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इजरायल में सच हो रही बाइबिल-कुरान की भविष्यवाणी? डरे यहूदी

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एक पेचीदा घटना है, हैरानी पैदा करने वाली है। उसे लेकर कहा जा रहा है कि इजराइल का अंत निकट है या विनाश की यह चेतावनी है या तबाही का यह अलर्ट है जिसे आप अगर हिंदू माइथोलॉजी के हिसाब से कहें तो क्या कलयुग का खात्मा या प्रलय जैसी कोई चीज इस तरह की बातें कही जा रही है। नमस्कार मैं ललित प्रजापति इसी के इर्द-गिर्द आज बात करेंगे। एक घटना हुई है दरअसल उसके वैज्ञानिक पहलुओं पर भी बात करेंगे और क्या उसे लेकर कहा जा रहा है वो भी हम आपको बताएंगे। इसमें यशाह मतलब बाइबल का जिक्र है और कुरान का भी जिक्र है। वो भी हम आपको बताएंगे। लेकिन सबसे पहले घटना क्या हुई है वो जान लीजिए। दरअसल अचानक जो दक्षिणी इजराइल का एक शहर है वो कमर्शियल हब भी है। वाणिज्य केंद्र भी है नेतिवोट। दक्षिणी इजराइल का जो वाणिज्य केंद्र है नेतिवोट।

यहां पर हजारों की संख्या में एकदम से मधुमक्खियां टूट पड़ी और मधुमक्खियों के हमले ने जो लोग हैं उन्हें भी घरों के अंदर कैद कर दिया। स्थितियां इस तरह की दरअसल बन गई। तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] अब जब ये घटना हुई है तो तरह-तरह की बातें कही जाने लगी। बाइबल और कुरान में किस तरह की बातें कही गई है वो भी होने लगा। एक और घटना है उसे भी जोड़कर देखा जा रहा है। सिलसिलेवार मैं आपको बताता हूं। वैज्ञानिक क्या कह रहे हैं वो भी हम आपको बताएंगे। तो बीते कुछ सालों सेकि जो इजराइल है वो युद्ध में उलझा हुआ है और युद्ध में उलझा होने की वजह से बहुत सारे लोग इसे अलग-अलग तरीके से को-रिलेट करके जो यूजर हैं वो इसे कोरिलेट करके देख रहे हैं वो भी हम आपको बताएंगे।

दक्षिण इजराइल का शहर है नीतिवोट और मधुमक्खियों के बड़े झुंड गाड़ियों आम लोगों पर इन्होंने हमला कर दिए और इसके बाद सोशल मीडिया यूज़र्स इसे बुरे संकेत के तौर पर तबाही के बुरे संकेत के तौर पर इसे देखने लगे। क्या उन्होंने लिखा वो भी आपको बताएंगे। इससे पहले तेल अवीब में कौवों के बड़े-बड़े झुंड देखे गए थे और सोशल यूज़र्स का दावा है कि यह तबाही के जिक्र हैं जिनका यह तबाही के संकेत हैं, इशारा हैं। ये ये कहा जा रहा है इस तरह की बातें और इनका जिक्र बाइबल और कुरान में मिलता है। नेती वोट पर जो हमला हुआ उसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। इसमें ना सिर्फ आम लोगों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है बल्कि कुछ विमानों तक को उड़ान भरने में दिक्कत हुई है। इतनी मधुमक्खियों ने एक साथ हमला किया है। इजराइयली अधिकारियों को इससे पार पाने के लिए अपनी खास टीमें बनानी पड़ी और जो सोशल मीडिया के यूज़र्स हैं उनका दावा मैं आपको बताऊंगा।

लेकिन पहले थोड़ा वैज्ञानिक तत्व की बात कर ली जाए। वैज्ञानिक इसे लेकर क्या कुछ कह रहे हैं इस मधुमक्खियों के अटैक को लेकर वो हम आपको बताते हैं। वो इसे घटना और मौसम से जोड़कर देख रहे हैं कि ये एक पारिस्थितिकीय चेंज हो सकता है। ज्योग्राफिकल चेंज हो सकता है। वैज्ञानिकों का क्या कुछ कहना है? पहले वो जान लीजिए। अचानक यह हमला हुआ और 15 अप्रैल का ये पूरा घटनाक्रम है। बुधवार का यह पूरा घटनाक्रम है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसमी झुंड व्यवहार, पर्यावरणीय तनाव और पराग कण मधुमक्खियांकि पराग कण चूसती हैं। तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] शहरी इलाकों में उनके लिए एक अनुकूल मौसम दिखा और अचानक से वो वहां पर एक साथ आ गई। यह वैज्ञानिकों का दावा है। इस तरह का दावा किया जा रहा है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि बाकी हिस्से जो शहर के यानी नीति बोर्ड के जो बाकी हिस्से हैं उनमें रिहायशी इलाके भी शामिल हैं। वहां मधुमक्खियों के झुंड देखे गए और उसके बाद लगातार चिंता बढ़ने लगी। वैज्ञानिकों का तर्क ये है

कि मधुमक्खियों का ये नेचुरल एक झुंड था जैसे आमतौर पे नेचुरली निकलता है लेकिन हजारों मतलब आप तस्वीरों में देखेंगे तो हजारों की संख्या में ये मधुमक्खियां लाखों की संख्या में कहना चाहिए काउंट नहीं किया जा सकता है ना उस तरह से तो वैज्ञानिक ये कह रहे हैं कि ये नेचुरल है बिल्कुल नेचुरल है और आमतौर पर ये तब होती है जब किसी छत्ते में मधुमक्खियों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाए एक छोटी सी कॉलोनी है उसमें रहने के लिए ढेर सारे लोग पहुंच जाए तब इस तरह की स्थितियां बनती हैं और वसंत ऋतु में तापमान में वृद्धि के कारण फूल खिलते हैं और छत्ते की जो मधुमक्खियों हैं उनमें उनकी संख्या में तेजी से इजाफा होता है। तो जब एक लिमिट तक छत्ते का आकार पहुंच जाता है कॉलोनी का तो जो रानी मधुमक्खी है वो हजारों श्रमिक मधुमक्खियों को अपने साथ ले जाती है ताकि वो किसी नई जगह पर घोंसला बना सके। बिल्कुल नेचुरल प्रोसेस है। वैज्ञानिकों का यह कहना है। वैज्ञानिक यह भी नहीं मान रहे हैं कि यह कोई दुर्लभ व्यवहार है, दुर्लभ घटना है। यह जीवन चक्र का एक मधुमक्खियों के जीवन चक्र का एक अ एक पहलू है और इसी तरीके से उनका जीवन चक्र चलता है। इजराइल में उस घटना का सामान्य पहलू इसकी व्यापकता और शहरी परिवेश में होने की वजह से है। वैज्ञानिकों का यह कहना है कि वो हमलावर मुद्दा मुद्रा में मतलब अटैकिंग मोड में मधुमक्खियां नहीं थी। लोगों का कहना है कि मधुमक्खियां हमला कर रही थी क्योंकि रिहाइशी इलाके में हुआ है। तरह-तरह की बातें इसके लिए कही जा रही हैं और लोगों का ये कहना है कि दूर से देखने में तो जब ये झुंड मूव करते हैं तो ऐसा लगता है कि ये कोई आकृति बना रहे हैं। कोई क्रिएशन कर रहे हैं। लेकिन वही झुंड अगर एकदम पास आ जाए तब पता चलता है कि वो कितना जानलेवा हो जाता है। इसके अलावा लोग तेल अवीब की एक घटना का भी जिक्र कर रहे हैं। तेल अवब में इस तरह का घटनाक्रम हुआ था। जब बहुत सारे जो कौवे हैं वो आ गए थे। कुछ दिनों पहले का यह घटनाक्रम है। अब जो यूजर हैं वो क्या-क्या लिख रहे हैं? सोशल मीडिया पर यूजर क्या लिख रहे हैं? वो इसे जोड़कर देख रहे हैं तबाही से। बाइबल और कुरान का जिक्र किया जा रहा है।

कई लोग यशा याह 7 18 यशा याह 7 18 ये बाइबल के जिस हिस्से का जिक्र किया जा रहा है उसका हवाला दिया जा रहा है। इसमें ये कहा गया कि एक दिन मिस्र की नील नदी के डेल्टा से मधुमक्खियों को सिटी बुलाकर सिटी बजाकर बुलाया जाएगा। वो मैं आपके लिए लेकर आया हूं। मैं आपको बताऊंगा कि यशायाह और सूरह अल अशूर क्या कहता है। भारत का भी भारत के भी जो इंटरनेट यूजर हैं वो भी तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। उनका कहना है कि इजराइल में जो मधुमक्खियों का हमला हुआ है वो कुरान की सूरह अल अराफ से जुड़ा हुआ है। और इस आयत में कहा गया है जिसका जिक्र किया जा रहा है। 7 133 इसका नंबर है। जिसमें कहा गया है कि बाढ़, टिड्ढियां, मक्खियों, मेंढक यह एक साफ निशानी के तौर पर होते हैं। यह अहंकारियों और अपराधियों को संदेश है। अब इसमें यह भी हो सकता है कि लोग अपना नाराजगी जो है बहुत सारे लोग नेता नेऊ से नाराज हैं। वो इस तरह से नाराजगी जता रहे हो। बीते महीने की बात जो बार-बार रेफरेंस दिया जा रहा है। इजराइल के तेल अवीब शहर पर हजारों कौवों के मंडराने की घटनाएं भी सामने आई थी। कई तरह की चर्चाएं सामने आई। तबाही की निशानी के तौर पर इसे देखा गया। और अब इसके बाद जो मधुमक्खियों का झुंड है वो देखा जा रहा है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण इसके पीछे क्या है वो आपने जान लिया। अब जरा ये जान लेते हैं कि जिसका जिक्र किया जा रहा है। एक तो सूरह अल आराफ का जिक्र किया जा रहा है 7 133 वो क्या कहती है और यशा याह 7:18 ये बाइबल का चैप्टर है। यह क्या कहता है? उस समय यहोवा उन मक्खियों को जो मिस्र की नदियों के दूर-दूर के भागों में रहती हैं। उन मधुमक्खियों को जो अशूर देश में रहती हैं। सिटी बजाकर बुलाया जाएगा।

यह जिक्र बाइबल में है। यह पद परमेश्वर के न्याय को दर्शाता है। जहां मिस्र और अशूर की सेनाएं यहूदा पर आक्रमण करने के लिए बुलाई जाएंगी। मक्खियों और मधुमक्खियों के समान मतलब इतने झुंड में बुलाई जाएंगी। रेफरेंस यह है कि यह भविष्यवाणी दरअसल राजा आहाज के समय में यहूदा के खिलाफ अशुर और मिस्र के आसन्न सेनाओं के हमले की चेतावनी देती हैं। इसके प्रतीकात्मक अर्थ भी हैं। मक्खियां और मधुमक्खियां उन विनाशकारी विदेशी सेनाओं का प्रतीक हैं जो देश पर छा जाएंगी और परमेश्वर इन राष्ट्रों को सिटी बजा राष्ट्रों को सिटी बजाकर एक संकेत देंगे और परमेश्वर के की महत्ता को यह स्थापित करती हैं। यह भी यह संकेत देता है कि विश्वास की कमी के कारण यहूदा को विनाशकारी आक्रमणों का सामना झेलना पड़ेगा। यह हो गया यशायाह 7 18 सूर अल आराफ सात 133 ये क्या कहती है तो हमने उन पर तूफान और टिड्डियों और ज छोटे कीड़े और मेंढक और खून की निशानियां भेज दी। ये सब अलग-अलग खुली निशानियां थी। फिर भी वे घमंड करते रहे। वे अपराधी लोग थे। रेफरेंस है सात 133। यह कुरान का है। इससे पहले जो यशा का जिक्र हमने किया वो बाइबल का है। यह कुरान का है। विनाश की चेतावनी ये देती है। इसमें पांच मुख्य अज़ाब यानी पांच टाइप के विनाश का जिक्र है। ठीक है? क्या है वो? इसमें तूफान है, टिड्डियां हैं, जू या छोटे कीड़े हैं, मेंढक हैं और खून का जिक्र इसमें किया गया है। मूसलाधार बारिश और बाढ़ जो उनके घरों और फसलों को बर्बाद कर रही थी। तूफान के संदर्भ में टिड्डियां इन्होंने बची हुई फसलों और फलों को खाकर नष्ट कर लिया। जू और छोटे कीड़े जो लोगों के

शरीर और अनाज के भंडारों में घुसकर उन्हें बर्बाद कर रहे थे। मेंढक घर के अंदर खाने पीने की हर चीज में भर गए थे और खून यानी उनका पीने का जो पानी है वह खून में बदल गया था। यह जिक्र आपको मिलेगा कुरान में। यह निशानियां फिरौन और उनकी कौम को चेतावनी देने के लिए थी ताकि वह हजरत मूसा पर विश्वास करें और फिरौन की नाफरमानी छोड़ दें। इन खुली निशानियों के बावजूद वे घमंडी बने रहे। उन्होंने हजरत मूसा का विरोध जारी रखा। इसके परिणाम स्वरूप वे अपराधी यानी दुष्ट ठहराए गए। यह आयत घमंड और सच्चाई को झुठलाने के भयानक परिणाम को दर्शाती है। दोनों ही बातें हमने आपको बता दी। वैज्ञानिकों का तर्क क्या है इन मधुमक्खियों के पीछे? वैज्ञानिकों का कहना है ये कि एक छोटा सा छत्ता है, छोटी सी कॉलोनी है। उसमें ढेर सारी मधुमक्खियां रहने के लिए आ गई। तब रानी मधुमक्खी ने कहा कि चलो दूसरी जगह घर बनाते हैं और दूसरी जगह कॉलोनी बनाते हैं और फिर वो अपनी जो एक रानी मधुमक्खी होती है और श्रमिक मधुमक्खियां लेबर हनी बी फिर वो उन्हें लेकर दूसरी जगह चली जाती है। तो ये जब मूवमेंट होता है ये हजारों लाखों मधुमक्खियां एक साथ करती हैं। वैज्ञानिक ये भी कह रहे हैं कि पराग कण की उपलब्धता, फूलों की उपलब्धता, वसंत ऋतु की वजह से नए-नए फूलों का फूल आ रहे हैं और वह मधुमक्खियों को आकर्षित कर रहे हैं।

जिस वजह से मधुमक्खियों ने ये किया है। उनके व्यवहार में कहीं कोई आक्रामकता नहीं है। लोगों का कहना है कि उन्होंने हमला किया। मधुमक्खियों ने हमला किया। लोग तेल अवीव में पिछले महीने जो कौवे देखे गए थे उन्हें भी विनाश के संकेत से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसा नहीं है। मतलब इजराइल आपको लगता है कि बहुत बड़ा उसका डोम है। वो इतनी टेक्निक की बातें करता है। बड़े-बड़े जो बेस्ट आईटी माइंड्स हैं वो इजराइल के ही हैं। पर वहां कट्टरपथ रूढ़िवादी सोच वो भी उतनी ही हावी है।

यह हो गया जो वैज्ञानिकों का कहना है। और इसके अलावा कुछ लोगों को मौका भी मिला। कुछ लोगों को वो इसे बाइबल की यशाह 7 18 यानी विनाश की चेतावनी और सूरह अल आराफ कुरान का सूरह अल आराफ का सात 133वां जो आयत है उससे जोड़कर इसे देखा जा रहा है जिसमें तूफान आएगा विनाश आएगा बर्बादी बर्बादी हो जाएगी तबाही फैलेगी ये एक घटना है मधुमक्खियों के आने की क्या इसकी वजह है दोनों ही वजह हमने आपको बताई जो जिक्र कुरान और बाइबल में मिलता और जो वैज्ञानिक मानते हैं। नमस्कार।

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