जितना नाटक इस एक बंदे ने किया था सोशल मीडिया पर जनता के मुद्दे उठाने का और इतने लोगों को बेवकूफ बनाने का यह अनबिलीवेबल है। राघव चड्ढा को पार्टी ने विधायक बनाया, सांसद बनाया। अब भारतीय जनता पार्टी की गोदी में पहुंच गए। सब कुछ बिकता है बस तुम्हें वाजिब कीमत पता होनी चाहिए।
राघव जड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी जॉइ की। लेकिन उनके कई फैंस जो उन्हें उनकी बेबाकी और जनता से जुड़े मुद्दों के लिए पसंद करते थे उन्होंने अनफॉलो कर दिया है। राघव चड्डा को ऑनलाइन एक ऐसी सजा मिली जिसे देखने के बाद शायद उनका भी दिल थरथराया होगा। कल तक जिन्हें लोग ईमानदार नेता बता रहे थे, आज उन्हीं को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। दरअसल पॉलिटिक्स में पार्टी बदलना कोई नई बात नहीं है।
नेता आते हैं, जाते हैं। विचारधारा बदलते हैं और नई राजनीतिक जमीन तलाशते हैं। लेकिन अब राजनीति सिर्फ मंचों और सभाओं तक सीमित नहीं रह गई है। आज नेताओं की असली ताकत सोशल मीडिया पर भी मापी जाती है। फॉलोअर्स सिर्फ संख्या नहीं होते बल्कि जनता के भरोसे, पॉपुलैरिटी और इमेज का डिजिटल पैमाना बन चुके हैं। आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन करने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्डा के साथ भी कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है। 24 अप्रैल की शाम जैसे ही राघव चड्डा ने बीजेपी का दामन थामा सोशल मीडिया पर एक ऐसा तूफान उठा जिसने उनके ब्रांड की चमक फीकी कर दी। जिस युवा चेहरे को लोग सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने वाला नेता मान रहे थे।
आज वही डिजिटल प्लेटफार्म पर लोगों के गुस्से का शिकार हो रहा है। उनके Instagram फॉलोवर्स में लगातार गिरावट देखी जा रही है। महज चंद घंटों में 7 से 8 लाख लोग उनको अनफॉलो कर चुके हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि राजनीतिक फैसले के बाद जनता के मूड का संकेत माना जा रहा है। राघव चड्डा लंबे समय तक आम आदमी पार्टी के युवा और पढ़े लिखे चेहरे के तौर पर पेश किए जाते रहे हैं। संसद में उनके बोलने का स्टाइल, मुद्दों की समझ और सोशल मीडिया पर उनकी एक्टिवनेस की मौजूदगी ने उन्हें अलग पहचान दी। लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी बदलने के फैसले ने उनके डिजिटल इमेज को झटका दिया है?
राघव चड्डा की राजनीति जितनी सड़कों और संसद में चमकती थी, उससे कहीं ज्यादा उनका जादू Instagram और Twitter पर चलता था। लेकिन बीजेपी में शामिल होने की खबर ने उनके फैंस के दिल तोड़ दिए। आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि यह फैसला उनके लिए कितना महंगा साबित हो रहा है। बीजेपी ज्वाइन करने से पहले राघव के Instagram पर 14.6 मिलियन फॉलोवरर्स थे। लेकिन पाला बदलते ही यह ग्राफ तेजी से नीचे गिरा। 25 अप्रैल की सुबह तक यह संख्या घटकर 3.7 मिलियन पर आ गई। यानी महज कुछ ही घंटों में 1 मिलियन यानी 10 लाख से ज्यादा लोगों ने उन्हें अनफॉलो कर दिया। डिजिटल प्लेटफार्म पर यह बदलाव तेजी से नोटिस किया गया। कई यूज़र्स ने स्क्रीनशॉट शेयर किए और दावा किया कि राघव चड्डा को जनता सोशल मीडिया पर जवाब दे रही है। फॉलोअर्स की संख्या में बदलाव का मतलब सिर्फ पॉपुलैरिटी कम होना नहीं होता। यह भी दिखाता है कि किसी नेता के फैसले पर जनता का भावनात्मक रिएक्शन कैसा है? अब सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर सवाल उठने लगे। ध्रुव राठी ने भी राघव चड्डा पर रिएक्शन दिया है। रा
घव चड्डा जितना बड़ा धोखेबाज शायद ही कभी देखा हो। मतलब पॉलिटिशियंस पार्टी बहुत बदलते रहते हैं। कोई बड़ी चीज नहीं है। लेकिन जितना नाटक इस एक बंदे ने किया था सोशल मीडिया पर जनता के मुद्दे उठाने का और इतने लोगों को बेवकूफ बनाने का ये अनबिलीवेबल है। क्योंकि कुछ महीने पहले तक तो अभी खुद कह रहे थे कि बीजेपी अनपढ़ गुंडों की पार्टी है। लेकिन राघव जैसे लोगों के बारे में समझ में नहीं आता। अगर तुम्हें इतना ही डर था फर्जी केस में जेल जाने से तो पॉलिटिक्स छोड़ देते। कम से कम लोग रिस्पेक्ट तो करते।
लेकिन अब जितनी रिस्पेक्ट कमाई थी, जितनी फॉलोइंग कमाई थी, एक ही झटके में सब गई। इसके अलावा एक यूजर ने लिखा सच कहा गया कि जिसको ज्यादा लाड प्यार दो आंख बंद करके भरोसा करो वही धोखा दे जाता है। जिसने आपको देश में इतना सम्मान दिलवाया उसी को लात मार दी। राघव चड्ढा। एक और यूजर ने लिखा दिल्ली वालों पर भी वीडियो बनाओ क्योंकि इस बार उन्होंने भी आपका साथ छोड़ दिया था। इस तरह का प्रचार करके आपने अपनी मानसिकता का परिचय दिया है। कई यूज़र्स ने उनको अनफॉलो करने के लिए कहा। एक और ने लिखा बट पढ़े लिखे लोगों से ऐसी उम्मीद नहीं थी कि ऐसी पार्टी ज्वाइन करेंगे। एक और ने लिखा भाई नई पार्टी बना लेते।
एक और रीजन ने लिखा अनफॉलो किया है क्योंकि आप बीजेपी से डरते हैं। लेकिन आपको बता दें यहां एक सवाल उठता है कि क्या हम किसी इंसान को इतनी जल्दी जज कर सकते हैं? राजनीति में पार्टी बदलना कोई नई बात नहीं। हर नेता का अपना विज़न स्ट्रेटजी और फ्यूचर प्लान होता है। हो सकता है कि राघव चड्डा ने यह फैसला अपने राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने के लिए लिया हो या फिर उनके पास कोई बड़ा प्लान हो जो अभी लोगों को समझ नहीं आ रहा। लेकिन सोशल मीडिया पर हम अक्सर पूरी कहानी जाने बिना ही रिएक्शन दे देते हैं। कल तक जो हीरो था आज वही विलेन बन गया। यह सिर्फ राजनीति नहीं बल्कि जनता की बदलती सोच को भी दिखाता है। सच क्या है यह तो वक्त बताएगा लेकिन इतना जरूर है कि राघव चड्डा का यह कदम उनकी इमेज पर बड़ा असर डाल चुका है। अब देखना होगा कि क्या वह दोबारा लोगों का भरोसा जीत पाएंगे या बैकलैश और बढ़ेगा। क्या आप सोचते हैं? कमेंट सेक्शन में हमें लिखकर जरूर बताएं। वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें।