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ट्रंप के सामने ईरान ने रखी 3 शर्तें, मान लेंगे तो बंद हो जाएगा यु!!द्ध?..

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तो अब तक अमेरिका ईरान के सामने शर्त रख रहा था। लेकिन अब देखिए ईरान ने इस 12वें दिन अपनी शर्त रख दी है। क्योंकि जिस तरह से युद्ध फैलता चला जा रहा है और उसका असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। अब ट्रंप चाहते हैं कि युद्ध समाप्त हो जाए। बातचीत का रास्ता निकले। लेकिन ईरान ने कह दिया वो जब चाहेगा तभी बातचीत करेगा। और उसने जो शर्तें रखी है वो क्या शर्त है आपको बताते हैं जो ईरान की तरफ से सामने आई है या ईरान चाहता है कि इस पर अमेरिका रिस्पांस दे। देखिए तीन शर्त है। पहला तो अरब मुल्कों में जितने भी अमेरिकी बेससेस हैं उनको हटा दिया जाए। यानी यहां से बोरिया बिस्तर समेट कर अमेरिका जो है वो चला जाए। इस तरह से ईरान का कहना है। दूसरी शर्त है कि जो अब तक बर्बादी ईरान में हुई है उसकी उसकी भरपाई या भुगतान अमेरिका करे तब जाकर वो सोचेंगे यानी कि ईरान सोचेगा कि इस युद्ध को खत्म करना है। तीसरी सबसे बड़ी बात है कि युद्ध किस तरह से बंद होगा? किन शर्तों के साथ बंद होगा?


यह ईरान तय करेगा। देखिए शर्तें अब दोनों तरफ से रखी जा रही है। पहले तो अमेरिका ने बहुत सारी शर्तें रखी थी। रिजीम चेंज की बात हो रही थी। परमाणु कार्यक्रम बंद करने की बात ईरान की हो रही थी। इसके अलावा जो लॉन्ग रेंज की मिसाइलें हैं उसको बंद करने की बात हो रही लेकिन अब ईरान की शर्तें अमेरिका के लिए मुसीबत बन गई है। क्योंकि ईरान ने जिस तरह से हॉर्मूस में अमेरिका को फंसा दिया है। अमेरिका की किरकिरी खुद उनके देश में और बाकी दुनिया में भी हो रही है कि आखिर ट्रंप और नितिन याू ने ये किया क्या है। अब देखिए लेटेस्ट हमला आपको बताते हैं। आपसे कुछ देर पहले बताया जा रहा है कि क़तर में जबरदस्त तरीके से हमला किया गया है।

क्योंकि देखिए कतर जो था वह अमेरिका, इजराइल और इधर अगर अमेरिका और ईरान की बात की जाए उसके बीच में मध्यस्था कर रहा था। लेकिन जिस तरह से कतर में लगातार हमले हो रहे हैं। क़तर ने कह दिया है कि ऐसे में अगर हमला बंद ईरान नहीं करता है तो फिर मध्यस्था की तो बात छोड़ दीजिए। हम भी अपनी तरफ से ईरान पर हमला कर सकते हैं। यानी क़तर ने भी अब अपने आंख दिखाए हैं। देखिए पीछे कुछ दिनों में हमने देखा सात आठ देश खाड़ी देश के हैं जो कि इस वक्त त्राहिमाम त्राहिमाम कर रहे हैं। अब अगर पूरे पूरे मिडिल ईस्ट की बात की जाए तो यहां पर पूरी अर्थव्यवस्था जो है वो एक तरह से कह लीजिए पर्यटन पर है या फिर बाहर से आए लोगों पर है।

यहां पर जिस तरह से विकास हुआ उसको लेकर जो अरब देश थे जो कि अपने आप को लिबरल मानते हैं उनके लिए इस वक्त बड़ी मुसीबत की घड़ी है। उस पर से स्टेट ऑफ हार्मूस में जो तेल था या फिर जो गैस थी उनकी आवाजाही को रोक दिया गया है। बारूदी सुरंग बिछा दी गई है। एक तरह से कह लीजिए कि पूरा स्ट्रेट ही डेथ स्ट्रीट बन गया है। यहां पर कभी भी कोई भी बड़ा हमला और उसके बाद किस तरह से नावें उड़ रही हैं

क्योंकि जहाज पीछे हमने देखा कि दावा था अमेरिका का कि उन्होंने 16 ईरानी जहाजों को उड़ा दिया। इसी तरह से ईरान का कहना है कि अगर यहां से एक भी जहाज निकला तो फिर उसे भी खत्म कर दिया जाएगा। तो ईरान अब पूरी तरह से उसने एक स्ट्रेटजी बनाई थी और ये स्ट्रेटजी अब जो जानकार हैं या वॉर एक्सपर्ट है वो बता रहे हैं कि देखिए इसको अट्रिक्शन नीति कहा जा रहा है। एट्रिशन नीति होता क्या है?

यानी धीरे-धीरे थकाने की नीति। सामने वाले को आप इतनी धीरे-धीरे मारिए कि उनकी कमर खुद ही टूट टूट जाए। यानी धीरे-धीरे हमला कर रहा है। धीरे-धीरे अपनी स्ट्रेटजी बना रहा है। पहले उसने जगह-जगह एयर बेसेस थे, ईरान के जो इजराइल के थे या फिर अमेरिकी ठिकाने थे उनको हमला किया। बाद में उसके बाद कहा जा रहा है कि चोक कर दिया गया है स्ट्रेट ऑफ औरमूस को उसको चोक कर दिया है वहां से किसी तरह से तेल और गैस की आमद वहां से जहाज नहीं निकल पा रहे हैं और उसका कहना है यह तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका और इजराइल पीछे नहीं हटते हैं

तब तक इसे बंद किया जाएगा| अब यह देखिए जो थकाने की नीति है उसमें नुकसान दोनों तरफ का होता है क्योंकि ईरान के लिए कहा जा रहा है कि वो 6 महीने के लिए अभी फिलहाल तो पूरी तरह से युद्ध में बने रहने की बात कह रहा है। मिसाइलें अभी भी ईरान में बनाई जा रही है। उसकी एक-एक ड्रोन की बात की जाए। बड़ी कम कीमत की ड्रोन है और यही कहा जा रहा है कि 15 1600 में वो ड्रोन बनाते हैं और फिर जाकर जो इजराइल है और अमेरिका है उनके बड़े-बड़े इक्विपमेंट से गिरते हैं। यानी उनके जो एयर डिफेंस सिस्टम है जिसमें थर्ड है,

एयर सीलिंग है उनको किस तरह से तबाह कर रहे हैं। भारी नुकसान है। एक 1600 का ड्रोन आज समझिए कई 100 का उनका जो पूरा सिस्टम है डिफेंस उसको बर्बाद कर रहा है। एयर बेससेस को बर्बाद कर रहा है। उसमें अगर किसी का ज्यादा नुकसान हो रहा है तो वो है अमेरिका और इजराइल। इधर ईरान ने तो कह दिया है कि देखिए अब बातचीतवाचीत तो कुछ होगी नहीं क्योंकि बार-बार हम अपने पीठ को अमेरिका की तरफ कर कर यह नहीं कहेंगे कि हम आओ और हमें पीठ में हमारे चूरा गोपो। इसीलिए वो युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

अपनी शर्तें उन्होंने रख दी है। इस शर्तों को लेकर अमेरिका तो नहीं मानेगा। ट्रंप जिस तरह के व्यक्ति हैं और उनकी जो शख्सियत है वह तो कभी नहीं मानेंगे लेकिन फिलहाल यह युद्ध आगे बढ़ेगा इसकी पूरी उम्मीद की जा रही है क्योंकि यहां से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। सभी ने अपनी-अपनी शर्तें रख दी है। फिर ऐसे में युद्ध का होगा क्या? हर रोज जब वीडियो बनाती हूं तो यही सवाल के साथ छोड़ के जाती हूं कि इस युद्ध का होगा क्या? आखिर कौन पीछे हटेगा?
क्या यह युद्ध जल्दी खत्म होगा? या फिर जिस तरह की आशंका है पूरी दुनिया में इस युद्ध को लेकर मंदी छाएगी। क्या कोई बीच का रास्ता निकलेगा? क्या दोनों या तीनों देश बैठकर कोई बीच का रास्ता निकालेंगे?


या फिर कहीं ना कहीं इससे पूरी दुनिया में एक तरह से कह लीजिए विनाश और मंदी का दौर शुरू होगा। और किस तरह से आगे यह युद्ध बढ़ता है। इसमें कौन-कौन कूदता है? क्योंकि देखिए रूस की तरफ से भी तमाम फैसिलिटीज उपलब्ध कराई जा रही है ईरान को। उधर अमेरिका और पुतिन की बातचीत होती है। वह यह कहते हैं कि आप मध्यस्था कीजिए। लेकिन दोनों अपनी-अपनी बातों पर अड़े हुए हैं।

अमेरिका भी और ईरान भी। अब यह देखना होगा कि आगे और किस तरह के हमले होते हैं। किस तरह के वार होते हैं। हम तो बस यही देखने के लिए बैठे हैं कि किसने-किस पर कितनी मिसाइलें दागी या किसकी कौन सी जगह बर्बाद हुई। यह अपडेट लगातार हम आपको देते हैं

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