नमस्कार दोस्तों, आपने बॉलीवुड का एक फेमस डायलॉग तो सुना ही होगा। हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहां दम था। हमारी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था। दोस्तों, आज आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ भी यही हो रहा है। आम आदमी पार्टी एक बार फिर से बहुत ही बुरे दौर से गुजर रही है। क्योंकि शुक्रवार को उनके 10 राज्यसभा सांसदों में से सात ने पार्टी से नाता तोड़ लिया।
इस बात की जानकारी राज्यसभा सांसद राघव चड्डा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पब्लिक के साथ साझा किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव ने आम आदमी पार्टी पर जमकर हमला बोला। देश के लिए काम इस पार्टी में नहीं हो पा रहा है। वो इसलिए क्योंकि अब आम आदमी पार्टी वो पुरानी वाली आम आदमी पार्टी नहीं रही। राघव चड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अरविंद केजरीवाल के सिपाही के तौर पे सामने आए संजय सिंह ने प्रेस वार्ता की। जिसमें उन्होंने पार्टी के छोड़ने वाले सात सांसदों पर
जमकर हमला बोला और भाजपा पर ऑपरेशन लोटस का आरोप लगाया। भय दिखा के प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग करके यह ऑपरेशन लोटस चलाया जा रहा है। दोस्तों, आम आदमी पार्टी से नाता तोड़ने वालों में एक नाम अशोक मित्तल का भी है। जिनको लेकर काफी चर्चा हो रही है। क्योंकि राज्यसभा में राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद केजरीवाल ने अशोक मित्तल को ही राज्यसभा में पार्टी का उपनेता बनाया था। लेकिन कल राघव चड्ढा और अशोक मित्तल ने एक साथ आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
आम आदमी पार्टी ने 2 अप्रैल को जब राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटाया था तभी से ऐसे कयास लगने लगे थे कि एक ना एक दिन राघव चड्ढा पार्टी छोड़ेंगे और भाजपा में शामिल हो जाएंगे। लेकिन अरविंद केजरीवाल के साथ असली खेल राघव चड्ढा ने नहीं बल्कि अशोक मित्तल ने किया क्योंकि चड्ढा की जगह केजरीवाल ने अशोक मित्तल को ही राज्यसभा में आपका उपनेता बनाया था।
लेकिन आज वही मित्तल खुद भी राघव के साथ भाजपा में शामिल हो गए। दोस्तों अशोक मित्तल वही हैं जिन्होंने 2024 में जेल से छूटने के बाद अरविंद केजरीवाल को और उनके परिवार को नई दिल्ली में पांच फिरोजशाह रोड स्थित अपने सरकारी आवास पर रखा था। बड़ी बात तो यह है कि केजरीवाल ने उस घर को सांसदों की बगावत से कुछ घंटे पहले ही छोड़ा और नए सरकारी आवास में शिफ्ट हुए। इतने दिनों तक उनके घर में रहने के बावजूद केजरीवाल को बगावत की भनक तक भी नहीं लगी।
दोस्तों 15 अप्रैल को प्रवर्धन निदेशालय यानी कि ईडी ने मित्तल के घर और लवली ग्रुप से जुड़े जालंधर और फागगवाड़ा के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्यवाही विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून के तहत कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी बताई जा रही है। जिसमें मित्तल और उनके बेटे का नाम सामने आया है। जांच के दायरे में परिवार कारोबार से जुड़े संस्थानों जैसे यूनिवर्सिटी और अन्य ग्रुप कंपनियां भी शामिल रहीं। दोस्तों, ईडी की कार्यवाही के कुछ ही दिनों बाद मित्तल का भाजपा में शामिल होना चर्चा का विषय बन गया है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि हाल ही में आम आदमी पार्टी ने उनका कद तेजी से बढ़ाया था। दोस्तों मित्तल साहब का आम आदमी पार्टी से दूरी बनाना और भाजपा में शामिल होना कहां तक सही है? कमेंट कर हमें जरूर बताएं। ऐसे ही अपडेट के लिए देखते रहिए एबीवी एंटरटेनमेंट।