नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है मनोज फिल्मी पडकास्ट में। बात तब की है जब फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम की कास्टिंग हो रही थी। राज कपूर ने हेमा मालिनी को स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाया। लेकिन वो बिना कैमरे के सामने आए ही अचानक सेट से गायब हो गई। दोस्तों, एपिसोड में आगे बढ़ने से पहले मेरा आप सभी से रिक्वेस्ट है प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा।
तो चलिए दोस्तों एपिसोड को शुरू करते हैं। तो दोस्तों किस्सा 1978 में रिलीज हुई फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम की कास्टिंग का है। राज कपूर के डायरेक्शन में बनी फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम में शशि कपूर और जीनेत अमान की केमिस्ट्री लोगों को काफी पसंद आई। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म के लिए यह दोनों स्टार्स राज कपूर की पहली पसंद नहीं थे। राज कपूर ने जब फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम बनाने के बारे में सोचा तो बतौर लीड एक्टर राजेश खन्ना को सोचा तो बतौर एक्ट्रेस उनके दिमाग में पहला नाम हेमा मालिनी का आया।
राज कपूर ने फिल्म के लिए हेमा को ऑफर भेजा और अगले ही दिन स्क्रीन टेस्ट के लिए बुला लिया। लेकिन राज कपूर ने उनसे कुछ ऐसा कह दिया कि हेमा ने बिना कुछ कहे ही फिल्म छोड़ दी। हेमा मालिनी जब स्क्रीन टेस्ट के लिए सेट पर गई तो राज कपूर ने फिल्म के किरदार रूपा के बारे में उन्हें बताया। लेकिन जब राज कपूर ने कॉस्ट्यूम के बारे में हेमा को डिटेल्स दी तो हेमा हैरान रह गई। दरअसल सत्यम शिवम सुंदरम में रूपा का कैरेक्टर उस दौर के हिसाब से थोड़ा ओपन था। ऐसे में हेमा यह रोल नहीं करना चाहती थी।
लेकिन वो सीधे-सीधे राज कपूर को ना भी नहीं कहना चाहती थी। हेमा ने राज कपूर से कुछ नहीं कहा और राज कपूर ने उन्हें रूपा के रोल का कॉस्ट्यूम पहनकर आने के लिए कहा। हेमा मालिनी डायरेक्टर यानी राज कपूर के कहने पर ड्रेसिंग रूम में तो गई, लेकिन उन्होंने कॉस्ट्यूम नहीं पहना, वो बिना किसी को बताए चुपचाप स्टूडियो से निकल गई। इधर राज कपूर उनका इंतजार करते रह गए। बहुत देर बाद जब हेमा नहीं आई तो वह समझ गए कि एक्ट्रेस इस रोल के लिए तैयार नहीं है। सालों बाद जीनत अममान ने Instagram पर एक पोस्ट लिखा। उन्होंने लिखा आज मैं आपको यह बताती हूं कि कैसे फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम में मुझे कास्ट किया गया। मैं अपने करियर का वो किस्सा बताने जा रही हूं जो आज तक आप लोगों से छुपा हुआ रहा। जीनत ने आगे लिखा 1976 के आसपास हम वकील बाबू की शूटिंग कर रहे थे
। राज जी फिल्म में अहम रोल निभा रहे थे। वहीं उनके छोटे भाई शशि कपूर और मैं फिल्म में लीड रोल प्ले कर रहे थे। लंच के बीच में टेक्नशियन सेट चेंज करते थे। लाइट ठीक करते थे और हम कास्ट मेंबर टाइम पास कर रहे होते थे। वहीं राज कपूर की अपनी आर्ट को लेकर एक क्रांतिकारी सोच थी और वह एक फिल्म को लेकर जोश से भरे हुए थे जिसे वह बनाना चाहते थे। कुछ समय तक वह एक स्टोरी आईडिया हमें बताते रहे कि एक आदमी है जो एक महिला की आवाज के प्यार में पड़ जाता है। लेकिन खुद को उसकी अपीरेंस से कनेक्ट नहीं कर पाता है। वह बेबाकी और जोश के साथ बोलते थे। लेकिन एक बार भी यह हिंट नहीं दिया कि मैं उस फिल्म का हिस्सा हो सकती हूं।
क्योंकि मैं पहले से ही स्टार थी और फिल्म में मुझे कास्ट करने की उनकी दिलचस्पी ना होने को लेकर मुझे बहुत दिक्कत हो रही थी। मुझे पता था कि मिनी स्कर्ट्स और बूट्स वाली मेरी मॉडर्न इमेज ही इसका कारण है तो मैंने खुद ही सोचा कि राज कपूर को इसके लिए मनाया जाए। उन्होंने आगे लिखा मुझे पता था कि राज जी अपना ज्यादातर खाली समय आर के स्टूडियो के ग्राउंड में द कॉटेज सेट पर बिताते थे। ऐसा सुनने में आया था कि वह यहीं पर मीटिंग रखते थे। छोटे इवेंट होस्ट करते थे। अक्सर जमीन पर साफ सुथरे गद्दे पर बैठकर वह मीटिंग्स किया करते थे। तो मैंने एक कदम उठाया। एक शाम सूट जल्दी रैप अप करके मैंने एक्स्ट्रा 30 मिनट अपने ड्रेसिंग रूम में लगाए और खुद को रूपा की तरह तैयार किया। मैंने घाघरा चोली पहनी। परांदा के साथ गुथी हुई चोटी बनाई और फिर गोंद से टिश्यू पेपर अपने चेहरे पर चिपका कर निशान बनाने की कोशिश की। जब मैं द कॉटेज पहुंची तो जॉन यानी कि राज जी का जो राइट हैंड मैन था
उसने मुझे दरवाजे पर ग्रीट किया। उसने मुझे अचंभे से देखा लेकिन मेरी रिक्वेस्ट मानी। मैंने कहा साहब जी को कहो कि रूपा आई है। और जल्द ही मैं राज जी के सामने थी। ओह ग्रेट डायरेक्टर। मुझे एक गांव की लड़की के रूप में देखकर कितने खुश हुए थे। मुझे बाद में पता चला कि वह इस बात से बहुत प्रभावित हुए थे कि मेरे जैसी एक मॉडर्न अभिनेत्री खुद को साबित करने के लिए इतनी हद तक जा सकती है। जब उनकी हंसी कम हो गई तो राज जी ने एक टेलीफोन कॉल किया। 20 मिनट बाद उनकी पत्नी कृष्णा जी अपने पर्स में मुट्ठी भरकर सोने की गिन्निया लेकर दरवाजे पर थी। राज जी ने बड़े विश्वास के साथ उन्हें साइनिंग अमाउंट के तौर पर मुझे सौंप दिया और यह मैं रूपा बन गई। मैंने उन गिन्नियों को कई सालों तक अपने पास रखा जब तक कि वे कुछ साल पहले मेरे घर से चोरी नहीं हो गई। फिर भी इस याद और उस सोने के बीच ऑप्शन दिए जाने पर मैं हमेशा याद को चुनूंगी। मेरी पिछली पोस्ट में दिखाया गया है कि राज जी सेट पर मेरे घावों को ठीक कर रहे थे। मुझे ऐसा रूप देने के लिए जिस गोंद का इस्तेमाल किया गया था उसने हफ्तों तक मेरी स्किन पर कहर बरपाया था। तो दोस्तों, आज का एपिसोड मैं यहीं समाप्त करता हूं। अगर आप लोगों को यह अच्छा लगा है, तो प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा। जल्द ही मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में नेक्स्ट एपिसोड के साथ। तब तक के लिए आप सभी को टाटा बाय-ब टेक केयर।