कल से मेरे खिलाफ एक स्क्रिप्टेड कैंपेन चलाया जा रहा है। सेम भाषा, सेम बातें, सेम आरोप। यह कोई कोइंसिडेंस नहीं है बल्कि एक कोऑर्डिनेटेड अटैक है। पहले मैंने सोचा कि मुझे इसका जवाब नहीं देना चाहिए। फिर लगा कि कहीं एक झूठ को 100 बार बोला जाए, कुछ लोग मान ना ले। इसलिए मैंने सोचा कि जवाब दूं। आम आदमी पार्टी ने तीन आरोप लगाते हुए यह कहा कि इन तीन आरोपों की वजह से हम राघव चड्डा को पार्लियामेंट में बोलने का मौका नहीं देंगे।
राघव चड्डा के पार्लियामेंट में बोलने पर रोक इसलिए लगाई गई क्योंकि उन्होंने ये तीन गलतियां करी। मैं एक-एक करके इन तीनों पर आपसे बात करना चाहूंगा। पहला आरोप कि जब अपोजिशन पार्लियामेंट से वॉकआउ करता है, सदन से वॉकआउ करता है तो राघव चड्डा वहीं बैठे रहते हैं। वो वॉकआउ नहीं करते। यह सरासर झूठ है। सफेद झूठ। मैं चुनौती देता हूं। एक इंस्टेंस, एक दिन ऐसा बताइए जब अपोजिशन ने वॉकआउ किया हो और मैंने उनका साथ ना दिया हो।
मैं साथ में वॉकआउट नहीं किया हो। और पार्लियामेंट में तो हर जगह सीसीटीवी कैमरा है। आप सीसीटीवी कैमरा निकाल कर दिखा दीजिए। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। दूसरा आरोप लगाया कि राघव चड्डा ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर के इंपीचमेंट मोशन पर यानी कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने वाली जो याचिका थी उस पर साइन करने से मना कर दिया। दूसरा सफेद झूठ ना मुझे आम आदमी पार्टी के किसी भी नेता ने इस मोशन पर साइन करने के लिए कहा ना औपचारिक तौर पर कहा ना अनौपचारिक तौर पर कहा और आम आदमी पार्टी के राज्यसभा में कुल 10 सांसद हैं
जिनमें से छह या सात सांसदों ने इस मोशन पर खुद ही साइन नहीं किया तो भला इसमें मेरी क्या गलती खाली सारा दोष मुझ पर ही क्यों मढ़ा जा रहा है और इस मोशन के लिए राज्यसभा में कुल 50 सिग्नेचर चाहिए होते यानी कि 105 विपक्षी सांसदों में से मात्र 50 सिग्नेचर से यह याचिका पूरी हो जाती। तो इतना शोर क्यों? और तीसरा आरोप जो मुझ पर लगाया गया वो यह था कि राघव चड्डा डर गए हैं और इसलिए वो बेकार मुद्दे उठाते हैं।
पहली बात मैं बता दूं कि मैं पार्लियामेंट में शोर मचाने, चीखने, चिल्लाने, माइक तोड़ने या गाली देने नहीं गया। मैं वहां पर जनता के मुद्दे उठाने गया हूं। लोगों की बात करने गया हूं और मैंने कौन सा मुद्दा नहीं उठाया? मैंने जीएसटी से लेकर इनकम टैक्स की बात करी। पंजाब के पानी से लेकर दिल्ली की हवा का मुद्दा उठाया। हमारे सरकारी स्कूलों की हालत से लेकर कैसे पब्लिक हेल्थ केयर इंस्टीटशंस को मजबूत किया जाए।
इंडियन रेल्वेज में जो पैसेंजर्स ट्रैवल करते हैं उनकी समस्याएं रखी। यहां तक कि में्रुअल हेल्थ एक ऐसा मुद्दा जिसके बारे में लोग बात करने से कतराते हैं। वो बातें तक रखी बेरोजगारी से लेकर महंगाई तक तमाम मुद्दे उठाए। आप मेरे चार साल का पार्लियामेंट का ट्रैक रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए और मैं पार्लियामेंट में इंपैक्ट क्रिएट करने गया हूं।
मैं पार्लियामेंट में रकस क्रिएट करने नहीं गया। ये टैक्स पेयर के पैसे से जो पार्लियामेंट चलती है, उस टैक्स पेयर के मुद्दे उठाने मैं पार्लियामेंट में गया हूं। अंत में मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि जो लोग आज मुझ पर आरोप लगा रहे हैं, झूठे झूठे आरोप लगा रहे हैं कि हर झूठ को बेनकाब किया जाएगा और हर सवाल का जवाब दिया जाएगा क्योंकि मैं घायल हूं इसीलिए घातक हूं