बॉलीवुड में अक्सर फिल्मों का ऐलान बड़े जोश के साथ होता है। बड़े स्टार साइन किए जाते हैं। करोड़ों का बजट तय होता है और धूमधाम से मुहूर्त भी किया जाता है। लेकिन हर फिल्म अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाती। कई बार शूटिंग शुरू होने के बाद भी फिल्म बीच में ही रुक जाती है। कभी पैसों की कमी, कभी स्टार की डेट्स, कभी कानूनी परेशानी और कभी मेकर्स के फैसले। फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से बड़े-बड़े प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में रह जाते हैं।
आज हम बात करेंगे ऐसी पांच बॉलीवुड फिल्मों की जिनका ऐलान तो बड़े उत्साह के साथ किया गया था। इनमें बड़े डायरेक्टर थे, बड़े एक्टर थे और बड़े सपने भी थे। कुछ फिल्मों की शूटिंग भी काफी आगे तक पहुंच गई। लेकिन फिर भी यह फिल्में कभी रिलीज ही नहीं हो पाई। तो चलिए करते हैं शुरुआत। 1990 के दशक की शुरुआत में डायरेक्टर सुभाष घई एक बड़े स्केल की फिल्म बना रहे थे
जिसका नाम था शिखर। इस फिल्म में शाहरुख खान और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े एक्टर्स को लेने की योजना थी। कुछ रिपोर्ट्स में माधुरी दीक्षित का नाम भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ा बताया जाता है। उस समय सुभाष घई को बॉलीवुड का शोमैन कहा जाता था। उनकी फिल्में बड़े सेट्स, कमाल के गानों और शानदार स्टार कास्ट के लिए जानी जाती थी। उन्होंने पहले ही कर्मा, राम लखन और सौदागर जैसी सफल फिल्में दी थी।
इसीलिए जब शिखर का ऐलान हुआ तो इंडस्ट्री में इसे बहुत बड़े प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा था। फिल्म की तैयारी शुरू हो चुकी थी, मुहूर्त भी किया गया और ए आर रहमान ने कुछ गानों की रिकॉर्डिंग भी की थी। लेकिन इसी दौरान 1995 में उनकी फिल्म त्रिमूर्ति रिलीज़ हुई। यह उस समय बॉलीवुड की सबसे महंगी फिल्मों में से एक मानी जाती थी। फिल्म से काफी उम्मीदें थी,
लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। इसके बाद इतने बड़े बजट की नई फिल्म बनाना आर्थिक रूप से जोखिम भरा था। बाद में सुभाष भाई ने यह बताया कि त्रिमूर्ति के बाद आर्थिक दबाव के कारण शिखर को रोक दिया गया। इसके बाद उन्होंने 1997 में परदेस बनाई जो बड़ी हिट रही और साथ ही 1999 में शिखर फिल्म का गाना इश्क बिना फिल्म ताल में इस्तेमाल किया गया था। शिखर का प्रोजेक्ट हमेशा के लिए बंद हो गया।
1992 में डायरेक्टर शिखर कपूर एक अनोखी साइंस फिक्शन फिल्म बना रहे थे जिसका नाम था टाइम मशीन। उस समय बॉलीवुड में साइंस फिक्शन फिल्मों का चलन लगभग ना के बराबर था। इसीलिए यह प्रोजेक्ट काफी अलग माना जा रहा था। यह हॉलीवुड की फिल्म बैक टू द फ्यूचर से इंस्पायर्ड फिल्म थी। फिल्म में आमिर खान, रवीनाटन, रेखा और नसीरुद्दीन शाह जैसे बड़े एक्टर थे। फिल्म का म्यूजिक मशहूर जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल देने वाले थे।
कहानी एक ऐसे अनाथ लड़के के बारे में बताई जाती है जो टाइम मशीन के जरिए पास्ट में अपने मां-बाप से मिलने चला जाता है। ऐसे समय में जब वह भी एक दूसरे से नहीं मिले थे। उस समय यह कहानी हिंदी सिनेमा के लिए काफी नई और अनोखी मानी जा रही थी। बताया जाता है कि फिल्म की शूटिंग शुरू हो चुकी थी और कई सीन शूट भी किए जा चुके थे। लेकिन धीरे-धीरे बजट बढ़ने लगा।
उस समय विजुअल इफेक्ट्स और तकनीकी काम काफी महंगा हुआ करता था। प्रोडक्शन में पैसों की दिक्कत आने लगी और फिल्म की शूटिंग को रोकना पड़ा। बाद में शेखर कपूर इंटरनेशनल फिल्मों में व्यस्त हो गए और टाइम मशीन दोबारा शुरू ही नहीं हो पाई। आज भी कई फिल्म लवर्स मानते हैं कि अगर यह फिल्म पूरी होकर रिलीज होती तो शायद बॉलीवुड में साइंस फिक्शन फिल्मों का दौर काफी पहले शुरू हो जाता।
2003 में आई मुन्ना भाई एमबीबीएस और 2006 की लगे रहो मुन्ना भाई बॉलीवुड की सर्वप्रिय फिल्मों में गिनी जाती हैं। इन फिल्मों के किरदार मुन्ना और सर्किट ऑडियंस के बीच काफी पॉपुलर हो गए थे। इसी वजह से तीसरी फिल्म मुन्ना भाई चले अमेरिका को अनाउंस किया गया। इस फिल्म में एक बार फिर संजय दत्त और अरशद वारसी मुन्ना और सर्किट के रोल में नजर आने वाले थे।
2006 में इस फिल्म का एक छोटा सा टीज़ भी रिलीज़ किया गया था। उस टीज़ में मुन्ना और सर्किट इंग्लिश सीखने की कोशिश करते नजर आते हैं। यह टीज़ सिनेमाघरों में भी दिखाया गया था और दर्शकों को तीसरी फिल्म का बेसब्री के साथ इंतजार था। लेकिन इसके बाद फिल्म कई साल तक टलती रही। संजय दत्त की कानूनी परेशानियों की वजह से शूटिंग शुरू ही नहीं हो पाई।
इसी दौरान डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने दूसरी फिल्मों पर काम करना शुरू कर दिया। जैसे पीके और बाद में संजू। बाद में एक और वजह सामने आई। हाल ही में अरशद वारसी ने बताया कि फिल्म की कहानी कुछ हद तक शाहरुख खान की फिल्म माय नेम इज खान से मिलती जुलती लग रही थी। दोनों कहानियों में अमेरिका जाना और राष्ट्रपति से मिलने की कोशिश जैसा प्लॉट था।
इसीलिए राजकुमार हिरानी इस दोहराव से बचना चाहते थे और उन्होंने इस आईडिया को कैंसिल कर दिया। कई बार खबरें आई कि फिल्म की स्क्रिप्ट दोबारा लिखी जा रही है। लेकिन इतने साल बीत जाने के बाद भी मुन्ना भाई चले अमेरिका अब तक फ्लोर पर नहीं आ पाई है। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक राजकुमार ईरानी अभी भी मुन्ना भाई 3 के लिए नई कहानी पर काम कर रहे हैं। 1997 में बनी लेडीज ओनली एक हिंदी कॉमेडी फिल्म थी
जिसे कमल हासन ने प्रोड्यूस किया था। यह उनकी 1994 की तमिल हिट फिल्म मगलि मत्तुम की हिंदी रिमेक थी। दिलचस्प बात यह है कि तमिल फिल्म खुद हॉलीवुड की फिल्म 925 से प्रेरित मानी जाती है। तमिल वर्जन काफी हिट रहा था। इसीलिए इसकी सफलता के बाद इसका हिंदी वर्जन बनाने का फैसला किया गया। इस फिल्म को दिनेश शैलेंद्र ने डायरेक्ट किया था। फिल्म में रणधीर कपूर, सीमा विश्वास, शिल्पा शिरोडकर और हीरा राजगोपाल जैसे एक्टर थे।
कहानी तीन कामकाजी महिलाओं की थी जो अपने ऑफिस के बॉस से परेशान रहती हैं और उसे सबक सिखाने का प्लान बनाती हैं। फिल्म में रणधीर कपूर उस परेशान करने वाले बॉस के रोल में थे। वहीं कमल हसन का भी इसमें एक छोटा सा कैमियो था जिसमें वो एक डेड बॉडी यानी लाश के रोल में नजर आने वाले थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म 1997 में पूरी बन चुकी थी और रिलीज़ के लिए भी तैयार थी।
लेकिन किसी वजह से इसे थिएटर्स में रिलीज़ नहीं किया जा सका। आज तक साफ तौर पर नहीं पता चल पाया कि फिल्म रिलीज़ क्यों नहीं हो पाई। कुछ जगह यह कहा गया कि शायद डिस्ट्रीब्यूटर्स को फिल्म में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी या पैसों से जुड़ी दिक्कत थी। इसी वजह से लेडीज ओनली इस फिल्म में गिनी जाती है जो पूरे बनने के बाद भी कभी रिलीज नहीं हुई। 1970 के दशक की शुरुआत में डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी एक फिल्म बना रहे थे जिसका शुरुआती नाम बताया जाता है। एक था चंद्र, एक थी सुधा।
बाद में इसका नाम अपना पराया रखा गया। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, रेखा और जय बहादुरी को साथ लेने की योजना थी। उस समय यह कास्ट काफी दिलचस्प मानी जा रही थी क्योंकि ऋषिकेश मुखर्जी पहले ही अमिताभ के साथ आनंद, अभिमान और चुपके-चुपके जैसी सफल फिल्में बना चुके थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म की शूटिंग भी शुरू हो चुकी थी और कुछ सीन शूट कर लिए गए थे। लेकिन उसी दौरान फिल्म को लेकर कुछ दिक्कतें आने लगी। कुछ खबरों में यह भी कहा गया कि डिस्ट्रीब्यूटर्स को फिल्म के बिजनेस को लेकर भरोसा नहीं था
और अमिताभ बच्चन को बदलने की भी चर्चा हुई थी। उस समय अमिताभ बच्चन का करियर अभी शुरुआती दौर में था और उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पा रही थी। इसीलिए फाइनेंस से जुड़ी परेशानियां भी सामने आई और फिल्म का काम धीरे-धीरे रुक गया। इसके कुछ साल बाद 1973 में जंजीर रिलीज़ हुई जिसने अमिताभ बच्चन की किस्मत बदल दी और उन्हें बड़ा स्टार बना दिया। दिलचस्प बात यह है कि बाद में अमिताभ बच्चन और रेखा ने साथ में दो अनजाने और आला जैसी फिल्मों में काम किया।
अपना पराया बॉलीवुड की उन फिल्मों में गिनी जाती है जो शुरू तो हुई लेकिन कभी पूरी नहीं हो पाई। तो यह थी बॉलीवुड की कुछ ऐसी फिल्में जिनके बारे में आज भी सिनेमा प्रेमी बात करते हैं। बड़े स्टार, बड़े डायरेक्टर और दिलचस्प कहानियां होने के बावजूद ये फिल्में कभी पर्दे तक नहीं पहुंच पाई। सोचिए अगर ये फिल्में सच में रिलीज़ हुई होती तो शायद बॉलीवुड की कई यादगार जोड़ियां और कहानियां हमें देखने को मिलती। अब आप बताइए कि इनमें से कौन सी फिल्म आप सबसे ज्यादा देखना पसंद करते? कमेंट करके जरूर बताइए और अगर आपको ऐसी ही फिल्मी किस्से और दिलचस्प कहानियां पसंद हैं