Cli

मुमताज़ ने हिंदू से शादी करने पर तोड़ी चुप्पी, आख़िर क्यों बोला ‘मेरे पास च्वाइस नहीं थी …’!

Hindi Post

लेजेंड्री एक्ट्रेस मुमताज ने जब एक हिंदू बिजनेसमैन से शादी की तो खूब बवाल हुआ। कहा कि अब देखो मेरे पास कोई चॉइस नहीं थी। जी हां, मुमताज ने करियर के पीक पर एक्टिंग छोड़ी थी। थोड़ी सी हैरानी वाली यह कहानी है। 70-80 के दशक में मुमताज फिल्म इंडस्ट्री का एक ऐसा चेहरा थी, एक ऐसा नाम थी जिसके लिए फिल्म इंडस्ट्री को जाना जाता था। एक से एक बढ़कर उन्होंने फिल्में दी। उनकी और राजेश खन्ना की जोड़ी ऑन स्क्रीन पर सुपरहिट थी। उन्होंने साथ में कई सारी हिट फिल्में दी।

जिनके लिए आज तक उन्हें याद किया जाता है। मुमताज की एक्टिंग करियर में शुरुआत बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट हुई थी। उनकी पहली हिट फिल्म 1967 में मिली जिसमें उनके साथ दिलीप कुमार दिलीप साहब यानी के लेजेंड को कास्ट किया गया था। इसका टाइटल था राम और श्याम। यह उनके करियर का टर्निंग पॉइंट रही थी। लेकिन वो वक्त भी जल्दी आ गया जब उन्होंने स्क्रीन से दूरियां बना ली। जी

हां, इस पर मुमताज ने सालों के बाद बात की और कहा कि कोई चॉइस नहीं थी मेरे पास। मैं क्या करती और क्योंकि कई सारी चीजें आपको देखनी होती है। फैमिली के बारे में भी सोचना होता है और फैमिली में कई बार आपको चॉइस नहीं मिलती है। दरअसल मुमताज ने साल 1974 में गुजराती हिंदू बिजनेसमैन मयूर माधवानी के साथ शादी कर ली थी और उसके बाद फिल्मों से दूरी बनाकर लंदन में सेटल हो गई। उनकी शादी एक इंटरफेथ मैरिज थी जिसकी वजह से काफी चर्चा में रही थी।

लेकिन ना तो कभी एक्ट्रेस और ना ही उनके परिवार को इस रिश्ते से कोई इशू था। लेकिन हां यह था फिल्में छोड़नी पड़ी, इंडस्ट्री छोड़नी पड़ी। ऐसे में अब जब सालों बाद बात हुई तो करियर के पीक पर एक्टिंग को छोड़ना, इंटरफेथ मैरिज, एक्ट्रेस के रिएक्शन, तमाम चीजें उनके बारे में बात करते हुए विकिल अलवानी को एक इंटरव्यू दिया है। जी हां, आप सोचो ना मुमताज एक नाम, एक चेहरा, एक दीवानगी थी इनको लेकर। अब इन्होंने बात करते हुए कहा कि मेरे पास उस वक्त कोई चॉइस नहीं थी। मेरी मां, दादी और आंटी ने इस प्रपोजल को एक्सेप्ट कर लिया था। वो परिवार को जानते थे और उन्होंने मुझे एक्टिंग छोड़ने की सलाह दी। कहा कि अब रहने दो सेटल हो जाओ। जबकि पीक पर थे वो अपनी।

मुमताज कहते हैं कि हमारे परिवार में कभी किसी ने हिंदू और मुस्लिम पर ध्यान ही नहीं दिया। हमने कभी भी धर्मों में भेदभाव नहीं किया। मेरी बहन ने भी हिंदू से शादी की थी रंधावा जी से। लेकिन कभी कोई अड़चन नहीं आई। मुमताज गुजराती हिंदू बिजनेसमैन से अपनी शादी को लेकर खुद कहती हैं कि उनसे मेरी शादी नियती थी, डेस्टिनी थी और मैंने अपने परिवार की सलाह को माना था। मैं जिस परिवार से आती हूं ईरानी लोग ऐसे ही होते हैं। हां, इसके साथ ही मुमताज ने शादी के बाद अपनी जिंदगी के बारे में भी बात की कि शादी के बाद क्या-क्या हुआ, कैसे-कैसे बदली गई। मुमताज ने कहा कि शादी के बाद कभी भी मुझे अपनी पर्सनल लाइफ में कुछ भी चेंज करने की जरूरत नहीं पड़ी। किसी ने कभी कुछ कहा नहीं

। मैं माधवानी परिवार की दौलत का बखान नहीं करना चाहती हूं। लेकिन वहां कई रसोइयां थी। वहां पर शाकाहारी और मांसाहारी लोगों के लिए अलग खाना बनता था। मुझ पर कभी भी नॉनवेज छोड़ने के लिए या फिर कुछ इस तरीके का कोई भी प्रेशर नहीं बनाया गया। जबकि मेरे हस्बैंड वो वेजिटेरियन है। लेकिन मुझे कभी भी अपना खाना बदलने के लिए अपनी किसी भी तरीके की चॉइस के लिए नहीं कुछ बोला गया। ठीक है। अपनी-अपनी जगह सब ठीक है। अपनी चॉइस से अगर उन्हें छोड़ी है तो फिर कोई दिक्कत नहीं। लेकिन पीक पर अगर परिवार के लिए छोड़ना तो फिर वो त्याग माना जाएगा। बाकी आप लोग बताइए अपनी राय कमेंट के अंदर। आपका क्या कहना है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *