[संगीत] क्या आधुनिक युद्ध केवल मिसाइलों और ड्रोनों से लड़ा जाता है या फिर जीत और हार का फैसला पेंट और ब्रश से भी हो सकता है? ईरान और इजराइल के संघर्ष के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के सैन्य विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया है। दावा किया जा रहा है कि ईरान ने अपनी चालाकी से दुनिया की सबसे आधुनिक सेनाओं में से एक इजराइल को बेवकूफ बना दिया। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इजराइल ने जिसे ईरानी हेलीकॉप्टर समझकर तबाह किया वो सिर्फ सड़क पर बनी एक पेंटिंग थी। पूरा विवाद 4 मार्च को शुरू हुआ जब इजराइली रक्षा बलों आईडीएफ ने एक इंफ्रारेड फुटेज जारी की। वीडियो में एक मिसाइल ईरानी सैन्य ठिकानों पर खड़े एक Mi7 हेलीकॉप्टर को सटीक निशाने पर लेकर तबाह करती दिख रही है। इजराइल ने इसे अपनी बड़ी कामयाबी बताया। लेकिन कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर एक अलग ही कहानी वायरल होने लगी।
इंटरनेट पर ऐसी कई तस्वीरें और सेटेलाइट इमेजरी शेयर की जा रही [संगीत] हैं जिसमें दावा किया जा रहा है कि ईरान ने अपने हवाई अड्डों और डामर की सड़कों पर फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर की हूबहू दिखने वाली आकृतियों या पेंटिंग्स कर रखी हैं। थर्मल फुटेज में हेलीकॉप्टर की आकृति असामान्य रूप से चपटी या फ्लैट दिख रही है। आलोचकों का कहना है कि धमाके के बाद धातु के टुकड़े उछलने के बजाय सिर्फ धुआं और आग दिखी जैसे कंक्रीट पर धमाका हुआ हो। अगर यह सच है तो इजराइल ने लाखों डॉलर के प्रसीजन गाइडेड मिसाइल सिर्फ पेंट को जलाने में बर्बाद कर दी। युद्ध में दुश्मन को गुमराह करना कोई नई बात नहीं है। मिलिट्री डिसेप्शन यानी झांसा देने की इस कला में नकली टैंक फूलने वाले हवाई जहाज और पेंट किए गए डेको का इस्तेमाल दशकों से होता आया है। कुछ लोगों ने लिखा कि ईरान ने लॉ पोस्ट तकनीक का इस्तेमाल कर इजराइल और अमेरिका के हाईटेक सर्विलांस सिस्टम को चकमा देने की कोशिश की है। एक यूजर ने लिखा तुमने अपनी खुद की फजीहत कराने वाला वीडियो क्यों पोस्ट किया? अगर यह असली हेलीकॉप्टर होता तो बमबारी के बाद इसके विंग्स वैसे [संगीत] नहीं दिखते जैसे पहले थे। ओ बेवकूफों तुमने एक पेंटिंग पर बम गिरा दिया। एक और यूजर ने लिखा इजराइल बच्चों से भरे स्कूलों और जमीन पर बनी चौक की पेंटिंग्स पर बम गिराने में माहिर है। हालांकि इजराइल के समर्थकों का तर्क अलग है। उनका कहना है कि इंफ्रारेड फुटेज में जो छाया शैडो या हीट सिग्नेचर दिख रहे हैं वो केवल पेंटिंग से पैदा करना नामुमकिन है। कुछ एक्सपर्ट्स का दावा है कि धमाके की तीव्रता बताती है कि वहां कोई ईंधन से भरी वस्तु मौजूद थी। एक यूजर ने लिखा तुम लोग सच में मंदबुद्धि हो। वो साफ तौर पर ब्लेड की परछाई है। वो कोई छलावा नहीं था। एक यूजर ने लिखा वो एक असली हेलीकॉप्टर है। क्या तुम्हें समझ नहीं आता कि थर्मल इमेजरी कैसे काम करती है? एक और यूजर ने लिखा धुआं आमतौर पर पेंटिंग्स से नहीं [संगीत]
निकलता। एक यूजर ने लिखा तुम लोग झूठे और बेवकूफ हो। पेंटिंग्स की परछाई नहीं होती। इजराइली सेना ने अब तक इन दावों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया [संगीत] है। लेकिन सोशल मीडिया पर असली बनाम पेंटिंग की जंग तेज हो गई है। ऐसी एक और तस्वीर वायरल हो रही जिसमें तीन फाइटर जेट्स की आकृति नजर आ रही है और बीच में एक बम गिरा है। दावा किया गया कि यहां भी ईरान ने इजराइयली सेना को बेवकूफ बना दिया और अरबों डॉलर की मिसाइल इजराइल ने पेंटिंग पर गिरा दी। गाजा से लेकर तेहरान और लेबनान सीमा तक मिडिल ईस्ट का युद्ध क्षेत्र अब केवल जमीन पर नहीं बल्कि स्क्रीन पर भी लड़ा जा रहा है। यह विवाद साबित करता है कि आधुनिक युद्ध में एक वायरल वीडियो किसी मिसाइल हमले जितना ही असरदार हो सकता है। क्या यह ईरान की चालाकी थी या इजराइल का सटीक प्रहार? सच जो भी हो पर इस इंफॉर्मेशन वॉर ने युद्ध के अगले चरण को और भी रहस्यमई बना दिया है। ईरान और अमेरिका इजराइल के बीच चल रहा युद्ध हर गुजरते दिन के साथ और ज्यादा खतरनाक होता जा रहा है। दुनिया को उम्मीद थी कि हालात जल्दी शांत होंगे। लेकिन मैदान में आ रही नई तस्वीरें बिल्कुल उलट संकेत दे रही हैं। हमले की शुरुआत में अमेरिका ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामने को निशाना बनाकर बड़ा झटका दिया। इस घटना से तेहरान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया हैरान रह गई। लेकिन इसके बाद ईरान ने जिस तरीके से जवाब दिया है,
उसने युद्ध की दिशा ही बदल दी है। तेहरान ने सीधे उन अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया जो खाड़ी क्षेत्र में फैले हुए हैं। मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए ईरानी सेना ने अमेरिका के एयर डिफेंस नेटवर्क को कमजोर करने की रणनीति अपनाई। जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया है, वहां अमेरिका का हाईटेक थर्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात था जिसे अब तक दुनिया का सबसे मजबूत एयर डिफेंस में गिना जाता रहा है और माना जा रहा है कि अमेरिका ने इसी था के जरिए ईरान पर हमला किया था। ईरान ने यूएई, जॉर्डन और क़तर में स्थित अमेरिकी रडार सिस्टम को नेस्तानाबूद कर दिया है। सेटेलाइट इमेज में इन तीनों देशों में ईरानी अटैक से हुए तबाही के मंजर को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। सबसे पहले बात करते हैं जॉर्डन की। सेटेलाइट तस्वीरों में पता चला है कि जॉर्डन के मुफाक सालती एयरबेस पर तैनात थार सिस्टम के रडार को सटीक मिसाइल हमले में गंभीर नुकसान पहुंचा है। यह वही एडवांस रडार है जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से बैलेस्टिक [संगीत] मिसाइलों और ड्रोन को पहचान सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने इस रडार को खत्म करने के लिए एक से ज्यादा मिसाइलों का इस्तेमाल किया। जिससे एयरबेस के पास जमीन में बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। यानी अमेरिका ने जहां से ईरान को जख्म दिया वहीं पर ईरान ने हमला किया है और यह हमला बेहद सटीक था। वहीं क़तर की बात करें तो सेटेलाइट इमेजरी कंपनी प्लेनेट लैब्स द्वारा जारी तस्वीरों में कतर के अलखोर रडार साइट पर हुए हमले से नुकसान को साफ देखा जा सकता है। यह रडार साइट अमेरिका के सबसे बड़े मिडिल ईस्ट एयरबेस अल उदैद एयरबेस के उत्तर में स्थित है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस हमले में अमेरिका के अत्याधुनिक बैलेस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम एएनएफपीएस 132 रडार को नुकसान पहुंचा है। इस सिस्टम की कीमत लगभग 1.1 बिलियन करीब ₹9000 करोड़ बताई जाती है। यह रडार अमेरिकी सेना के लिए बेहद अहम है क्योंकि यह लगभग 5000 कि.मी. तक की दूरी में बैलेस्टिक मिसाइलों का पता लगा सकता है। इस रडार के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को दुश्मन के मिसाइल लॉन्च होने की शुरुआती चेतावनी मिलती थी। एक्सपर्ट्स के माने इस रडार को नुकसान पहुंचने से [संगीत] खासकर खाड़ी देशों के लिए मिसाइल हमलों की चेतावनी का समय अब कम हो सकता है। वहीं दावा किया जा रहा है कि ईरान की सेना यानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉप्स ने इस रडार साइट को निशाना बनाया। कुछ आकलनों के अनुसार यह हमला मिसाइल से नहीं बल्कि एक सुसाइड ड्रोन के जरिए किया गया हो सकता है। वहीं यह रडार सिस्टम दुनिया में बहुत कम जगहों पर तैनात है। अमेरिका के पास ऐसे रडार अपने देश में कुछ ही ठिकानों पर हैं। जबकि विदेश में इनके प्रमुख ठिकाने ब्रिटेन, ग्रीनलैंड और कतर जैसे रणनीतिक इलाकों में है। सेटेलाइट तस्वीरों से खाड़ी क्षेत्र के कई अन्य सैन्य ठिकानों और इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नुकसान पहुंचाने के संकेत मिले हैं।
इससे साफ होता है कि क्षेत्र में चल रहा सैन्य टकराव धीरे-धीरे और व्यापक होता जा रहा है। यही नहीं यूएई में भी दो अलग-अलग सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। रोवेस और सादे इलाके में मौजूद सैन्य परिसरों की कई इमारतें हमलों में क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इनमें वे वाहन, शेल्टर और स्ट्रक्चर भी शामिल बताए जा रहे हैं। जहां थर्ड सिस्टम के हिस्से रखे जाते हैं। यानी कि एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की यह रणनीति साफ है कि अगर अमेरिका के एयर डिफेंस और रडार नेटवर्क को कमजोर कर दिया जाए तो उसके सैन्य ऑपरेशन भी मुश्किल हो जाएंगे। यही वजह है कि तेहरान ने सीधे उन ठिकानों को निशाना बनाया है जो अमेरिकी रक्षा व्यवस्था की रीड माने जाते हैं। अब फिलहाल इस पूरी रिपोर्ट पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताएं। बने रहिए लाइव हिंदुस्तान के साथ।