मिडिल ईस्ट में जंग का माहौल लगातार खतरनाक होता जा रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब 11वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हर गुजरते दिन के साथ तनाव और बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के बीच करीब 1 घंटे तक फोन पर हुई बातचीत। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब मिडिल ईस्ट से लेकर यूरोप तक दो बड़े युद्ध ईरान संकट और रशिया यूक्रेन वॉर दुनिया की राजनीति को हिला रहे हैं।
आखिर इस बातचीत में ऐसा क्या हुआ और क्या रूस इस जंग को खत्म करने में कोई भूमिका निभा सकता है? नमस्कार, मैं हूं आपके साथ गरिमा शर्मा और आप देख रहे हैं india.com। फ्लोरिडा में मीडिया से बातचीत करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया कि उनकी और व्लादमीर पुतिन की यह बातचीत ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार हुई है। ट्रंप के मुताबिक इस बातचीत के दौरान पुतिन ने कहा कि रूस ईरान युद्ध को खत्म कराने में वह मदद करना चाहते हैं और इसके लिए वह मध्यस्थता कराने की भी तैयारी कर चुके हैं।
लेकिन ट्रंप ने इस पर अलग प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पुतिन से कहा है कि अगर रूस वास्तव में किसी युद्ध को खत्म कराना चाहता है तो सबसे पहले रूस यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने में कदम उठाए क्योंकि वह संघर्ष भी दुनिया के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। इसी दौरान ट्रंप ने एक और बड़ा दावा किया। ट्रंप ने कहा कि पिछले 10 दिनों में अमेरिकी सेना ने ईरान के 51 जहाजों को डुबो दिया है और हजारों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
ट्रंप का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने और क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और कई देश इस संघर्ष के बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदले की आशंका जता रहे हैं। कुल मिलाकर ईरान, अमेरिका, इजराइल संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय टकराव नहीं रह गया है।
इसमें रूस जैसे बड़े वैश्विक खिलाड़ी भी एक्टिव होते नजर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या रूस की मध्यस्थता से यह युद्ध थम पाएगा या मिडिल ईस्ट में यह टकराव और भी बड़ा रूप ले सकता है? दुनिया की नजरें फिलहाल इसी पर टिकी हुई है। आप अपनी राय हमें कमेंट्स में जरूर बताएं