सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह तेरी आंखें झुकी झुकी तेरा चेहरा खिला यश चोपड़ा एक फिल्म बनाने जा रहे थे जिसमें वो अपने 23 साल के बेटे आदित्य चोपड़ा को संगीतकार के तौर पर लॉन्च करने वाले थे। लीड एक्टर एक्ट्रेस के रूप में शाहरुख खान और काजोल को साइन कर लिया गया था। अब संगीतकार की बारी थी। यश चोपड़ा ने जब आशा भोसले से संगीतकार पर सुझाव मांगा तो
उन्होंने नई नवेली म्यूजिक कंपोजर जोड़ी जतिन ललित का नाम सजेस्ट किया। तुझे देखा तो यह जाना सनम प्यार होता है दीवाना सनम। अगले दिन आशा भोसले जतिन ललित को यश चोपड़ा से मिलाने ले गई तो इन्होंने उनको अपनी बनाई दो धुनें सुनाई। पहली धुन थी मेरे ख्वाबों में जो आए और दूसरी मेहंदी लगा के रखना। मेहंदी लगा के रखना डोली सजा के रखना। दोनों ही धुन यश चोपड़ा के साथ उनके बेटे आदित्य चोपड़ा को
बेहद पसंद आई। इस वक्त तक जतिन ललित को फिल्म का नाम तक पता नहीं था। इस फिल्म के गीतकार आनंद बक्शी को जब पता चला कि संगीतकार के तौर पर जतिन ललित को लिया जाना है तो उन्होंने खासतौर पर इन दोनों भाइयों को बुलाकर कहा कि मेरा अनुभव कहता है कि यह बहुत अच्छी और कामयाब फिल्म बनेगी। इसीलिए इसमें अपना सब कुछ झोंक दो। साथ ही यह भी बताया कि इसमें लता जी गाने वाली थी। जिनकी गायकी के करोड़ों लोग दीवाने हैं और आपको उनसे गवाने का मौका मिल रहा है। गया है तुझको तो प्यार सजना कर ले तू मेरी बात सजना। आगे की बातचीत के लिए आदित्य चोपड़ा ने जब दोनों संगीतकार भाइयों को बुलाकर फिल्म की कहानी सुनाई
तो इससे प्रभावित जतिन ललित ने अपनी व्यस्तता के बावजूद फिल्म करने के लिए हामी भर दी और इतिहास रच डाला। यह फिल्म थी दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे जिसके कामयाबी की कहानी की चर्चा आज 30 साल बाद भी गाहे बगाहे होती है। ख्वाबों में जो आए आके मुझे छ रिलीज से पहले ही इस फिल्म के गाने सुपर डुपर हिट हो चुके थे। 20 अक्टूबर 1995 को फिल्म रिलीज हुई तो देश भर के सिनेमाघरों के बाहर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। फिल्म ना सिर्फ हिंदुस्तान बल्कि विदेश में रह रहे भारतीयों को भी खूब पसंद आई। जतिन ललित के संगीत ने इस फिल्म की कामयाबी में खासतौर पर बड़ी भूमिका निभाई और यह फिल्म आइकॉनिक बन गई। सा झूम लूं मैं। अरे ना रे ना रे ना जरा सा घूम लूं मैं। अरे ना रे ना रे ना। आ तुझे झूम लूं मैं। अरे ना रे बाबा ना। 1990 का दशक सचमुच संगीत
निर्देशक जोड़ियों के नाम रहा। जिन्होंने फिल्म संगीत पर अपना दबदबा बनाया और बॉलीवुड में संगीत की वापसी का श्रेय उन्हीं को जाता है। यह जोड़ियां थी आनंद मिलिंद, नदीम श्रवण और जतिन ललित। पहला नशा पहला [संगीत] हिंदी सिनेमा के इतिहास में हुस्नलाल भगत राम, कल्याण जी आनंद जी और आनंद मिलिंद के बाद जतिन ललित चौथी संगीतकार जोड़ी थी। जिसने 90 के दशक में अपने म्यूजिक से लोगों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना ली। के दरमियान दो प्यार दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे। जो जीता वही सिकंदर यस बॉस कुछ-कुछ होता है। जब प्यार किसी से होता है। प्यार तो होना ही था। जैसी फिल्मों में दोनों भाइयों के रचे सुपरहिट गानों का जादू लोगों के सिर झड़कर बोलता है। होना ही था प्यार तो होना ही था। जतिन ललित ने अगर किसी एक्टर की रोमांटिक हीरो की छवि को गढ़ने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई तो वो थे शाहरुख खान। 90 के दशक में पहला नशा और बाहों के दरमियां जैसे रोमांटिक गानों के जरिए जतिन ललित ने लोगों के दिलों में जगह बनाई। जिनमें वह वक्त की रफ्तार को सुस्त और धीमा करके एक्टर्स, दर्शकों और सुनने वालों को एक सपनों की सुनहरी दुनिया में ले जाते हैं। इसकी एक बानगी इस गाने में दिखती है। काश के हम होश में अब आने ना।
जतिन ललित ने करण जौहर की कुछ-कुछ होता है। कभी खुशी, कभी गम, और आदित्य चोपड़ा की मोहब्बतें, जैसी फिल्मों में अपनी सुरीली और सुनहरी धुनों से कभी प्यार का अंतरंगी एहसास जगाया, तो कभी दर्द और उदासी का अंतहीन दरिया बहाया। तुम पास आए, यूं मुस्कुराए। यह जतिन ललित के संगीत का ही जादू था कि दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे कि गाने एक वक्त किसी भजन आरती की तरह सुबह शाम घर-घर बजते थे। जाओ दिल दीवाने पूछूं तो मैं जरा अपने दिलकश संगीत के मिजाज और पर्दे पर शाहरुख खान और फिल्म डायरेक्टर अजीज मिर्जा के सहयोग से जतिन ललित अपने करियर के बुलंदियों पर थे। फिल्म यस बॉस के ज्यादातर गानों पर गौर करें तो इसमें अभिजीत भट्टाचार्य की आवाज ने शाहरुख खान के स्टारडम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। चांद तारे तोड़ लाओ सारी दुनिया। 90 के दशक में अपने संगीत से कामयाबी के शिखर पर पहुंचने वाली इस संगीतकार जोड़ी ने 2000 के शुरुआती सालों में मोहब्बतें, हासिल, चलते-चलते और फना जैसी तमाम फिल्मों में शानदार संगीत से लोगों का दिल जीता। आंखें खुली हो या हो बन दीदार उनका होता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि जतिन ललित बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर कैटेगरी में फिल्मफेयर अवार्ड के लिए 11 बार नॉमिनेट हुए। लेकिन हर बार इन्हें मायूस होना पड़ा। बेहतरीन और बेहद कामयाब संगीतकार जोड़ी होने के बावजूद ना तो इन्हें कभी कोई फिल्मफेयर मिला और ना ही कोई राष्ट्रीय पुरस्कार। क्या ऐसा किसी साजिश के तहत किया गया या फिर कोई और वजह थी जानेंगे इस पेशकश में आगे विस्तार से। हमको हम से चुरा लो। दिल में कहीं तुम छुपा लो। साल 2006 में फना के म्यूजिक की जबरदस्त कामयाबी के बाद हर जुबान पर इस फिल्म के गाने थे। लेकिन तभी एक ऐसी खबर आई जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। यह खबर थी एक संगीतकार के तौर पर जतिन ललित की जोड़ी टूटने की। ना जुदा होंगे हम कभी खुशी कभी। इस फैसले ने ना जाने कितने ही संगीत के दीवानों को मायूस कर दिया। 1991 में शुरू हुई दो सगे भाइयों की म्यूजिक कंपोजर जोड़ी साल 2006 में फिल्म फनाह के बाद अलग हो रही थी। इसकी वजह भी बहुत चौंकाने वाली है। बीवियों के पर्सनल झगड़े ने कैसे जतिन ललित के बेहद कामयाब प्रोफेशनल लाइफ को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। इसकी कहानी बहुत हैरान करने वाली है। जिसे जानेंगे इस पेशकश में आगे विस्तार से।
देखो ना देखो ना देखो ना। साथ ही बताऊंगी कि अपनी गलती का एहसास होने के बाद जब इन दोनों भाइयों ने साथ आने की कोशिश की तो क्यों इन्हें ना तो फिल्म इंडस्ट्री में पहले जैसी शोहरत नसीब हुई और ना ही काम हासिल हुआ। इन सारी बातों पर विस्तार से आने से पहले जान लेते हैं जतिन ललित के म्यूजिक कंपोजर बनने की शुरुआती कहानी। सिफारिश जो करता हमारी देता वो तुमको बता। जतिन ललित एक प्रसिद्ध संगीत घराने से ताल्लुक रखते हैं। हरियाणा के हिसार जिले के पीली मंदोरी गांव में मेवाती घराने के पंडित प्रताप नारायण के घर इनकी पैदाइश हुई थी। मेवाती घराने के दिग्गज पंडित जसराज इनके चाचा हैं। पंडित तेज नारायण के चार बेटे और तीन बेटियां हुई और सभी ने आगे चलकर संगीत और सिनेमा में खूब नाम कमाया। पिता प्रताप नारायण पंडित अपने सबसे छोटे बेटे ललित को छोड़कर बाकी सभी बच्चों को प्रशिक्षण देते थे। वह चाहते थे कि ललित पढ़ाई करें और संगीत से ईर किसी और क्षेत्र में करियर बनाएं। ललित के बड़े भाइयों विश्वजीत पंडित और जतिन को उनके पिता ने प्रशिक्षित किया था। साथ ही दोनों बेटियों सुलक्षणा पंडित और विजेता पंडित ने भी अपने पिता से ही संगीत की ट्रेनिंग ली और आगे चलकर जानीमानी अभिनेत्री और गायिका बनी और कई जुबली फिल्मों में अभिनय किया। वहीं विजेता पंडित दिग्गज एक्टर राजेंद्र कुमार के बेटे के साथ 1980 के दशक की पोस्टर गर्ल थी। विजेता पंडित ने बाद में संगीतकार आदेश श्रीवास्तव से शादी कर ली। बोले चूड़ियां बोले कंगना जतिन ललित के भाई और बहनें अपना करियर बनाने के लिए 70 के दशक में ही मुंबई आ गए थे। भाई विश्वजीत पंडित और बहनें सुलक्षणा पंडित और विजेता पंडित फिल्म इंडस्ट्री में अब तक खूब नाम कमा चुकी थी। जतिन पंडित ने पंचग्नि से अपनी बोर्ड परीक्षा पूरी की और संगीत की दुनिया में करियर बनाने के लिए मुंबई आ गए। यहां जतिन ने सबसे पहले लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के पिता राम प्रसाद प्यारेलाल से संगीत सीखा। सूरज हुआ मध्यम। चांद जलने लगा। ललित पंडित अपने भाई जतिन से उम्र में 9 साल छोटे हैं।
जतिन के साथ ही ललित भी मुंबई आ चुके थे। और यहां के सेंट लॉरेंस स्कूल में इनका दाखिला करा दिया गया। ललित पढ़ाई में बहुत अच्छे थे। घर में गीत संगीत और सिनेमा का माहौल होने के चलते यह भी म्यूजिक में दिलचस्पी लेने लगे। इसी वजह से चौथी क्लास के बाद पंचगनी के संजीवन विद्यालय नाम के एक बोर्डिंग स्कूल में भेज दिया। लेकिन स्कूल में भी ललित ने सिंगिंग और म्यूजिक में हिस्सा लेना शुरू कर दिया और एक बैंड भी बना लिया। दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद ललित मुंबई आ गए और अपने बड़े भाई जतिन से ड्रम और पियानो सीखने लगे। पैरों में बंधन पायल ने मचाया शोर। सब दरवाजे कर लो। ज्यादातर लोग इस बात से वाकिफ नहीं होंगे कि छोटे भाई ललित के साथ संगीतकार जोड़ी के तौर पर काम करने से पहले जतिन अपने बड़े भाई विश्वजीत जो फिल्मों में मंदिर नाम से म्यूजिक बनाते थे। इनके साथ मिलकर जतिन मंदिर जतिन नाम से म्यूजिक देने लगे और दोनों ने लगभग 10 साल तक साथ काम किया।
मंदीर जतिन की जोड़ी के बनाए कुछ गाने YouTube पर मिल जाते हैं। 1986 में मंदीर जतिन ने सुजीत कुमार, पुनीत इस सर, राजेश्वरी और अमजद खान अभिनीत एक छोटी फिल्म भाई का दुश्मन भाई के लिए संगीत तैयार किया था। इस जोड़ी को कभी कोई बड़ी हिट नहीं मिली। हालांकि मंदिर भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित तबला वादकों में से एक हैं। लेकिन अब वह संगीत की दुनिया में एक्टिव नहीं है। इनकी बेटियां श्रद्धा और श्वेता पंडित परिवार की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं और सिंगर के तौर पर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं। उनके बेटे यश कुछ फिल्मों में नजर आ चुके हैं और टीवी की दुनिया का एक लोकप्रिय नाम है। गिरती महकती यह जुल्फों की शाम हंसते थनक जतिन मंदीर की जोड़ी फिल्म जगत में ज्यादा नहीं चली थी। वहीं ललित पंडित भी संगीत सीखकर म्यूजिक की दुनिया में नाम कमाने के लिए तैयार थे। इसीलिए बड़े भाई जतिन ने ललित के साथ संगीतकार जोड़ी बनाने का फैसला लिया। इसकी शुरुआत एक प्राइवेट एल्बम रिदममिक लव से हुई। इस एल्बम में कई गाने थे जिन्हें बाद में यारा दिलदारा और यश बॉस जैसी कामयाब फिल्मों में फिर से शामिल किया। जतिन ललित आर डी बर्मन यानी पंचमदा के संगीत से इतने प्रभावित थे कि अक्सर यह उनके गानों की शूटिंग देखने जाते थे। जतिन ललित को संगीतकार जोड़ी के तौर पर पहला मौका साल 1991 में आई फिल्म यारा दिलदारा में मिला। आसिफ शेख और रुचिका पांडे अभिनीत यह एक रोमांटिक फिल्म थी। यह पिक्चर कुछ ज्यादा तो नहीं चली लेकिन इसका संगीत बहुत हिट रहा। इस फिल्म का सदाबहार गाना बिन तेरे सनम था। कई म्यूजिक चार्ट में सबसे ऊपर रहा। इसके बाद साल 1992 में आई फिल्म खिलाड़ी के कुछ गानों ने भी जतिन ललित के म्यूजिक पर सुनने वालों को गौर करने पर मजबूर किया। इस फिल्म के गाने, वादा रहा सनम की कशिश और जादू आज भी बरकरार है।
[संगीत] संगीतकार के तौर पर जतिन ललित की किस्मत का सितारा बुलंद हुआ। साल 1992 में आई मंसूर खान की फिल्म जो जीता वही सिकंदर के जरिए। दरअसल जतिन ललित ने साल 1988 में आई फिल्म कयामत से कयामत तक का बैकग्राउंड म्यूजिक तैयार किया था। इससे फिल्म के डायरेक्टर मंसूर खान इतने प्रभावित हुए थे कि इन्होंने आमिर खान और आयशा जुल्फखा अभिनीत अपनी फिल्म जो जीता वहीं सिकंदर में जतिन ललित को संगीतकार के तौर पर साइन कर लिया। आमिर खान पर फिल्माया गया इस फिल्म का रोमांटिक गाना पहला नशा का खुमार सुनने वालों पर ऐसा चढ़ा कि आज भी बरकरार है। इस फिल्म के संगीत के लिए जतिन ललित की ना सिर्फ खूब तारीफें हुई बल्कि इन्हें सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक कैटेगरी में फिल्म फेयर पुरस्कार का पहला नामांकन मिला। को भेदना हमें आता है। यही वो फिल्म थी जिसके बाद जतिन ललित की तुलना तब की दो और मशहूर संगीतकार जोड़ियों नदीम श्रवण और आनंद मिलिंद के साथ होने लगी। जो जीता। वहीं सिकंदर के म्यूजिक की कामयाबी के बाद जतिन ललित को बड़े बैनरों की फिल्मों में संगीत देने के ऑफर आए। 1992 में इस जोड़ी ने फिल्म राजू बन गया जेंटलमैन का संगीत दिया। इस फिल्म को प्रोड्यूस किया था जीपी सिप्पी और विवेक वासवानी ने। जबकि इसके निर्देशक अजीज मिर्जा थे। टाइटल सॉन्ग के अलावा इस फिल्म के कई अन्य गाने भी खूब पॉपुलर हुए थे। [संगीत] हुआ। एक के बाद एक, कई हिट फिल्मों का म्यूजिक देने के चलते जतिन ललित के पास तमाम फिल्मों में संगीत देने की जिम्मेदारी मिल गई। साल 1993 और 1994 में इनके संगीत निर्देशन में भूकंप, आदमी कभी हां, कभी ना, चीता, वादे-इरादे, पांडव और गैंगेस्टर जैसी कई फिल्में रिलीज हुई। इनमें शाहरुख खान की फिल्म कभी हां,
कभी ना के लिए जतिन ललित ने अलग-अलग भावों को व्यक्त करने वाले गाने बनाए। जिसमें खुशी गम के अलावा इमोशन और उदास करने वाले साउंड अट्रैक्ट शामिल थे। इस जोड़ी की लोकप्रियता को देखते हुए यशराज बैनर ने इन्हें शाहरुख खान और काजोल अभिनीत अपनी फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे के लिए संगीतकार के तौर पर साइन किया। काश के हम होश में अब आने जतिन ललित ने अपनी काबिलियत को एक बार फिर साबित किया संजय लीला भंसाली की म्यूजिक फिल्म खामोशी में जतिन ललित ने अपने गीतों में एक ऐसा मौन भाव जगाया जिसे उन्हें पहले कभी जीने का मौका नहीं मिला था। इस फिल्म का गाना बाहों के दरमियां एक बेहद क्लासिक और स्वप्नल गीत है जिसकी बेस लाइन बेहद सुस्त है। लेकिन हरिहरण और अलका याग्निक की आवाज में यह गानों के रास्ते दिल में उतर कर बेहद सुकून देते हैं। खुदा मैं क्या करूं? इसके अलावा इस फिल्म के कई और गाने दिलो दिमाग पर असर करते हैं। जैसे आंखों में क्या का सन्नाटा हो। गाते थे पहले अकेले की विविध लय हो या फिर यह दिल सुन रहा है का उदासी भरा माहौल। शायद ही कभी गीत और धुन इतनी अच्छी तरह से मेल खाते हो जितना इस फिल्म के गानों में देखने को मिला। इसके अलावा आज मैं ऊपर भी दर्शकों को खूब पसंद आया। आंखों से तूने ये क्या कह दिया? दिल ये दीवाना धड़कने लगा। साल 1998 में आई विक्रम भट्ट, निर्देशित आमिर खान और रानी मुखर्जी की फिल्म गुलाम में भी इस संगीतकार भाइयों ने एक से बढ़कर एक गाने दिए। एक तरफ आती क्या खंडाला जैसा मस्ती और बेपरवाही वाला गीत था। तो दूसरी ओर जादू है, नशा है और आंखों से तूने यह क्या कह दिया जैसे रोमांटिक गाने। तड़पने लगा मैं मचलने लगी। 1998 में म्यूजिक जुड़ी जतिन ललित ने फिल्म कुछ-कुछ होता है के जरिए अपने संगीत से ऐसी जान फूंक दी थी कि आज भी हर गाना उतना ही ताजगी से भरा और दिलकश मालूम पड़ता है। डायरेक्टर के तौर पर यह करण जौहर की पहली फिल्म थी। इससे पहले वह दिल वाले दुल्हनिया में आदित्य चोपड़ा के असिस्टेंट डायरेक्टर रह चुके थे। जब करण ने कुछ-कुछ होता है बनाने का प्लान किया तो आदित्य चोपड़ा से इसकी कहानी
और गीत संगीत को लेकर चर्चा की। आदित्य ने इस फिल्म में संगीतकार के तौर पर जतिन ललित को लेने का सुझाव दिया। आदित्य चोपड़ा ने खुद ही जतिन ललित को अप्रोच कर फाइनल भी कर दिया। इस फिल्म में आठ गाने रखे गए और सब एक से बढ़कर एक। घर आजा परदेसी तेरा देश बुलाए घर आजादी फिल्म के गाने तुझे याद ना मेरी आय के बारे में बात करते हुए ललित पंडित ने एक बहुत ही दिलचस्प किस्सा सुनाया दरअसल यह गीत फिल्म दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे के लिए बनाया गया था किसी वजह से यह गाना डीडीएलजे में इस्तेमाल नहीं हो सका। करण जौहर ने जब यश चोपड़ा की पत्नी यानी आदित्य चोपड़ा की मां पामेला को अपनी फिल्म की कहानी सुनाई तो एक सिचुएशन के लिए उन्हें इस गाने की याद आ गई। इस गाने का शुरुआती हिस्सा जतिन ललित पहले जसविंदर नरोला से गवाने वाले थे। लेकिन पामेला की सलाह पर सिर्फ एक अलाप और महज तीन-चार लाइनें गवाने के लिए खासतौर पर पंजाब की फोक सिंगर मनप्रीत अख्तर को बुलाया गया। इस गाने ने दर्शकों के दिलों में खूब असर पैदा किया। याद ना मेरी आई किसी से अब क्या कहना 1990 के दशक की फिल्मों में गजलें और कौवाली मिलना मुश्किल था। लेकिन यह जतिन ललित की संगीतकार जोड़ी ही थी। जिन्होंने 1999 की फिल्म सरफरोश में निदा फाजली की लिखी गजल को अपने बेहतरीन संगीत से संवारा। वहीं जिंदगी मौत ना बन जाए जैसी बेहतरीन कवाली देकर दर्शकों की वाहवाही बटोरी जो यकीनन यह एहसास दिलाने के लिए काफी था कि वाकई हिंदी फिल्म संगीत को बेहतरीन ढंग से कैसे सजाया जा सकता है। होश वालों को खबर क्या बेखदी जिंदगी मौत ना बन जाए संभालो यारों जतिन ललित 2000 के दशक के शुरुआती सालों में तमाम फिल्मों में संगीतमय हिट देते रहे। इस दौरान उनकी हिट फिल्मों की बात की जाए तो यश चोपड़ा की मोहब्बतें, करण जौहर की कभी खुशी, कभी गम और फिल्म हम तुम का नाम लिया जा सकता है। लम्हों की गुजारिश है ये पास आ जाए हम। हम हम तुम अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिनीत मोहब्बतें में इस जोड़ी ने कई गानों की दिलकश धुनें दी। वहीं मल्टीस्टारर फिल्म कभी खुशी कभी गम में।
जतिन ललित ने टाइटल ट्रैक के अलावा सूरज हुआ मध्यम और बोले चूड़ियां जैसे कई हिट गाने दिए। चूड़ियां बोले। ऐसे समय में जब विशाल शेखर, शंकर एहसान लॉय और प्रीतम हिंदी फिल्म संगीत में नई जान फूंक रहे थे। इस दौर में भी जतिन ललित के काम ने साबित कर दिया कि वे समय के साथ तालमेल बिाने में कामयाब रहे। 2000 के दशक में आई दो फिल्में हम तुम और फना इसकी सबसे पुख्ता मिसाल हैं। जिनमें प्रोडक्शन बेहद सदा हुआ है और धुनें आज भी यादगार हैं। चमके चम चमोन्ना चींटी काटे जीोरी इराकी धुन के एक ही हुक से जतिन ललित ने तीन गाने बनाए। फिल्म हम तुमका यारा यारा फना का चांद सिफारिश और चंदा चमके। हालांकि यह तीनों अपने आप में अनोखे हैं। लेकिन कवाली और भांगड़ा से सराबोर तबले पर पावर कॉर्ड्स का मेल बिठाता चांद सिफारिश सबसे अलग और दिल को झकझोरने वाला प्रतीत होता है। वहीं फना फिल्म का गाना मेरे हाथों में दर्शकों के दिलों में एक अलग ही असर पैदा करता है। मेरे हाथ में तेरा हाथ हो। साल 2006 में एक तरफ तो फना का संगीत चारों ओर टहलका मचा रहा था और हर तरफ इसके गानों की धूम थी। इसी बीच पूरी इंडस्ट्री और फैंस को तब झटका लगा जब जतिन ललित ने अपनी जोड़ी तोड़ने का फैसला लिया। और इसकी खबरें लोगों तक पहुंची। फना जैसी फिल्म के कामयाब संगीत के बाद इस साझेदारी के टूटने की खबर ने इनके फैंस पर क्या असर डाला होगा, इसकी आप सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं। सुभान अल्लाह। सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह जतिन ललित ने फना का म्यूजिक तैयार करने के दौरान ही तय कर लिया था कि इस फिल्म के बाद यह दोनों अलग हो जाएंगे। इसलिए इन दोनों के निजी रिश्तों का दर्द साफ तौर पर फना के संगीत में देखने को मिलता है। जिसकी पुष्टि कई बार जतिन और ललित दोनों ही कर चुके हैं। अब सवाल उठता है कि सगे भाई और संगीतकार के तौर पर बेहद कामयाब जोड़ी होने के बावजूद ऐसा क्या हुआ कि जतिन ललित को अलग होना पड़ा। उस दौरान कई खबरें आई कि दोनों के बीच फाइनेंशियल डिस्प्यूट था।
तो कई रिपोर्ट्स में इसकी वजह पारिवारिक कलह को बताया गया। फिल्म इंडस्ट्री की खबरों पर बेहद बारीकी से नजर रखने वाले पोर्टल स्पॉटबॉय के अनुसार जतिन और ललित के दोनों के एक करीबी सूत्र ने बताया कि दोनों की पत्नियां एक दूसरे के सख्त खिलाफ थी, और नहीं चाहती थी कि दोनों भाई साथ काम करें। स्पॉट बॉय की रिपोर्ट आगे बताती है कि दोनों की पत्नियों के बीच लगातार झगड़े होते रहते थे और हालात इतने बिगड़ गए कि दरार लगातार बढ़ती गई और इसकी भरपाई की सारी गुंजाइश खत्म हो चुकी थी। पारिवारिक कलह जब हद से पार जाने लगी तो जतिन ललित ने फैसला किया कि इस झगड़े को खत्म करने का एकमात्र तरीका एक दूसरे की जिंदगी से पूरी तरह दूर जाना है और वही हुआ जो नहीं होना चाहिए था। अलग होने के बाद दोनों भाइयों के परिवारों के बीच हालात इतने बिगड़ गए हैं कि यह एक ही पार्टी और समारोह में जाने से कतराने लगे। अगर कहीं बहुत जरूरी होता तो यह आयोजकों के साथ आने जाने का समय तय कर लेते थे ताकि एक दूसरे का आमना-सामना ना हो। कुल मिलाकर दोनों परिवार एक दूसरे का मुंह तक नहीं देखना चाहते थे। स्पॉट व्यय की रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री के लोग भी इनके इस रवैया से तंग आ चुके थे। कई बार अगर वे उनमें से किसी एक को भी बुलाते थे तो दूसरा नाराज हो जाता। कई मौके ऐसे भी आए जब किसी पार्टी या इवेंट में दोनों परिवार आमने-सामने हुए तो इनकी बेचैनी और हावभाव से साफ जाहिर होता कि यह एक दूसरे को देखना तक चाहते। इसके अलावा इनकी पत्नियां मौका मिलते ही सबके सामने अपनी बेरुखी साफ कर देती थी और यह उनके आसपास मौजूद लोगों के लिए बेहद शर्मनाक होता था। इसलिए कई बार लोग किसी तमाशे से बचने के लिए दोनों को अपने कार्यक्रमों में नहीं बुलाते थे। मुझे रात दिन बस मुझे चाहती। यकीनन संगीतकार के तौर पर जतिन ललित की ऐसी जोड़ी रही जो अपनी कामयाबी के पीख पर टूट गई। जिसका अफसोस दोनों भाइयों को था। अलग होने के बाद जतिन पंडित अक्सर मीडिया के सवाल पर अपने छोटे भाई ललित के खिलाफ बोलने से बचते रहे। वहीं ललित पंडित ने भी बड़े भाई की मर्यादा का ध्यान रखा। अलग होने के बाद जतिन और ललित अलग-अलग संगीत देने लगे। लेकिन इनकी डिमांड पहले जैसी नहीं रही। दोनों का करियर एक तरह से खत्म मान लिया गया। हालांकि जोड़ी टूटने के बाद ललित पंडित ने साल 2007 में लाइफ में कभी-कभी 2009 में हॉर्न ओके प्लीज रेड अलर्ट जैसी करीब आधा दर्जन फिल्मों का संगीत दिया। [प्रशंसा] [संगीत] की फिल्म दबंग में कुछ गानों का संगीत देने का मौका मिला।
जबकि इस फिल्म के बाकी गानों का म्यूजिक साजिद वाजिद ने दिया था। इस फिल्म के एक गाने में ललित पंडित ने कमाल कर दिया। शायद ही कोई होगा जो ललित पंडित के गाने मुन्नी बदनाम हुई को नहीं सुना होगा। इस गाने को दो फीमेल सिंगर्स ममता शर्मा और ऐश्वर्या ने गाया था। दोनों को ललित पंडित की खोज कहा जाता है। यह गाना 2010 में जबरदस्त हिट हुआ था। इस गाने को ललित ने खुद लिखा भी था और इस गाने के गीतकार संगीतकार के तौर पर उन्हें कई पुरस्कार मिले। मारेंगे तेरे लिए बदनाम हुए कहते हैं कि वक्त ऐसा मरहम है जो हर जख्म को भर देता है। अलग होने के 13 साल बाद साल 2019 में जतिन और ललित पंडित को पहली बार सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल 11 के मंच पर एक साथ देखा गया। इस दौरान दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया और बीते दिनों को याद करते हुए एक गाना भी गाया। ललित ने जतिन के पैर भी छुए। इस दौरान जतिन और ललित के बेटे भी मंच पर मौजूद थे। इसी के बाद से जतिन ललित के एक बार फिर से साथ आने के कयास लगाए जाने लगे। अपने भाई के साथ मुलाकात पर ललित ने कहा कि हम शो में अपने गाने सुनने के लिए आए थे और हमें बहुत मजा आया। हमारी कुछ पुरानी यादें ताजा हो गई। हालांकि अब हम साथ काम नहीं करते हैं लेकिन हम भाई हैं। मैं जतिन को मिस करता हूं। इसके बाद शो के होस्ट आदित्य ने पूछा कि क्या यह दोनों किसी फिल्म के म्यूजिक के लिए फिर से साथ आ सकते हैं? इसके जवाब में ललित ने कहा कि जतिन मेरे बड़े भाई हैं और एक साथ दोबारा काम करने का आईडिया मुझे पसंद आया। हालांकि दोनों भाइयों की कड़वाहट दूर होने और एक साथ आने के बाद इन्हें ना तो किसी बैनर ने साइन किया और ना ही इन्होंने किसी और प्रोजेक्ट पर साथ काम किया। इन्हें किसी डायरेक्टर प्रोड्यूसर ने इसीलिए भी मौका नहीं दिया क्योंकि जतिन ललित अब लगभग पूरी तरह से फिल्म संगीत की दुनिया से बाहर हो चुके हैं और म्यूजिक का मिजाज भी काफी हद तक बदल चुका है। करियर के पीक पर इन्होंने अलग होने का जो निर्णय किया 13 साल बाद साथ आने पर उस गलती की भरपाई मुमकिन नहीं हो सकी। इसीलिए कहा जाता है कि एक गलत फैसला कई बार बहुत भारी पड़ता है। जतिन ललित के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। लड़की हाय अल्लाह हाय हाय रे अल्लाह ये लड़की हाय अल्लाह हाय हाय रे अल्लाह जतिन ललित ने एक साथ 72 फिल्मों में 473 गानों का म्यूजिक तैयार किया।
इनके म्यूजिक ने देश-विदेश में खूब पॉपुलैरिटी बटोरी पर अफसोस 11 बार फिल्म फेयर के लिए नॉमिनेट होकर भी इन्हें अपने संगीत के लिए एक भी बड़े पुरस्कार की ट्रॉफी नहीं मिली। यह इनकी किस्मत थी या फिर अवार्ड फिक्सिंग यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन इसका अफसोस आज भी इन दोनों भाइयों को है। [संगीत] एक संगीतकार के तौर पर जतिन पंडित का करियर सालों पहले खत्म हो गया। जबकि ललित पंडित ने हाल फिलहाल में कुछ छोटे बजट की फिल्मों में संगीत दिया। इसमें 2022 की फिल्म लव यू लोकतंत्र और 2025 में रिलीज हुई फिल्म मन्नू क्या करेगा शामिल हैं। अब इन दोनों भाइयों के बेटे भी बड़े हो चुके हैं और संगीत की दुनिया में अपना नाम बनाने की कोशिशों में जुटे हैं। लफ्जों में लिख दी मैंने अपनी प्रेम कहानी। तू मेरे दिल का राजा बन जा। तो यह थी संगीतकार जोड़ी जतिन ललित की कहानी। इस पेशकश में आज बस इतना ही। कार्यक्रम पसंद आया हो तो चैनल को सब्सक्राइब करिएगा। आपसे फिर होगी मुलाकात। नमस्कार। [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]