचने का सपना भी देखता है।

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