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राघव की जाति से लेकर राजनीति तक, BJP में आने के 3 बड़े कारण

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असल कारण बताता हूं कि क्यों मैंने पार्टी की गतिविधियों से अपने आप को अलग कर लिया और उसका कारण यह है क्योंकि मैं उनके गुनाह में शामिल नहीं होना चाहता था। मैं उनकी दोस्ती के काबिल नहीं था क्योंकि मैं उनके गुनाह में शामिल नहीं था। हमने यह डिसाइड किया दैट वी द टू थर्ड मेंबर्स ऑफ पार्लियामेंट ऑफ दी बिलोंगिंग टू दी आम आदमी पार्टी इन राज्यसभा एक्सरसाइज द प्रोविजंस ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया एंड मर्ज आवरसेल्व्स वि द बीजेपी। हम बीजेपी में विलय करते हैं। राघव चड्डा की जाति और सामाजिक पृष्ठभूमि की बात करें तो वह एक पंजाबी खत्री परिवार से संबंध रखते हैं और उनकी विशिष्ट जाति खुरयान वर्ग के अंतर्गत आती है। चड्डा

उपनाम मुख्य रूप से भारत के पंजाब और उत्तरी राज्यों में पाए जाने वाले हिंदू और सिख समुदायों का एक अभिन्न हिस्सा है। सामाजिक संरचना में इसे एक उच्च और गौरवशाली जाति का दर्जा प्राप्त है जो कि सदियों से व्यापार, वाणिज्य और शासन व्यवस्था से जुड़ी रही। ऐतिहासिक रूप से चड्डा समुदाय का अस्तित्व 16वीं शताब्दी से पंजाब के गौरवशाली इतिहास में स्पष्ट रूप से मिलता है। यह खत्री जनजाति का एक महत्वपूर्ण अंग है जो कि अपनी प्रशासनिक कुशलता और व्यावसायिक बुद्धिमता के लिए प्रसिद्ध है। चड्डा शब्द की उत्पत्ति को कुछ विद्वान आदर और सम्मान के प्रतीक के रूप में देखते हैं। चड्डा समुदाय पारंपरिक रूप से अपनी बौद्धिक क्षमताओं के कारण समाज के अग्रणी वर्गों में गिना गया। वर्तमान समय में राघव चड्डा अपनी राजनीतिक दिशा बदलने के कारण सुर्खियों में हैं। 24 अप्रैल 2026 को उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी आम आदमी पार्टी को अलविदा कहते हुए भारतीय जनता पार्टी की

सदस्यता ग्रहण कर ली। उनके इस साहसिक निर्णय ने देश की राजनीति में एक बड़ी उथल-पुथल मचा दी क्योंकि उन्होंने अकेले नहीं बल्कि दो तिहाई सांसदों के साथ भाजपा का दामन थाम कर एक बड़ा राजनैतिक संदेश दिया। चड्डा पिछले कुछ वक्त से अपनी ही पार्टी के भीतर कुछ निर्णयों से बेहद असंतुष्ट और उपेक्षित महसूस कर रहे थे। राज्यसभा में उपनेता का पद छिन जाने के बाद उनकी नाराजगी खुलकर सामने आई थी।

उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर यह स्वीकार किया कि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा और उन्हें जानबूझकर मौन रहने पर विवश किया गया। जिससे वे अपनी ही पार्टी में घुटन महसूस कर रहे थे। उनके अनुसार वे लंबे वक्त से एक गलत वैचारिक धरातल पर थे और अब वह सही स्थान पर हैं। राजनीति के अलावा लोग अब उनके निजी जीवन और आस्था के बारे में विस्तार से जानने के इच्छुक हैं। राघव चड्डा सनातन हिंदू धर्म के अनुयाई हैं और उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से अपनी धार्मिक पहचान को गर्व के साथ स्पष्ट किया।

उनके जीवन में धर्म और संस्कृति का गहरा महत्व है। जिसे उनकी परिणति चोपड़ा के साथ हुई। शादी में भी स्पष्ट रूप से देखा गया। यह विवाह पूर्णतः पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों और पवित्र मंत्रोचार के बीच संपन्न हुआ था। उनकी पत्नी परिनीति चोपड़ा भी हरियाणा के अंबाला के एक प्रतिष्ठित पंजाबी हिंदू खत्री परिवार से संबंध रखती हैं। चोपड़ा उपनाम भी खत्री समाज का एक बड़ा हिस्सा है जो कि मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा में अपनी समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों के लिए जाना जाता है। इस प्रकार राघव चड्डा और परिणीति चोपड़ा दोनों ही सामान सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि साझा करते हैं। चड्डा का यह नया सफर अब भारतीय राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। डाउनलोड द वन इंडिया ऐप नाउ।

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