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केजरीवाल को बंगला गिफ्ट किया था, कौन हैं राघव चड्ढा की जगह लेने वाले अशोक मित्तल..

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अशोक मित्तल कब उन्होंने पॉलिटिक्स जॉइ किया क्या है अरविंद केजरीवाल से कनेक्शन इनके राज्यसभा एमपी चुने जाने के बाद पार्टी और उन दिनों दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर क्या-क्या आरोप लगे?
लवली नाम से क्या है विशेष लगाव? आज की इस वीडियो में हम सारी जानकारी देंगे। जब 2 अप्रैल को आप एमपी राघव चड्ढा को राज्यसभा के डिप्टी लीडर के पोस्ट से हटाया गया तो उनके पॉलिटिक्स के साथ-साथ एक सवाल सबके मन में उठा कि अब राघव चड्ढा की जगह कौन लेगा? इस सवाल का जवाब अब मिल गया है।

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा एमपी अशोक मित्तल ने राघव चड्ढा को रिप्लेस किया है। जब साल 2022 में आपने अपने राज्यसभा के एमपीस की लिस्ट जारी की थी तो उस लिस्ट में क्रिकेटर प्रोफेसर नेता के साथ-साथ एजुकेशनिस्ट कम बिजनेसमैन का भी नाम था जो लोगों को खूब हैरान किया। नाम था लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर अशोक मित्तल का। कौन है अशोक मित्तल? कब उन्होंने पॉलिटिक्स जॉइ किया?

क्या है अरविंद केजरीवाल से कनेक्शन? इनके राज्यसभा एमपी चुने जाने के बाद पार्टी और उन दिनों दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर क्या-क्या आरोप लगे? लवली नाम से क्या है विशेष लगाव? आज की इस वीडियो में हम सारी जानकारी देंगे। अशोक मित्तल का जन्म 10 सितंबर 1964 को पंजाब के जालंधर में हुआ। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उनके पिता बलदेव राज मित्तल मूल रूप से राजस्थान के जयपुर के कोटपुतली एरिया से काम के सिलसिले में पंजाब आए थे। कोटपुतली वही एरिया है जो अपने हेरिटेज इंडस्ट्रीज के लिए जाना जाता है।

फिलहाल यह राजस्थान का नया नवेला जिला है जो साल 2023 में ही बना है। पंजाब आकर अशोक मित्तल के पिता ने एक आर्मी कांट्रेक्टर के लिए काम करना शुरू किया। इसी दौरान उन्होंने एक कॉन्ट्रैक्टर से ₹500 उधार लिए और साल 1961 में जालंधर में एक मिठाई की दुकान खोली। मिठाई की दुकान से कैसे संसद तक का सफर तय किया इस किस्से पर हम बाद में आएंगे। उसके पहले हम जानते हैं

अरविंद केजरीवाल का मित्तल कनेक्शन। शुरुआत करते हैं साल 2022 से। दो साल 2022 में जब आम आदमी पार्टी ने अशोक मित्तल को राज्यसभा भेजने का डिसीजन लिया तब पार्टी और केजरीवाल पर आरोप लगे कि पार्टी ने अपने वन ऑफ द फाइनेंसर को राज्यसभा भेजा है। पंजाब के भोलाथ कॉन्सीट्यूएंसी के कांग्रेस एमएलए सुखपाल सिंह खैरा ने आम आदमी पार्टी के डिसीजन को क्वेश्चन किया।

उन्होंने कहा कि क्या बिना राजनीतिक आधार वाला हल्का नेता बीजेपी का सामना कर पाएगा? अपनी मेहनती नेताओं को भेजने के बजाय आपने राज्यसभा की सीट एक पैसे वाले व्यक्ति को दे दी क्योंकि वह चंडीगढ़ या पंजाब के अन्य मुद्दों पर कभी प्रभावी ढंग से आवाज नहीं उठा पाएंगे। आपने यह सीट एक ऐसे व्यापारी को बेच दी है जो अपनी हैसियत बढ़ाने के लिए इसे चाहता है। बीएसपी नेता बलविंदर कुमार ने भी आपको घेरा था।

उन्होंने कहा था कि अशोक मित्तल को दी गई राज्यसभा की सीट का मकसद पंजाब में अरविंद केजरीवाल के आधार को मजबूत करना है ताकि वे उन्हें आर्थिक रूप से और केंद्र में अपनी राजनीतिकत्वाकांक्षाओं में मदद कर सकें। उन्होंने आरोप लगाया केजरीवाल राज्य के हित के बजाय अपने व्यक्तिगत फायदे को देख रहे हैं। इन तमाम राजनीतिक बयानों के बीच अशोक मित्तल ने यह बयान दिया था कि राज्यसभा का एमपी बनना उनके लिए लोगों की ओर से दिए गए प्यार को लौटाने का एक मौका है। वह हमेशा से पंजाब के लिए कुछ करना चाहते थे।

यह उनके लिए बेहतरीन मौका है। अब आते हैं एक और बंगले वाले किस्से पर जिस बंगले में केजरीवाल जेल काटने के बाद रुके थे। साल 2024 में साल 2024 में अरविंद केजरीवाल दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफा दे चुके थे और उसके बाद वह बेघर हो गए थे। मतलब दिल्ली में रहने के लिए उनके पास कोई जगह नहीं थी। तब उनको दिल्ली में अपना बंगला अशोक मित्तल ने दिया था। उस दौरान आपके कई कार्यकर्ताओं ने केजरीवाल को रहने का ऑफर दिया था।

पर केजरीवाल ने चुना फिरोज शाह रोड का बंगला नंबर पांच। माना जा रहा था। यह लुटियंस दिल्ली का बंगला आप पार्टी ऑफिस के नजदीक था। इसलिए केजरीवाल ने इस बंगले को चुना। अब आते हैं मिठाई की दुकान और मित्तल का लवली कनेक्शन पर। जब अशोक मित्तल के पिता ने पंजाब के जालंधर में अपनी पहली मिठाई की दुकान खोली तो उस मिठाई की दुकान का नाम रखा गया स्वीट हाउस।

पर इसके इनोगेशन में एक आर्मी के ब्रिगेडियर आए थे। उन्हें दुकान का नाम नहीं जचा। उन्होंने कहा यह तो एक कॉमन नाम है। फिर अशोक मित्तल के पिता ने उन्हें नाम सजेस्ट करने को कहा तो उन्होंने अपनी एक पोती का जिक्र किया और उन्होंने कहा कि वह पोती उन्हें बहुत प्यारी है जिसका नाम है लवली। फिर क्या था? दुकान का नाम पड़ा लवली स्वीट हाउस। और वह दुकान खूब चली। परिवार ने लवली नाम को लकी माना।

उसके बाद मित्तल परिवार ने जिस भी बिजनेस की शुरुआत की उन सबके नाम लवली नाम के ऊपर रखा गया और यहीं से जुड़ा है लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी का किस्सा जिसके फाउंडर और चांसलर हैं अशोक मित्तल। अशोक मित्तल की जब कहानी को देखते हैं तो शुरुआत इन्होंने मिठाई की दुकान से किया था। फिर एजुकेशनिस्ट कम बिजनेसमैन बने। पर पॉलिटिक्स से दूर-दूर तक नाता हमें दिखाई नहीं देता है।

यह भारत सरकार की कई कमेटी के सदस्य भी रह चुके हैं। जैसे कमिटी ऑफ डिफेंस, कमेटी ऑफ फाइनेंस, फरवरी 2026 में उन्हें इंडिया यूएसए पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप का सदस्य भी चुना गया। मिठाई की दुकान से एलएलबी की डिग्री यूनिवर्सिटी चांसलर सांसद से अब आपका डिप्टी लीडर तक के सफर में बहुत ज्यादा पॉलिटिकल अप्स एंड डाउन्स तो नहीं दिखते हैं

बट डायवर्सिटी जरूर दिखती है। फिलहाल उन्होंने कहा है कि राघव चड्ढा ने खुद उन्हें डिप्टी लीडर बनने की बधाई दी है और अपने नए रोल को वो रिप्लेसमेंट के तौर पर नहीं देखते हैं। उन्होंने कहा है कि पार्टी सभी को मौका दे रही है

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